TMC Election Symbol: ममता गुट को फुटबॉल खिलाड़ी और अरूप रॉय खेमे को मिला लिफाफा
निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में छह अक्टूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी नीत खेमे को ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ जबकि अरूप रॉय गुट को ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। यह आदेश निर्वाचन आयोग द्वारा दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद आया। तृणमूल के दोनों गुटों के बीच, पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अधिकार को लेकर विवाद चल रहा है।
निर्वाचन आयोग के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी नीत गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और अरूप रॉय की अगुवाई वाले प्रतिद्वंद्वी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम आवंटित किया। आयोग ने बृहस्पतिवार रात जारी अपने अंतरिम आदेश में ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ (एआईटीसी) को लेकर विवाद में शामिल दोनों पक्षों को निर्देश दिया था कि वे आगामी पश्चिम बंगाल उपचुनावों के लिए पार्टी के नाम और उसके ‘जोड़ा घास फूल’ चुनाव चिह्न का इस्तेमाल न करें। आयोग ने उनसे शुक्रवार सुबह तक अपनी पसंद के नाम और चुनाव चिह्न बताने को कहा था।
आयोग ने कहा था कि प्रस्तावित नाम ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ से मिलता-जुलता हो सकता है और चुनाव चिह्न निर्दलीय उम्मीदवारों एवं पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के लिए अधिसूचित खाली या उपलब्ध चुनाव चिह्नों की सूची में से चुना जाना चाहिए। पूर्व मेदिनीपुर जिले के नंदीग्राम एवं मुर्शिदाबाद जिले के रेजीनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव छह अक्टूबर को होने हैं और मतगणना नौ अक्टूबर को होगी। निर्वाचन आयोग ने कहा था कि ‘चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968’ के पैरा 15 के तहत कार्यवाही पूरी करने के लिए पर्याप्त समय नहीं था लेकिन उसने आगामी उपचुनावों के लिए पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न की जरूरत को ध्यान में रखा।
आयोग ने कहा था कि यह अंतरिम व्यवस्था खास तौर पर आगामी उपचुनावों के लिए की गई है और यह तब तक लागू रहेगी जब तक कि ‘चुनाव चिह्न आदेश’ के पैरा 15 के तहत विवाद का अंतिम समाधान नहीं हो जाता। निर्वाचन आयोग ने बंगाल के रेजीनगर और नंदीग्राम तथा असम के नागांव में, जहां उसी दिन लोकसभा उपचुनाव होने हैं, निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे नामांकन की जांच और चुनाव चिह्न आवंटित करने के दौरान आयोग के आदेशों का सख्ती से पालन करें। आयोग ने कहा कि रेजीनगर से नामांकन दाखिल करने वाले सफीउज्ज्मान शेख और नंदीग्राम से नामांकन दाखिल करने वाले एहतेशमुल हक को डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस (जिसका चुनाव चिह्न लिफाफा है) का उम्मीदवार माना जाएगा।
उनके नामांकन पत्रों पर अरूप रॉय के हस्ताक्षर हैं। इसी तरह, रेजीनगर में रबीउल आलम चौधरी और नंदीग्राम में संचिता प्रधान (डे) को ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का उम्मीदवार माना जाएगा, जिसका चुनाव चिह्न फुटबॉल खिलाड़ी है। उनके नामांकन पत्रों पर ममता बनर्जी के हस्ताक्षर हैं।
निर्वाचन आयोग का यह आदेश मई में विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल में हुई बगावत के बाद आया है। जून में 58 बागी विधायकों ने ममता खेमे के उम्मीदवार शोभनदेब चट्टोपाध्याय के बजाय पार्टी से निकाले गए नेता ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता चुना और विधानसभा अध्यक्ष से मान्यता हासिल कर ली, जो 28 साल के इतिहास में पहली बार पार्टी में विभाजन का संकेत था। इसके पांच दिन बाद यह बगावत संसद तक पहुंच गई।
वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई में 20 लोकसभा सदस्यों ने ‘नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ (एनसीपीआई) का दामन थामा और ‘‘अलग गुट के तौर पर’’ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को समर्थन दिया। इससे पार्टी के संसदीय खेमे में दरार और गहरी हो गई। यह घटनाक्रम ममता बनर्जी के लिए झटका है।
कांग्रेस से अलग होकर 1998 में तृणमूल कांग्रेस की स्थापना होने के बाद से ही उनके द्वारा हाथ से बनाया गया चुनाव चिह्न पार्टी की पहचान का अहम हिस्सा रहा है। यह चुनाव चिह्न पिछले 28 वर्ष से पार्टी की पहचान रहा है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीट पर जीत हासिल की थी और नंदीग्राम सीट छोड़ने का फैसला किया था जबकि आम जनता उन्नयन पार्टी के नेता हुमायूं कबीर ने नाओदा और रेजीनगर दोनों सीट पर जीत हासिल करने के बाद रेजीनगर सीट छोड़ दी थी।
इसी कारण यह उपचुनाव हो रहा है।
महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित किसानों को 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर दे सरकार: Sharad Pawar
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से अपील की कि वह कम बारिश का सामना करने वाले तालुकों में सूखा घोषित करें और प्रभावित किसानों को कम से कम 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से आर्थिक सहायता दें। पवार ने बुधवार को मुख्यमंत्री को लिखे एक पत्र में दावा किया कि राज्य के 36 में से 31 जिलों में कम बारिश के कारण सोयाबीन, कपास और दाल जैसी खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं, साथ ही बुआई का रकबा भी काफी कम हो गया है और पेयजल व चारे की भारी किल्लत पैदा हो गई है। उन्होंने सरकार से मांग की कि वह औपचारिकताओं की प्रतीक्षा किये बिना सूखा घोषित करे और प्रभावित इलाकों को तुरंत राहत पहुंचाए।
पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री ने किसानों को प्रति हेक्टेयर 50,000 रुपये और खेतिहर मज़दूर परिवारों को 25,000 रुपये प्रति परिवार की दर से विशेष सहायता देने की भी मांग की। उन्होंने कृषि ऋण माफी योजना को तुरंत लागू करने और नयी फसल के लिए ऋण उपलब्ध कराने की भी मांग की। पवार ने पत्र में उन किसानों के लिए प्रोत्साहन राशि 50,000 रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये करने की मांग की जो नियमित रूप से कर्ज चुकाते हैं।
उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने 2025-26 में फसल ऋण लिया था लेकिन इस साल भुगतान नहीं कर पाए, उन्हें भी कर्ज माफी योजना में शामिल किया जाए। पवार ने एक रुपये वाली फसल बीमा योजना को पिछली तारीख से लागू करने और पिछले साल बेमौसम बारिश से हुए फसल के नुकसान के लिए घोषित ₹17,000 प्रति हेक्टेयर की सहायता राशि तुरंत जारी करने की भी मांग की। राकांपा(शप) अध्यक्ष ने सूखे जैसे हालात का सामना कर रहे इलाकों के लिए रोजगार गारंटी योजना के तहत खेती और जल संरक्षण से जुड़ी विशेष योजनाएं संचालित करने और बागों को बचाने के लिए पानी के टैंकर की व्यवस्था करने की मांग की।
पवार ने कहा कि राज्य के 36 में से 31 जिलों में औसत से काफी कम बारिश हुई है। उन्होंने कहा कि एक जून से 15 सितंबर के बीच राज्य में 648 मिमी बारिश हुई, जो औसत से 19 प्रतिशत कम है। उन्होंने कहा कि मुंबई, रायगढ़, पालघर और विदर्भ सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में शामिल हैं, और कुछ जिलों में पिछले तीन महीनों के दौरान बारिश सामान्य से लगभग 60 प्रतिशत कम हुई।
पवार ने कहा कि विदर्भ में बुवाई का क्षेत्र जो पिछले साल अगस्त के आखिर तक लगभग 50.04 लाख हेक्टेयर था, वह इस साल घटकर लगभग 47.5 लाख हेक्टेयर रह गया है। उन्होंने विश्व मौसम विज्ञान संगठन के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि ‘अल नीनो’ (समुद्री धारा जिससे मॉनसून प्रभावित होता है) की घटना का असर और भी गंभीर हो सकता है और इसके प्रभाव 2027 से दिखाई दे सकते हैं। इस बीच, महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने पवार पर किसानों की समस्या को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि फडणवीस ने कम बारिश वाले जिलों में फसल के नुकसान का आकलन करने के लिए पहले ही ‘पंचनामा’ (सर्वेक्षण)करने का आदेश दे दिया है। बावनकुले ने कहा कि सभी जिलाधिकारियों, प्रभारी मंत्रियों और विधायकों को क्षेत्र में जाकर स्थिति का जायजा लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने 2017 में एक सरकारी आदेश और 2018 में एक अन्य सरकारी आदेश जारी किया था, इसलिए हमें यह तय करना होगा कि इनमें से किसका पालन किया जाए और किस राहत योजना का इस्तेमाल किया जाए तथा इसके लिए एक छोटा सा सर्वेक्षण आवश्यक है।
बावनकुले ने कहा, ‘‘अगर सर्वेक्षण ठीक से किया जाए, तो योग्य किसानों को न्याय मिलेगा। अगर हम सही तरीके से सर्वेक्षण नहीं करते और जरूरी कदम नहीं उठाते, तो इसका कोई लाभ नहीं होगा।
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