वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोने और चांदी ने छुए नए रिकॉर्ड स्तर, सिल्वर में 4 प्रतिशत से ज्यादा की उछाल
मुंबई, 12 जनवरी (आईएएनएस)। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन, सोमवार को सोने और चांदी की कीमतें अपने अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। इसकी वजह अमेरिका में बढ़ता राजनीतिक तनाव और ईरान में तेज होते विरोध प्रदर्शन रहे, जिससे दुनिया भर के बाजारों में चिंता बढ़ गई।
खबर लिखे जाने तक मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 2,333 रुपए यानी 1.68 प्रतिशत बढ़कर 1,41,152 रुपए प्रति 10 ग्राम पहुंच गया। वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी 10,598 रुपए यानी 4.19 प्रतिशत चढ़कर 2,63,323 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई।
सोने ने आज के कारोबारी सत्र में रिकॉर्ड 1,41,250 रुपए प्रति 10 ग्राम का उच्चतम स्तर छुआ, जो कि अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। चांदी ने भी रिकॉर्ड 2,63,996 रुपए प्रति किलोग्राम का हाई टच किया, जो अब तक सबसे उच्चतम स्तर है।
इतना ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 1.45 प्रतिशत बढ़कर 4,575.82 डॉलर प्रति औंस हो गई, जबकि इसने नया रिकॉर्ड 4,601.17 डॉलर भी छुआ। वहीं चांदी की कीमत 4.85 प्रतिशत बढ़कर 83.19 डॉलर हो गई और इसने 83.88 डॉलर का रिकॉर्ड स्तर भी छू लिया।
अमेरिकी फेड के प्रमुख जेरोम पॉवेल ने खुलासा किया कि केंद्रीय बैंक को न्याय विभाग से ग्रैंड जूरी के समन प्राप्त हुए हैं। यह मामला केंद्रीय बैंक के मुख्यालय में हुए निर्माण कार्य से जुड़ा है। इससे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और केंद्रीय बैंक के बीच तनाव और बढ़ गया है।
मेहता इक्विटीज लिमिटेड के कमोडिटीज उपाध्यक्ष राहुल कलांत्री ने कहा कि दुनिया में बढ़ते युद्ध जैसे हालात, अमेरिका के केंद्रीय बैंक पर राजनीतिक दबाव और अमेरिका में उम्मीद से कमजोर रोजगार आंकड़ों के कारण लोग सुरक्षित निवेश के रूप में सोना और चांदी खरीद रहे हैं।
इस बीच, ईरान में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों ने भी बाजार में डर बढ़ा दिया है। निवेशकों को चिंता है कि अगर वहां राजनीतिक हालात बिगड़े तो तेल की आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। राष्ट्रपति ट्रंप के ईरान को लेकर दिए गए बयान से भी अनिश्चितता बढ़ी है।
पिछले सप्ताह आए अमेरिका के रोजगार आंकड़ों में नौकरियों की संख्या उम्मीद से कम रही, जिससे यह उम्मीद बढ़ गई है कि केंद्रीय बैंक इस साल ब्याज दरों में कटौती कर सकता है।
विश्लेषकों के अनुसार, सोने को 1,34,550 से 1,32,310 रुपए के स्तर पर सपोर्ट मिल रहा है, जबकि 1,41,350 से 1,43,670 रुपए के स्तर पर रेजिस्टेंस है। वहीं, चांदी का सपोर्ट लेवल 2,48,810 से 2,44,170 रुपए और रेजिस्टेंस लेवल 2,55,810 से 2,59,470 रुपए के बीच बताया गया है।
पिछले हफ्ते सोने की कीमत में 4 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई, जबकि चांदी 7 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ी। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध, अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति की गिरफ्तारी और ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के बयान ने भी सोने-चांदी की कीमतों को ऊपर ले जाने में अहम भूमिका निभाई।
--आईएएनएस
डीबीपी/एएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
अमेरिकी टैरिफ के बावजूद भारत के समुद्री खाद्य निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी : केंद्र
नई दिल्ली, 12 जनवरी (आईएएनएस)। सरकार ने सोमवार को बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का समुद्री खाद्य निर्यात मूल्य के हिसाब से अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। इस दौरान निर्यात बढ़कर 62,408 करोड़ रुपए हो गया, जो कि 2023-24 के 60,523.89 करोड़ रुपए की तुलना में 3.11 प्रतिशत अधिक है। सरकार के अनुसार, अमेरिका द्वारा भारी शुल्क लगाए जाने के बावजूद चालू वित्त वर्ष 2025-26 में भी निर्यात बढ़ रहा है।
इस बीच, मछली उत्पादन में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2024-25 में मछली उत्पादन बढ़कर 197.75 लाख टन हो गया, जबकि वर्ष 2013-14 में यह 95.79 लाख टन था, यानी 106 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई है।
अप्रैल 2025 से अमेरिका ने भारतीय समुद्री खाद्य उत्पादों पर शुल्क बहुत बढ़ा दिए हैं। खासकर झींगा निर्यात पर चरणबद्ध तरीके से शुल्क बढ़ाकर कुल 58.26 प्रतिशत कर दिया गया है। अमेरिका को होने वाले भारत के समुद्री खाद्य निर्यात में झींगे की हिस्सेदारी करीब 90 प्रतिशत है।
इतनी बड़ी चुनौती के बावजूद भारत के समुद्री खाद्य क्षेत्र ने मजबूती और समझदारी दिखाई है और हालात के अनुसार प्रदर्शन किया है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, अप्रैल से अक्टूबर 2024 (टैरिफ लागू होने से पहले) और अप्रैल से अक्टूबर 2025 (टैरिफ लागू होने के बाद) की तुलना करने पर साफ दिखता है कि निर्यात बढ़ा है। इस दौरान समुद्री खाद्य निर्यात मूल्य में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और यह 35,107.6 करोड़ रुपए से बढ़कर 42,322.3 करोड़ रुपए हो गया। मात्रा के हिसाब से भी निर्यात 12 प्रतिशत बढ़कर 9.62 लाख टन से 10.73 लाख टन हो गया। जमे हुए झींगे के निर्यात में भी मूल्य के हिसाब से 17 प्रतिशत और मात्रा के हिसाब से 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने कहा कि पिछले दशक में चलाई गई योजनाओं और सही नीतियों की वजह से मत्स्य क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल हुई हैं।
वर्ष 2014-15 से मत्स्य पालन विभाग द्वारा लागू की गई विभिन्न योजनाओं के तहत अब तक 74.66 लाख लोगों को रोजगार मिला है, जिसमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार दोनों शामिल हैं।
वर्तमान में भारत 130 देशों को 350 से अधिक प्रकार के समुद्री खाद्य उत्पाद निर्यात करता है, जिसमें मत्स्य पालन का योगदान निर्यात मूल्य का 62 प्रतिशत है। भारत अब उच्च मूल्य और प्रसंस्कृत समुद्री खाद्य उत्पादों का एक बड़ा केंद्र बनता जा रहा है।
मंत्रालय के अनुसार, मूल्यवर्धित उत्पादों का योगदान भारत के कुल निर्यात में करीब 11 प्रतिशत है। पिछले 5 वर्षों में इन उत्पादों का निर्यात 56 प्रतिशत बढ़ा है, जो 4,863.40 करोड़ रुपए से बढ़कर 7,589.93 करोड़ रुपए हो गया है।
पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र में निवेश भी काफी बढ़ाया है।
सरकार ने बताया कि 38,572 करोड़ रुपए के निवेश को अलग-अलग योजनाओं के तहत मंजूरी दी गई है या घोषणा की गई है। इनमें ब्लू रिवोल्यूशन, मत्स्य पालन और जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (एफआईडीएफ), प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) और प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) शामिल हैं।
--आईएएनएस
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