अमेरिका ने रूसी जहाज से छोड़े सभी भारतीय, US ने दी क्लीन चिट
भारत के लिए अमेरिका से एक बड़ी खबर सामने आई है. अमेरिका के सुरक्षाबलों ने पिछले सप्ताह अटलांटिक महासागर में जब्त किए गए रूसी जहाज पर मौजूद सभी भारतीयों को रिहा कर दिया है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सुरक्षा बलों ने संदिग्ध गतिविधियों और प्रतिबंधों के उल्लंघन के आरोप में अटालंटिक महासागर में एक रूसी जहाज को इंटरसेप्ट किया था, जिसे बाद में कब्जे में ले लिया गया था. इसी जहाज पर कई भारतीय नागरिक भी थे. जैसे ही अमेरिका ने इस जहाज को जब्त किया, वैसे ही भारतीयों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं.
ताइवान का आरोप: चीन कंपनियों के जरिए फर्जी न्यूज साइट बनाकर फैला रहा है दुष्प्रचार
ताइपे, 12 जनवरी (आईएएनएस)। ताइवान की शीर्ष खुफिया एजेंसी ने चीन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वह चीनी आईटी और मार्केटिंग कंपनियों के जरिए फर्जी न्यूज वेबसाइट, सोशल मीडिया अकाउंट और बॉट नेटवर्क बनाकर ताइवान के खिलाफ बड़े पैमाने पर दुष्प्रचार फैला रहा है। इसे चीन की तथाकथित “कॉग्निटिव वॉरफेयर” रणनीति का हिस्सा बताया गया है।
ताइवान के नेशनल सिक्योरिटी ब्यूरो (एनएसबी) ने रविवार को 2025 में ताइवान के खिलाफ चीन की संज्ञानात्मक युद्ध रणनीति पर आधारित एक विश्लेषण रिपोर्ट जारी की। ताइवान की सेंट्रल न्यूज एजेंसी के मुताबिक, रिपोर्ट में बताया गया है कि 2025 के दौरान ताइवान की खुफिया एजेंसियों ने 45,000 से अधिक फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट और करीब 23.14 लाख भ्रामक या झूठी जानकारियों की पहचान की है।
एनएसबी के अनुसार, यह दुष्प्रचार चीनी आईटी कंपनियों द्वारा संचालित फर्जी और बॉट अकाउंट्स के जरिए फैलाया गया। इन कंपनियों ने बड़े डेटाबेस और ऑटोमेटेड प्रोग्राम तैयार कर रखे हैं, जिन्हें चीन के सेंट्रल पब्लिसिटी डिपार्टमेंट और पब्लिक सिक्योरिटी मंत्रालय के निर्देश पर संचालित किया जा रहा है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सेंट्रल पब्लिसिटी डिपार्टमेंट और एमपीएस, हैक्सुनशे, हाइमाई और हुया जैसी मार्केटिंग कंपनियों का इस्तेमाल कर फर्जी न्यूज वेबसाइट तैयार कराते हैं। ये वेबसाइट पहले क्लिकबेट और हल्की-फुल्की सामग्री के जरिए लोगों को आकर्षित करती हैं और बाद में राजनीतिक कंटेंट पोस्ट कर ताइवान के लोगों की सोच को प्रभावित करने की कोशिश करती हैं।
एनएसबी ने कहा कि इन गतिविधियों का मकसद ताइवान के भीतर मतभेद पैदा करना, जनता की प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करना, ताइवान के सहयोगी देशों की समर्थन देने की इच्छा को प्रभावित करना और चीन के पक्ष में जनसमर्थन तैयार करना है। एजेंसी ने बताया कि वह अन्य सरकारी विभागों के साथ मिलकर फैक्ट-चेकिंग संगठनों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ सहयोग बढ़ा रही है, ताकि फर्जी सूचनाओं को उजागर कर उन्हें हटाया जा सके।
एनएसबी के मुताबिक, सैन्य अभ्यास के दौरान सरकारी नेटवर्क पर साइबर हमले भी तेज हो गए। चीन के सैन्य अभ्यास के पहले दिन करीब 20.8 लाख साइबर हमले दर्ज किए गए, जो दूसरे दिन बढ़कर लगभग 20.9 लाख तक पहुंच गए।
--आईएएनएस
डीएससी
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