iPhone Duo बनाम Galaxy Z Fold 8: कीमत से फीचर्स तक, जानें दोनों फोल्डेबल फोन में कितना अंतर
स्मार्टफोन की दुनिया में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां एप्पल ने अपना पहला फोल्डेबल फोन बाजार में उतार दिया है. पासपोर्ट-साइज रेशियो के साथ आया यह फोन सीधे तौर पर सैमसंग के पहले से मौजूद फोल्डेबल मॉडल को टक्कर दे रहा है. दोनों ही कंपनियों ने अपने इन प्रीमियम डिवाइसेज को बेहतरीन फीचर्स और फ्लैगशिप पहचान के साथ पेश किया है.
जानें क्या रहेगी कीमत
अगर कीमत की बात करें तो दोनों ही ब्रांड्स ने इन्हें प्रीमियम सेगमेंट में रखा है, लेकिन भारत में एप्पल की कीमत काफी अधिक रखी गई है. सैमसंग का गैलेक्सी जेड फोल्ड 8 शुरुआती वेरिएंट के लिए लगभग 1.80 लाख रुपये से शुरू होकर अपने टॉप मॉडल के लिए 2.40 लाख रुपये तक जाता है. दूसरी तरफ, एप्पल आईफोन डुओ की शुरुआती कीमत ही लगभग 3 लाख रुपये रखी गई है, जबकि इसका सबसे हाई-एंड वेरिएंट करीब 4.50 लाख रुपये तक पहुंचता है. एप्पल का यह फोन जल्द ही प्री-ऑर्डर और बिक्री के लिए उपलब्ध होने जा रहा है.
डिस्प्ले और मजबूती की तुलना
दोनों ही फोल्डेबल फोन्स में बड़ी और इमर्सिव स्क्रीन्स दी गई हैं जो यूजर्स को शानदार देखने का अनुभव देती हैं. सैमसंग में टाइटेनियम और गोरिल्ला ग्लास की सुरक्षा के साथ-साथ एक मजबूत आउटर और इनर स्क्रीन मिलती है, जो पानी और धूल से सुरक्षा के लिए विशेष रेटिंग के साथ आती है. वहीं एप्पल ने क्रीज और परावर्तन को कम करने के लिए इनर स्क्रीन पर नैनो टेक्सचर फिनिश का इस्तेमाल किया है. इसके अलावा एप्पल ने अंदरूनी हिस्से में बैटरी के लिए अधिक जगह बनाने के इरादे से फिजिकल सिम स्लॉट को हटाकर केवल ई-सिम का विकल्प दिया है.
प्रोसेसर और परफॉर्मेंस की ताकत
परफॉर्मेंस के मामले में दोनों फोन अपने समय के सबसे शक्तिशाली चिपसेट्स पर काम करते हैं. सैमसंग में क्वालकॉम का सबसे लेटेस्ट स्नैपड्रैगन प्रोसेसर दिया गया है जो भारी मल्टीटास्किंग और 16जीबी तक की रैम को आसानी से संभालता है. दूसरी ओर, एप्पल ने अपने नए 2-नैनोमीटर तकनीक पर बने ए20 प्रो चिपसेट का इस्तेमाल किया है, जिसमें ग्राफिक्स और एआई कार्यों के लिए एक बेहद उन्नत डुअल न्यूरल इंजन सेटअप दिया गया है.
सॉफ्टवेयर, कैमरा और बैटरी बैकअप
सॉफ्टवेयर के स्तर पर सैमसंग एंड्रॉइड के लेटेस्ट वर्जन पर चलता है, जिसमें क्रिएटर्स के लिए खास कैमरा ट्रैकिंग और डुअल रिकॉर्डिंग फीचर्स मिलते हैं. एप्पल का फोन फोल्डेबल स्क्रीन के हिसाब से तैयार किए गए आईओएस पर काम करता है, जो स्प्लिट-स्क्रीन मल्टीटास्किंग और पार्शियल-फोल्ड इस्तेमाल को आसान बनाता है. कैमरा सेटअप में सैमसंग 8के वीडियो रिकॉर्डिंग क्षमता वाले 50-मेगापिक्सल कैमरों के साथ आता है, जबकि एप्पल में 48-मेगापिक्सल का फ्यूजन कैमरा और अंडर-डिस्प्ले फेसटाइम कैमरा दिया गया है. बैटरी के मामले में जहां सैमसंग में 4800 एमएएच की बैटरी के साथ 45-वॉट चार्जिंग मिलती है, वहीं एप्पल लंबे समय तक चलने वाले वीडियो प्लेबैक और तेज मैगसेफ चार्जिंग का दावा करता है.
ये भी पढे़ं: ममता बनर्जी के गुट को मिला 'फुटबॉल खिलाड़ी' सिंबल, जानें अब किस नाम से जानी जाएगी पार्टी
एआई एंट्री-लेवल पदों को प्रतिस्थापित करके प्रबंधन शिक्षा के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर सकता है: सीईए नागेश्वरन
नई दिल्ली, 18 सितंबर (आईएएनएस)। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने शुक्रवार को कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आने वाले दो से तीन दशकों में प्रबंधन शिक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है, क्योंकि यह उन नियमित और विश्लेषणात्मक कार्यों को स्वचालित कर रही है जिनके माध्यम से युवा पेशेवर पारंपरिक रूप से अनुभव हासिल करते रहे हैं।
नोएडा में आयोजित 16वें इंडियन मैनेजमेंट कॉन्क्लेव (आईएमसी 2026) को संबोधित करते हुए नागेश्वरन ने कहा कि एआई के तेजी से विकास ने प्रबंधन शिक्षा की संरचना और उसे पढ़ाने के तरीके पर नए सिरे से सोचने का अवसर पैदा किया है।
उन्होंने कहा कि केवल एआई से जुड़े कुछ अतिरिक्त पाठ्यक्रम शुरू कर देना पर्याप्त नहीं होगा। ऐसे कार्यस्थल के लिए छात्रों को तैयार करने के लिए व्यापक बदलाव की जरूरत होगी, जहां मशीनें विश्लेषणात्मक और नियमित कार्यों का बड़ा हिस्सा संभाल रही हों।
उन्होंने कहा, सिर्फ एक एआई ऐच्छिक विषय जोड़ना पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रबंधन संस्थानों को छात्रों में निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने पर अधिक ध्यान देना होगा।
नागेश्वरन ने कहा कि जैसे-जैसे एआई विश्लेषणात्मक कार्यों को अपने हाथ में लेगा, सही और संतुलित निर्णय लेने की क्षमता का महत्व बढ़ता जाएगा। उन्होंने कहा, एक प्रबंधक का सबसे बड़ा उपकरण स्पष्ट और धैर्यवान दिमाग होता है। यह क्षमता छात्रों के कैंपस में पहुंचने से पहले ही चुनौती के घेरे में है। अगले 20 से 30 वर्षों में भारत के सामने यही वास्तविक चुनौतियां हैं।
उन्होंने कहा कि एआई का सबसे बड़ा प्रभाव उन एंट्री-लेवल नौकरियों पर पड़ सकता है, जो अब तक युवा पेशेवरों के लिए सीखने और अनुभव प्राप्त करने का माध्यम रही हैं। नियमित और पहले से निर्धारित कार्य सबसे पहले स्वचालित हो रहे हैं, जिससे करियर की शुरुआती सीढ़ियां प्रभावित हो सकती हैं।
नागेश्वरन ने कहा, समस्या यह है कि एआई अब ठीक वही जूनियर स्तर का काम कर रहा है। करियर की सीढ़ी के निचले पायदान काटे जा रहे हैं। जो नियमित कार्य युवाओं को सीखने का मौका देते थे, वही सबसे पहले स्वचालित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि दशकों से पेशेवर लोग कार्यस्थल पर अनुभव और प्रशिक्षण के जरिए धीरे-धीरे निर्णय लेने की क्षमता विकसित करते रहे हैं। यदि एआई इस सीखने की प्रक्रिया का बड़ा हिस्सा समाप्त कर देता है, तो भविष्य की पीढ़ियां जटिल निर्णय लेने की क्षमता कैसे विकसित करेंगी, यह एक महत्वपूर्ण सवाल है।
उन्होंने कहा, एक सदी से हम काम करते हुए, अनुभव प्राप्त करते हुए निर्णय लेने की क्षमता सीखते आए हैं। यदि एआई उस प्रशिक्षण प्रक्रिया को खत्म कर देता है, तो अगली पीढ़ी में निर्णय लेने की क्षमता कैसे विकसित होगी?
नागेश्वरन ने इसे प्रबंधन शिक्षा के लिए एक मूलभूत चुनौती बताते हुए कहा कि जिन कौशलों की नकल एआई आसानी से नहीं कर सकता, वही कौशल पारंपरिक कक्षा प्रणाली में सिखाना सबसे कठिन होते हैं।
उन्होंने कहा, यह प्रबंधन शिक्षा के लिए छोटी समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरी समस्या हो सकती है। उनके अनुसार, प्रबंधन के वे पहलू जो अभी भी एआई की पहुंच से बाहर हैं, उन्हें ही सिखाना सबसे मुश्किल है।
शिक्षा की प्राथमिकताओं में बदलाव की जरूरत पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि प्रबंधन संस्थानों को केवल तकनीक और प्रक्रियाएं नहीं, बल्कि निर्णय क्षमता विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। जैसे-जैसे एआई विश्लेषण करने में सक्षम होता जाएगा, प्रबंधकों की भूमिका यह तय करने में अधिक महत्वपूर्ण होगी कि कौन से सवाल पूछे जाएं और एआई द्वारा दिए गए जवाबों पर कितना भरोसा किया जाए।
उन्होंने कहा, सबसे पहले निर्णय लेने की क्षमता सिखाइए, सिर्फ तकनीक नहीं। उन्होंने सुझाव दिया कि केस स्टडीज और निर्णय-आधारित अभ्यासों के माध्यम से छात्रों में यह क्षमता विकसित की जा सकती है।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation








