कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने सोमवार को आगामी केंद्रीय बजट को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए चेतावनी दी कि संसद के अगले सत्र की तैयारियों के बीच राज्य सरकारें और व्यापक अर्थव्यवस्था एक नाजुक दौर में प्रवेश कर रही हैं। संसदीय कार्यक्रम की घोषणा के बाद X पर एक पोस्ट में रमेश ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट लगभग 20 दिनों में पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बजट में अनिवार्य रूप से 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें शामिल होंगी, जिसने 17 नवंबर, 2025 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।
रमेश ने कहा कि ये सिफारिशें 2026-27 से 2031-32 तक की अवधि को कवर करती हैं और केंद्र और राज्यों के बीच कर राजस्व के बंटवारे के साथ-साथ राज्यों के बीच इस राजस्व के वितरण से संबंधित हैं। राज्य सरकारों में बढ़ती बेचैनी को उजागर करते हुए, कांग्रेस नेता ने वीबी-जी आरएएम जी अधिनियम, 2025 में नए लागत-साझाकरण फार्मूले की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें "नए कानून में लागू 60:40 के लागत-साझाकरण फार्मूले से पहले से ही बहुत चिंतित हैं, जो एमजीएनआरईजीए को खत्म कर देगा। उन्होंने आगे कहा कि बजट नजदीक आने के साथ ही वे और भी ज्यादा आशंकाओं के साथ चिंतित होंगी।
रमेश ने भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद तीन प्रमुख चुनौतियों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, कर कटौती और मजबूत लाभ मार्जिन के बावजूद निजी कंपनियों का निवेश सुस्त बना हुआ है; घरेलू बचत दरें तेजी से गिरी हैं, जिससे निवेश क्षमता सीमित हो गई है; और धन, आय और उपभोग में असमानताएं लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है, और कहा कि ये मुद्दे विकास और रोजगार सृजन की स्थिरता के लिए खतरा हैं।
सरकार के दृष्टिकोण पर सवाल उठाते हुए रमेश ने कहा कि यह देखना बाकी है कि आगामी बजट "सांख्यिकीय भ्रमों के आरामदायक दायरे" से बाहर निकलकर आर्थिक वास्तविकताओं को स्वीकार करता है और सार्थक सुधारात्मक कदम उठाता है या नहीं। उन्होंने चेतावनी दी कि उच्च जीडीपी वृद्धि दर, जो बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण है, तब तक कायम नहीं रह सकती जब तक आगामी बजट में इन संरचनात्मक चुनौतियों का तत्काल समाधान नहीं किया जाता।
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यूपी में कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी आज यानी की 12 जनवरी को अपना 54वां जन्मदिन मना रही हैं। प्रियंका गांधी के परिवार में तीन-तीन प्रधानमंत्री हुए। पंडित जवाहर लाल नेहरू, दादी इंदिरा गांधी और पिता राजीव गांधी ने देश की सत्ता संभाली। वहीं प्रियंका गांधी में लोग इंदिरा गांधी का अक्स देखते थे। लेकिन इसके बाद भी प्रियंका ने 52 साल की उम्र में पहला चुनाव लड़ा। इस चुनाव में प्रियंका ने इतिहास रह दिया। तो आइए जानते हैं प्रियंका गांधी के जन्मदिन के मौके पर उनके जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
जन्म और परिवार
दिल्ली में 12 जनवरी 1972 को प्रियंका गांधी का जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम राजीव गांधी था, जोकि पूर्व प्रधानमंत्री थे और मां सोनिया गांधी पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष थीं। प्रियंका गांधी ने बिजनेसमैन रॉबर्ट वाड्रा से शादी की है। बता दें कि जब प्रियंका 13 साल की थीं, तो वह पहली बार रॉबर्ट वाड्रा से मिली थीं।
इंदिरा गांधी के करीब रहीं
प्रियंका गांधी को अपनी दादी इंदिरा गांधी से काफी लगाव था। वहीं प्रियंका भी अपनी दादी इंदिरा की तरह दिखती हैं। वहीं इंदिरा गांधी भी प्रधानमंत्री की भूमिका से बाहर आकर अपने पोते राहुल और प्रियंका के साथ समय बिताने से नहीं चूकती थीं।
राजनीति से दूर
राजनीति की बात करें, तो शुरूआत में प्रियंका गांधी राजनीति से दूर रहीं। फिर साल 2004 के लोकसभा चुनाव में प्रियंका गांधी ने अपनी मां सोनिया गांधी के प्रचार का प्रबंधन संभाला था। लेकिन वह राजनीति में सक्रिय नहीं हुई थीं। फिर साल 2007 के विधानसभा चुनाव में प्रियंका गांधी ने कांग्रेस का प्रचार-प्रसार किया और अमेठी-रायबरेली तक की सीमित रहीं। फिर साल 2009 में प्रियंका ने इसी तरह से प्रचार-प्रसार किया।
लेकिन फिर भी प्रियंका गांधी कांग्रेस पार्टी से आधिकारिक रूप से नहीं जुड़ी थीं। वहीं साल 2012 में कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को स्टार प्रचारक के रूप में उतारा। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर प्रियंका गांधी ने स्टार प्रचारक के रूप में कांग्रेस का साथ दिया। इसके बाद साल 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवारों के लिए प्रियंका ने सीमित दायरे में रहकर प्रचार किया। इसके बाद अगले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने प्रियंका को पूर्वी उत्तर प्रदेश का महासचिव बना दिया और इस तरह से प्रियंका ने सक्रिय राजनीति में एंट्री ली।
पॉलिटिकल स्टाइल और खासियत
बता दें कि प्रियंका की सबसे बड़ी ताकत उनका जमीनी जुड़ाव और सहजता है। वह जनता की समस्याओं को समझती हैं और इसका समाधान खोजने में सक्रिय भूमिका निभाती हैं। प्रियंका की विनम्रता और हंसमुख स्वभाव उनको अलग पहचान देता है। खासकर वह महिलाओं और युवाओं के मुद्दों पर खास ध्यान देती हैं। प्रियंका ने अपनी कार्यशैली से यह साबित किया है कि वह राजनीतिक परिवार की सिर्फ सदस्य नहीं बल्कि एक प्रभावशाली नेता भी हैं।
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