Kal Ka Mausam: देश के अधिकांश इलाकों में हाड़ कंपाने वाली ठंड, जानें कल कैसे रहेगा आपके इलाकों का हाल
Kal Ka Mausam: देश के अधिकांश इलाकों में हाड़ कंपाने वाली ठंड पड़ रही है. मैदानी इलाकों के जन-जीवन के लिए अगला दो-तीन दिन मुश्किल भरा हो सकता है. पहाड़ों से आ रही तेज और सूखी हवाओं की वजह से मैदानी इलाके में गलन हो रही है. धूप निकलने के बाद भी लोगों को राहत के आसार नहीं है. उत्तर पश्चिम भारत में सुबह और रात के वक्त न्यूनतम तापमान में खास बदलाव नहीं हो रहा है. इससे शीतलहर की तीव्रता बनी हुई है. मकर संक्रांति और लोहड़ी जैसे पर्व इस बार भी इस बार ठंड और घने कोहरे के बीच ही मनाया जाएगा.
Recorded Minimum Temperature over the Hills of the country at 0830 Hrs IST, 12.01.2026#MinimumTemperature #WeatherUpdate #HillsWeather #IndiaWeather #TemperatureRecord #WeatherForecast @moesgoi @airnewsalerts @DDNational @ndmaindia @ICRER_MHA pic.twitter.com/kkk5KuWJM5
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इन राज्यो में शीतलहर का अलर्ट
भारतीय मौसम विभाग का कहना है कि राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में अगले दो-तीन दिनों तक शीतलहर की स्थिति रहेगी. विभिन्न इलाकों में न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी ज्यादा नीचे चला गया है. कुछ स्थानों पर तो चार डिग्री सेल्सियस से भी कम दर्ज किया गया है, जिस वजह से पाले की स्थिति बन गई है.
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अगले पांच दिनों तक घने कोहरे का अनुमान
उत्तर-पश्चिम भारत के साथ-साथ बिहार में भी अगले पांच दिनों तक सुबह के वक्त घना कोहरा छाए रह सकते हैं. हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान के कई हिस्सों में घना से बहुत घना कोहरा देखने को मिल सकता है. दिल्ली में भी सुबह के वक्त विजिबिलिटी काफी कम रही है. हालांकि, दिन में जैसे-जैसे धूप निकली वैसे-वैसे कोहरा छट गया लेकिन ठंडी हवाओं के वजह से ठिठुरन बनी रही है.
पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस शीतलहर का मुख्य कारण पहाड़ी इलाकों में हुई बर्फबारी है. पहाड़ों से आती उत्तरी हवाओं की वजह से मैदानी इलाकों में गलन हो रही है. जमीन जल्दी ठंडी हो रही है. अगले दो-तीन दिन सर्दी अपने चरम पर रहेगी.
मकर संक्रांति के बाद ठंड से मिल सकती है राहत
दिल्ली और आसपास के मैदानी इलाकों में 15 जनवरी के बाद तापमान में हल्की बढ़ोतरी शुरू होने के संकेत हैं. मध्य भारत में भी अगले कुछ दिनों तक तापमान करीब स्थिर रह सकती है. मकर संक्रांति के बाद धीरे-धीरे ठंड से राहत मिल सकती है.
आरबीआई की मंजूरी असम की मजबूत वित्तीय सेहत को साबित करती है : सीएम सरमा
गुवाहाटी, 12 जनवरी (आईएएनएस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को खराब वित्तीय मैनेजमेंट के आरोपों को लेकर कांग्रेस पर तीखा पलटवार किया। उन्होंने दावा किया कि असम देश का सबसे अच्छा वित्तीय रूप से मैनेज किया जाने वाला और सबसे तेजी से बढ़ने वाला राज्य है, और यह दावा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने भी पक्का किया है।
राज्य के कर्ज और वित्तीय सेहत से जुड़ी आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि असम का वित्तीय अनुशासन सभी तय सीमाओं के अंदर है और स्थापित नियमों का सख्ती से पालन करता है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने एक पारदर्शी और नियम-आधारित कर्ज लेने की नीति अपनाई है, जिससे किसी भी तरह की अनियमितता या वित्तीय कुप्रबंधन की कोई गुंजाइश नहीं है।
सरमा ने कहा कि विपक्ष के बार-बार लगाए गए आरोप राजनीतिक रूप से प्रेरित थे और उनमें तथ्यों की कमी थी, खासकर तब जब आरबीआई ने खुद असम के वित्तीय प्रदर्शन को औपचारिक रूप से मंजूरी दी थी।
उन्होंने पूछा, अगर हमने कुछ गलत किया होता, तो क्या भारतीय रिजर्व बैंक हमें सर्टिफिकेट देता? उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राज्य के वित्त की स्वतंत्र रूप से देश की सर्वोच्च बैंकिंग संस्था द्वारा जांच की गई है।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पर ध्यान केंद्रित करते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी को इसके बजाय अपने शासन के रिकॉर्ड पर आत्मनिरीक्षण करना चाहिए।
उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार की ओर इशारा करते हुए आरोप लगाया कि उसने 92,000 करोड़ रुपए का कर्ज जमा कर लिया है, जिसे उन्होंने सार्वजनिक कर्ज में एक नया बेंचमार्क और चिंता का कारण बताया।
मुख्यमंत्री ने आधिकारिक डेटा के विपरीत होने के बावजूद असम की वित्तीय स्थिति पर सवाल उठाने के लिए मीडिया के एक वर्ग पर भी निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि आरबीआई ने वित्तीय विकास और प्रगति के मामले में असम को शीर्ष पर रखा है, जबकि कुछ क्षेत्रीय रिपोर्टों ने राज्य को पिछड़ा हुआ दिखाया है।
सरमा ने कहा कि यह जनता को तय करना है कि भारतीय रिजर्व बैंक को ज्यादा विश्वसनीयता दी जानी चाहिए या चुनिंदा मीडिया की कहानियों को, यह दोहराते हुए कि असम का वित्तीय शासन मजबूत संस्थागत सत्यापन और डेटा-आधारित आकलन पर आधारित है।
--आईएएनएस
एससीएच
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