Responsive Scrollable Menu

Neet Paper लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, परीक्षा एजेंसी के दफ्तर जाएंगे दोनों जज

नीट परीक्षा में पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं. जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि सिर्फ कागजों में सुधार करने से काम नहीं चलेगा. यह भी देखना जरूरी है कि परीक्षा को सुरक्षित बनाने के लिए जो इंतजाम किए गए हैं, वे जमीन पर सही तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं.

सुप्रीम कोर्ट के दोनों जज राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के दिल्ली स्थित दफ्तर का खुद दौरा कर सकते हैं. इस दौरान अदालत यह देखेगी कि परीक्षा को सुरक्षित रखने के लिए किस तरह की व्यवस्था की गई है. कर्मचारियों की जिम्मेदारी क्या है, परीक्षा से जुड़े काम कैसे किए जाते हैं और पेपर की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम हैं, इन सभी पहलुओं को देखा जा सकता है.

अदालत की चिंता सिर्फ नीट परीक्षा तक सीमित नहीं है. सवाल यह है कि आने वाले समय में नीट समेत दूसरी बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं को पेपर लीक और किसी भी तरह की छेड़छाड़ से कैसे बचाया जाए. अदालत यह देखना चाहती है कि परीक्षा व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित और भरोसेमंद है या नहीं.

नंदन नीलेकणि की समिति के काम पर भी नजर 

सुप्रीम कोर्ट ने नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली समिति के काम की प्रगति की जानकारी भी मांगी है. इस समिति को परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सुझाव देने की जिम्मेदारी दी गई है.

अदालत यह जानना चाहती है कि समिति ने अब तक क्या काम किया है और परीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कौन-कौन से सुझाव दिए गए हैं. सरकार को इस बारे में प्रगति रिपोर्ट अदालत के सामने रखनी होगी.

स्थायी व्यवस्था बनाने पर जोर 

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में केवल अस्थायी इंतजाम के भरोसे काम नहीं चलना चाहिए. संस्था में पर्याप्त स्थायी कर्मचारी होने चाहिए और हर काम की जिम्मेदारी साफ तौर पर तय होनी चाहिए.

अदालत यह भी जानना चाहती है कि परीक्षा एजेंसी में कितने कर्मचारी स्थायी हैं और कितने दूसरे विभागों से कुछ समय के लिए लाए जाते हैं. अदालत की चिंता यह है कि इतनी बड़ी परीक्षाओं को कराने वाली संस्था के पास अपनी मजबूत और स्थायी व्यवस्था होनी चाहिए.

 छात्रों के भरोसे से जुड़ा मामला 

नीट जैसी परीक्षा में लाखों छात्र शामिल होते हैं. परीक्षा में किसी भी तरह की गड़बड़ी का सीधा असर छात्रों के भविष्य पर पड़ता है. इसलिए अदालत अब केवल यह सुनना नहीं चाहती कि व्यवस्था सुरक्षित है, बल्कि यह भी देखना चाहती है कि सुरक्षा के दावे वास्तव में कितने मजबूत हैं.

आने वाले समय में सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की व्यवस्था और सुधारों की प्रगति को देखेगा. अदालत का जोर ऐसी परीक्षा व्यवस्था तैयार करने पर है, जिसमें प्रश्नपत्र की सुरक्षा से लेकर परीक्षा कराने तक हर स्तर पर जिम्मेदारी तय हो और किसी भी तरह की छेड़छाड़ की गुंजाइश बेहद कम हो.

Continue reading on the app

DUSU चुनाव में नियम तोड़ने पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, जीत के जुलूस पर रोक

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ यानी DUSU चुनाव को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सख्त रुख अपनाया. कोर्ट ने चुनाव के दौरान नियमों के कथित उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए उम्मीदवारों और छात्र संगठनों से जवाब मांगा है.अदालत ने यह भी साफ कर दिया कि चुनाव नतीजे आने के बाद किसी भी तरह का विजय जुलूस नहीं निकाला जाएगा.

उम्मीदवारों को नोटिस जारी किया

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने छात्र संगठनों और उम्मीदवारों को नोटिस जारी कर पूछा है कि चुनावी नियमों के उल्लंघन के लिए उनके खिलाफ सामूहिक चुनावी हर्जाना क्यों न लगाया जाए. कोर्ट ने कहा कि पिछले चुनावों के दौरान भी नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आए थे और बार-बार ऐसी स्थिति दोहराई नहीं जा सकती.

एफआईआर और गिरफ्तारियां 

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने प्रचार के दौरान वाहनों के काफिले, बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों और कथित तौर पर हथियारों के प्रदर्शन जैसे मुद्दे उठे. पुलिस की ओर से अदालत को बताया गया कि उल्लंघनों के संबंध में चालान किए गए हैं, वाहनों को जब्त किया गया है और कुछ मामलों में एफआईआर और गिरफ्तारियां भी हुई हैं.

अवमानना की कार्रवाई भी

अदालत ने खास तौर पर विजय जुलूस को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए. नतीजे घोषित होने के बाद उम्मीदवार, छात्र या उनके समर्थक सड़कों के अलावा विश्वविद्यालय परिसर और छात्रावासों में भी विजय जुलूस नहीं निकाल सकेंगे. दिल्ली पुलिस को इस आदेश का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है. कोर्ट ने यह भी कहा कि आदेश का उल्लंघन होने पर आपराधिक और प्रशासनिक कार्रवाई के साथ अदालत की अवमानना की कार्रवाई भी हो सकती है.

किसी तरह की झिझक नहीं 

कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल छात्र होने के आधार पर पुलिस को कार्रवाई करने में किसी तरह की झिझक नहीं होनी चाहिए. अदालत के मुताबिक चुनाव से जुड़े नियमों का पालन सभी उम्मीदवारों और संगठनों को करना होगा.

चुनावी हर्जाना क्यों नहीं लगाया जाना चाहिए

अब छात्र संगठनों और उम्मीदवारों को अदालत के नोटिस का जवाब देना होगा. याचिकाकर्ता पक्ष को कथित उल्लंघनों से जुड़े दस्तावेज और अन्य सामग्री दो सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराने को कहा गया है. इसके बाद संबंधित पक्षों से यह पूछा जाएगा कि उनके खिलाफ चुनावी हर्जाना क्यों नहीं लगाया जाना चाहिए.

दिल्ली हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद DUSU चुनाव के नतीजों के बाद होने वाले जश्न को लेकर स्थिति साफ हो गई है. परिणाम आने के बाद सड़कों, कैंपस और छात्रावासों में विजय जुलूस पर रोक रहेगी और दिल्ली पुलिस को इसे लागू कराने के निर्देश दिए गए हैं.

Continue reading on the app

  Sports

WCPL 2026 Final: 39 साल, 39 चमत्कारिक रन…जानिए कौन हैं चेडियन नेशन जिन्होंने गयाना को बनाया पहली बार चैंपियन

महिला कैरेबियन प्रीमियर लीग के फाइनल में गयान अमेजॉन वॉरियर्स को चमत्कारिक जीत मिली. ये जीत तय की 39 साल की खिलाड़ी ने, जिसने नाबाद 39 रन ही बनाकर मैच पलट दिया. Fri, 18 Sep 2026 20:52:36 +0530

  Videos
See all

Pitbull Attack: पिटबुल बने 'आदमखोर'? | Sonipat | CCTV Footage | Breaking #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-18T16:02:36+00:00

ChakraView | Sumit Awasthi | ममता को फुटबॉल खिलाड़ी, ऋतुब्रत को लिफाफा, कौन भारी? | West Bengal #tmktech #vivo #v29pro
2026-09-18T16:09:05+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers