लखीमपुर में मूंज घास से महिलाएं बुन रही खूबसूरत डलियां, एक हफ्ते में तैयार होती है एक टोकरी, प्लास्टिक के दौर में जिंदा है परंपरा
Lakhimpur Kheri News: मंजू बताती है कि वे आज भी घर के कामकाज निपटाने के बाद मूंज और काश से डलियां तैयार करती है. एक डलिया बनाने में करीब एक हफ्ता लग जाता है. मंजू ने यह हुनर अपनी मां से सीखा है. मंजू के मुताबिक, पहले ग्रामीण इलाकों में मूंज और काश से बनी चीजों का इस्तेमाल आम बात थी, लेकिन समय के साथ प्लास्टिक और बाज़ार में मिलने वाले दूसरे सामानों का चलन बढ़ गया. इसके बावजूद गांवों में आज भी कई महिलाएं इस पुरानी परंपरा को अपने हाथों से जिंदा रखे हुए है.
वेंटिलेटर पर अपना बच्चा देख गैंगस्टर नीरज बवानिया को याद आई इंसानियत, बोला-कोर्ट मुझे नहीं दे रहा राहत
गैंगस्टर नीरज बवानिया को बीमार बच्चों से मिलने के लिए 6 घंटे की पैरोल दी गई थी, हालांकि वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ती अपनी बच्ची को देख उसे इंसानियत याद आई और उसने कहा, 'मेरा एक बच्चा मर गया, दूसरा वेंटिलेटर पर ही लेकिन मुझे राहत नहीं दी जा रही.'
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