यूपी में कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी आज यानी की 12 जनवरी को अपना 54वां जन्मदिन मना रही हैं। प्रियंका गांधी के परिवार में तीन-तीन प्रधानमंत्री हुए। पंडित जवाहर लाल नेहरू, दादी इंदिरा गांधी और पिता राजीव गांधी ने देश की सत्ता संभाली। वहीं प्रियंका गांधी में लोग इंदिरा गांधी का अक्स देखते थे। लेकिन इसके बाद भी प्रियंका ने 52 साल की उम्र में पहला चुनाव लड़ा। इस चुनाव में प्रियंका ने इतिहास रह दिया। तो आइए जानते हैं प्रियंका गांधी के जन्मदिन के मौके पर उनके जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
जन्म और परिवार
दिल्ली में 12 जनवरी 1972 को प्रियंका गांधी का जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम राजीव गांधी था, जोकि पूर्व प्रधानमंत्री थे और मां सोनिया गांधी पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष थीं। प्रियंका गांधी ने बिजनेसमैन रॉबर्ट वाड्रा से शादी की है। बता दें कि जब प्रियंका 13 साल की थीं, तो वह पहली बार रॉबर्ट वाड्रा से मिली थीं।
इंदिरा गांधी के करीब रहीं
प्रियंका गांधी को अपनी दादी इंदिरा गांधी से काफी लगाव था। वहीं प्रियंका भी अपनी दादी इंदिरा की तरह दिखती हैं। वहीं इंदिरा गांधी भी प्रधानमंत्री की भूमिका से बाहर आकर अपने पोते राहुल और प्रियंका के साथ समय बिताने से नहीं चूकती थीं।
राजनीति से दूर
राजनीति की बात करें, तो शुरूआत में प्रियंका गांधी राजनीति से दूर रहीं। फिर साल 2004 के लोकसभा चुनाव में प्रियंका गांधी ने अपनी मां सोनिया गांधी के प्रचार का प्रबंधन संभाला था। लेकिन वह राजनीति में सक्रिय नहीं हुई थीं। फिर साल 2007 के विधानसभा चुनाव में प्रियंका गांधी ने कांग्रेस का प्रचार-प्रसार किया और अमेठी-रायबरेली तक की सीमित रहीं। फिर साल 2009 में प्रियंका ने इसी तरह से प्रचार-प्रसार किया।
लेकिन फिर भी प्रियंका गांधी कांग्रेस पार्टी से आधिकारिक रूप से नहीं जुड़ी थीं। वहीं साल 2012 में कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को स्टार प्रचारक के रूप में उतारा। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर प्रियंका गांधी ने स्टार प्रचारक के रूप में कांग्रेस का साथ दिया। इसके बाद साल 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवारों के लिए प्रियंका ने सीमित दायरे में रहकर प्रचार किया। इसके बाद अगले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने प्रियंका को पूर्वी उत्तर प्रदेश का महासचिव बना दिया और इस तरह से प्रियंका ने सक्रिय राजनीति में एंट्री ली।
पॉलिटिकल स्टाइल और खासियत
बता दें कि प्रियंका की सबसे बड़ी ताकत उनका जमीनी जुड़ाव और सहजता है। वह जनता की समस्याओं को समझती हैं और इसका समाधान खोजने में सक्रिय भूमिका निभाती हैं। प्रियंका की विनम्रता और हंसमुख स्वभाव उनको अलग पहचान देता है। खासकर वह महिलाओं और युवाओं के मुद्दों पर खास ध्यान देती हैं। प्रियंका ने अपनी कार्यशैली से यह साबित किया है कि वह राजनीतिक परिवार की सिर्फ सदस्य नहीं बल्कि एक प्रभावशाली नेता भी हैं।
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पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर के विवादास्पद बयानों के चलते कांग्रेस पार्टी एक बार फिर मुश्किल में फँसती नजर आ रही है। मणिशंकर अय्यर ने पाकिस्तान और हिंदुत्व को लेकर जो विवादित बातें कही हैं वह ऐसे समय पर बड़ा मुद्दा बन सकती हैं जब महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव के लिए मतदान करीब है और जल्द ही पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं। हम आपको बता दें कि मणिशंकर अय्यर ने कहा है कि हिंदू धर्म और हिंदुत्व को एक ही नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व एक राजनीतिक विचारधारा है जो भय और आशंका के भाव को प्रोत्साहित करती है जबकि हिंदू धर्म वर्षों से आत्मिक बल और सहिष्णुता का संदेश देता रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदुत्व बहुसंख्यक मूल्यों को छोटे समूहों के सामने खड़ा दिखाने की अतार्किक और विभाजनकारी सोच को जन्म देता है। उन्होंने साथ ही कहा कि अब भारत को ऑपरेशन सिंदूर समाप्त कर देना चाहिए और पाकिस्तान के साथ बातचीत के द्वार खोलने चाहिए जिससे तनाव को कम किया जा सके।
हम आपको यह भी याद दिला दें कि मणिशंकर अय्यर का यह पहला विवादित बयान नहीं है जिसने कांग्रेस को असहज स्थिति में डाला हो। इससे पहले भी वह कई बार ऐसे वक्तव्य दे चुके हैं जिन पर पार्टी को सार्वजनिक सफाई देनी पड़ी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दिया गया उनका नीच शब्द वाला बयान आज भी कांग्रेस के लिए एक राजनीतिक बोझ की तरह याद किया जाता है, जिसे भाजपा ने चुनावी हथियार बना लिया था। इसके अलावा पाकिस्तान के साथ बातचीत, कश्मीर नीति और राष्ट्रवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अय्यर के बयान अक्सर पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग दिखाई दिए हैं। हर बार कांग्रेस नेतृत्व को या तो उनसे दूरी बनानी पड़ी या उनके बयानों को व्यक्तिगत राय बताकर नुकसान सीमित करने की कोशिश करनी पड़ी। अय्यर की बेबाकी और तीखे शब्द कई बार वैचारिक बहस को जन्म देते हैं, लेकिन उतनी ही बार वह कांग्रेस के लिए रणनीतिक संकट भी खड़ा कर देते हैं। इस बार भी ऐसा ही हुआ और भाजपा ने पूरे कांग्रेस नेतृत्व पर जोरदार हमला बोल दिया है।
हम आपको बता दें कि मणिशंकर अय्यर की इन टिप्पणियों के जवाब में भाजपा ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस पाकिस्तान के एजेंडा को बढ़ावा देने का काम कर रही है। भाजपा ने कांग्रेस पार्टी पर तंज कसते हुए उसे इस्लामाबाद नेशनल कांग्रेस बता दिया और दावा किया कि कांग्रेस आतंकवाद के खिलाफ भारत की कठोर नीति को कमजोर कर रही है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने आरोप लगाया कि कांग्रेस हर बार पाकिस्तान के पक्ष में बयान देती रही है और यह पार्टी भारतीय सेना तथा सुरक्षा बलों का अपमान कर रही है। भाजपा ने यह भी कहा कि कांग्रेस का नरम रुख राष्ट्रीय सुरक्षा की भावना को चोट पहुंचाता है और देश के खिलाफ गलत सन्देश भेजता है।
बहरहाल, देखा जाये तो ऑपरेशन सिंदूर पर कांग्रेस नेता की सलाह ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस पाकिस्तान के साथ बातचीत का पक्ष ले रही है और इससे सुरक्षा बलों के मनोबल पर असर पड़ेगा। वहीं हिंदू धर्म और हिंदुत्व की जो परिभाषा मणिशंकर अय्यर ने बताई है वह भी कांग्रेस के लिए नया सिरदर्द बन सकती है।
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