पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के दो केस मिले:केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री बोले- नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम बनाई, एक्सपर्ट्स की टीम बंगाल भेजी
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सोमवार को बताया कि पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के दो केस सामने आए हैं। मंत्री ने बताया कि पश्चिम बंगाल को मदद देने और बीमारी को फैलने से रोकने के लिए, हमने तुरंत एक नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम बनाई है। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से बात की है। उनसे कहा कि वे अपनी एक्सपर्ट्स की टीम को केंद्र सरकार की टीम के साथ मिलकर काम करने निर्देश दें। नड्डा ने कहा कि 11 जनवरी को इन मामलों की जानकारी मिलने पर, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और स्वास्थ्य प्रधान सचिव के साथ स्थिति पर चर्चा की। पश्चिम बंगाल को हर मदद देने का भरोसा दिया है। नड्डा ने कहा- राज्य सरकार से प्रोटोकॉल शेयर किए स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि हमने पश्चिम बंगाल में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड पब्लिक हाइजीन, कोलकाता, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, पुणे व अन्य संस्थानों के एक्सपर्ट्स की टीम भेजी है। निपाह वायरस बीमारी और संक्रामक बीमारियों के लिए हमारे प्रोटोकॉल केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार राज्य की इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस यूनिट के साथ शेयर किए गए हैं। नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल और पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशंस सेंटर को भी एक्टिवेट कर दिया गया है। क्या है निपाह वायरस WHO के मुताबिक, साल 1998 में मलेशिया के सुंगई निपाह गांव में पहली बार निपाह वायरस का पता चला था। इसी गांव के नाम पर ही इसका नाम निपाह पड़ा। आमतौर पर यह वायरस चमगादड़ और सुअर से फैलता है। अगर इस वायरस से इन्फेक्टेड चमगादड़ किसी फल को खा लेता है और उसी फल या सब्जी को कोई इंसान या जानवर खाता है तो वह भी इन्फेक्टेड हो जाता है। निपाह वायरस सिर्फ जानवरों से ही नहीं बल्कि एक इन्फेक्टेड व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी फैलता है। यह लार, खून और बॉडी फ्लूइड से फैल सकता है। निपाह वायरस के लक्षण दो से तीन दिन में दिखने लगते हैं। इसके शुरुआती लक्षणों में बुख़ार, सिरदर्द और सांस लेने में परेशानी जैसी दिक्कतें होने लगती हैं।
पाकिस्तान की सरकारी कंपनियां लगातार घाटे में, आर्थिक संकट और गहराया: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 12 जनवरी (आईएएनएस)। राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और गंभीर आर्थिक संकट के बीच पाकिस्तान की सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियां लगातार घाटे में जा रही हैं। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इन कंपनियों का शुद्ध घाटा 300 प्रतिशत तक बढ़ गया है, जबकि करदाताओं के पैसों से दी जाने वाली सरकारी मदद बढ़कर 2.1 ट्रिलियन रुपये (स्थानीय मुद्रा) तक पहुंच गई है।
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