पाकिस्तान में बैठे आतंकी सरगना एक बार फिर अपनी घिनौनी सोच और खतरनाक मंसूबों के साथ सामने आए हैं। हम आपको बता दें कि प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के मुखिया मसूद अजहर से जुड़ा एक बयान सामने आया है जिसमें वह यह दावा करता सुना गया है कि उसके पास हजारों आत्मघाती हमलावर तैयार हैं। यह बयान न केवल उकसावे से भरा है बल्कि यह भी दर्शाता है कि पाकिस्तान की धरती पर आतंकवाद आज भी खुली सांस ले रहा है और वहां की सत्ता व्यवस्था की मौन सहमति या संरक्षण उसे लगातार मिलता रहा है।
हम आपको बता दें कि मसूद अजहर से जुड़ा एक नया ऑडियो संदेश सामने आया है, जिसने क्षेत्रीय सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। इस ऑडियो में अजहर यह दावा करता सुनाई देता है कि उसके संगठन के पास हजारों आत्मघाती हमलावर तैयार हैं, जो किसी भी समय कार्रवाई के लिए भेजे जा सकते हैं। यह ऑडियो संदेश सोशल मीडिया और कट्टरपंथी नेटवर्क से जुड़े प्लेटफार्मों पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां अभी इसकी तकनीकी जांच कर रही हैं और आवाज तथा स्रोत की पुष्टि में जुटी हैं, लेकिन इसकी भाषा और तेवर बेहद उकसाने वाले माने जा रहे हैं। संदेश में आतंकियों को कथित शहादत के लिए तैयार रहने की बात कही गई है और यह जताने की कोशिश की गई है कि संगठन के पास मानव बमों की कोई कमी नहीं है।
हालांकि सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान अक्सर तब सामने आते हैं जब आतंकी संगठन दबाव में होते हैं। हम आपको बता दें कि हाल के समय में आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाइयों के चलते जैश ए मोहम्मद के ढांचे और नेटवर्क को गहरा नुकसान पहुंचा है। ऐसे में इस ऑडियो को डर फैलाने और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। वैसे यह पहली बार नहीं है जब मसूद अजहर या उसके संगठन की ओर से इस तरह के उकसावे भरे बयान सामने आए हों। यह बात भी काबिलेगौर है कि जैश ए मोहम्मद पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध है, फिर भी वह पाकिस्तान की जमीन पर अलग अलग रूपों में सक्रिय रहने में सफल रहा है।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। खुफिया तंत्र ऑडियो के प्रसार, इसके पीछे के नेटवर्क और इसके समय को लेकर विश्लेषण कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संभावित खतरे को हल्के में नहीं लिया जा सकता और सभी सुरक्षा उपायों को पहले से अधिक सतर्कता के साथ लागू किया जा रहा है। वहीं, रणनीतिक जानकारों के अनुसार, यह बयान उस बदलते माहौल का भी संकेत है जिसमें आतंकवादियों के लिए सुरक्षित ठिकाने तेजी से सिमटते जा रहे हैं। दरअसल, भारत द्वारा अपनाई गई सख्त आतंक विरोधी नीति के कारण आतंकी संगठनों में घबराहट साफ दिखाई दे रही है। इसी घबराहट का परिणाम ऐसे बयान हो सकते हैं, जिनका उद्देश्य वास्तविक ताकत दिखाने से अधिक डर और भ्रम पैदा करना होता है।
फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह ऑडियो कब रिकॉर्ड किया गया, किस माध्यम से जारी किया गया और इसका वास्तविक उद्देश्य क्या है। सुरक्षा तंत्र ने स्पष्ट किया है कि किसी भी तरह की आतंकी धमकी को गंभीरता से लिया जाएगा और स्थिति के अनुसार सख्त कदम उठाए जाएंगे। वैसे यह घटनाक्रम एक बार फिर इस सच्चाई को उजागर करता है कि क्षेत्र में आतंकवाद का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।
लेकिन आतंकवादियों और उनके आकाओं को यह पता होना चाहिए कि आज का भारत स्पष्ट कर चुका है कि आतंकवाद अब सहनीय नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश ने यह तय कर लिया है कि आतंकवाद के हर प्रयास को युद्ध की तरह देखा जाएगा। यह केवल शब्द नहीं बल्कि एक घोषित नीति है। ऑपरेशन सिंदूर इसी नीति का प्रतीक है जो यह बताता है कि भारत अब घर में घुसकर जवाब देने में संकोच नहीं करता।
पहले आतंकवादी हमले होते थे और भारत जांच और कूटनीति के रास्ते पर चलता था। अब समीकरण बदल चुका है। अब हमला होगा तो जवाब भी उसी भाषा में मिलेगा। यह संदेश केवल आतंकियों के लिए नहीं बल्कि उनके आकाओं के लिए भी है। पाकिस्तान को यह समझ लेना चाहिए कि वह अब आग से खेल रहा है और इस बार आग की लपटें उसकी सीमा में ही उठ सकती हैं। आतंकवादियों को पालने पोसने की नीति ने पाकिस्तान को पहले ही आर्थिक और सामाजिक रूप से खोखला कर दिया है। अब अगर उसने इस रास्ते से पीछे हटने की कोशिश नहीं की तो परिणाम और भी भयावह होंगे। पाकिस्तान को याद रखना चाहिए कि भारत साफ कर चुका है कि उसकी धरती पर होने वाली किसी भी आतंकी कार्रवाई को सीधे युद्ध का प्रयास माना जाएगा।
देखा जाये तो भारत की सैन्य और खुफिया क्षमताएं आज पहले से कहीं अधिक मजबूत हैं। तकनीक, खुफिया नेटवर्क और राजनीतिक इच्छाशक्ति तीनों एक दिशा में काम कर रहे हैं। यही कारण है कि आतंकी संगठन घबराए हुए हैं। उन्हें पता है कि अब बचने का रास्ता नहीं है। मसूद अजहर जैसे लोग इसलिए शब्दों का सहारा ले रहे हैं क्योंकि जमीनी हकीकत उनके खिलाफ जा चुकी है। पाकिस्तान को यह भी समझना होगा कि अंतरराष्ट्रीय माहौल भी बदल चुका है। अब आतंकवाद को किसी भी सूरत में वैध नहीं ठहराया जा सकता। जो देश आतंक को संरक्षण देंगे वह खुद अलग थलग पड़ेंगे।
बहरहाल, पाकिस्तान और उसके आतंकी आकाओं के लिए अब कोई ग्रे एरिया नहीं बचा है। भारत ने अपना रुख तय कर लिया है और यह रुख आक्रामक भी है, स्पष्ट भी है और अंतिम भी है। अब जो भी आतंक के जरिए भारत को ललकारने की कोशिश करेगा उसे ऐसा जवाब मिलेगा जिसे आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी।
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तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी के नेता के. अन्नामलाई ने सोमवार को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के प्रमुख राज ठाकरे द्वारा कथित तौर पर उन्हें "अपमानित" करने के प्रयासों पर पलटवार करते हुए कहा कि मुंबई पर उनकी पिछली टिप्पणियों की आलोचना करने वाले सिर्फ अज्ञानी थे। चेन्नई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अन्नामलाई ने कहा कि आदित्य ठाकरे और राज ठाकरे मुझे धमकाने वाले कौन होते हैं? मुझे किसान का बेटा होने पर गर्व है। उन्होंने सिर्फ मुझे अपमानित करने के लिए सभाएं आयोजित की हैं। मुझे नहीं पता कि मैं इतना महत्वपूर्ण हो गया हूं या नहीं।
इससे पहले, मुंबई में यूबीटी और एमएनएस की संयुक्त रैली में राज ठाकरे ने भाजपा नेता पर तीखा प्रहार किया था, जिन्हें उन्होंने व्यंग्यपूर्वक 'रसमलाई' कहा था और पूछा था कि क्या अन्नामलाई को मुंबई के मुद्दे पर बोलने का कोई अधिकार है, क्योंकि अन्नामलाई ने कथित तौर पर मुंबई को अंतर्राष्ट्रीय शहर बताया था। राज ठाकरे ने अपने चाचा बालासाहेब ठाकरे द्वारा स्थापित शिवसेना के 1960 और 70 के दशक के नारे का हवाला देते हुए कहा था कि एक रसमलाई तमिलनाडु से आए थे... तुम्हारा यहाँ क्या संबंध है? हटाओ लुंगी बजाओ पुंगी।
एमएनएस प्रमुख का यह बयान अन्नामलाई के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने पार्टी के लिए धारावी और सायन कोलीवाड़ा क्षेत्रों में प्रचार करते हुए कहा था कि “मुंबई महाराष्ट्र का शहर नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय शहर है।” अन्नामलाई ने कहा था, “मुंबई को त्रि-इंजन सरकार की जरूरत है। हमें मुंबई में भाजपा का महापौर चाहिए, राज्य में (महाराष्ट्र के) मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। मुंबई एक वैश्विक महानगर है जिसका बजट 40,000 करोड़ रुपये से अधिक है। बेंगलुरु का बजट 19,000 करोड़ रुपये है, जबकि चेन्नई का 8,000 करोड़ रुपये है। वित्त प्रबंधन के लिए प्रशासन में अच्छे लोगों की जरूरत है।”
अन्नामलाई ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें कई धमकियां मिली हैं, जिनमें से कुछ लोगों ने उनके पैर काटने की धमकी भी दी है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने लिखा है कि अगर मैं मुंबई आया तो वे मेरे पैर काट देंगे। मैं मुंबई आऊंगा - मेरे पैर काटने की कोशिश करो। अगर मैं ऐसी धमकियों से डरता तो अपने गांव में ही रहता। उन्होंने आगे कहा, "अगर मैं कहूँ कि कामराज भारत के महानतम नेताओं में से एक हैं, तो क्या इसका मतलब यह है कि वे अब तमिल नहीं रहे? अगर मैं कहूँ कि मुंबई विश्व स्तरीय शहर है, तो क्या इसका मतलब यह है कि इसे महाराष्ट्रियों ने नहीं बनाया? ये लोग सरासर अज्ञानी हैं।" इसी यूबीटी-एमएनएस रैली में राज ठाकरे ने मराठी एकता के लिए ज़ोरदार अपील करते हुए चेतावनी दी कि राज्य की भाषा, भूमि और पहचान खतरे में है।
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