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जरूरत की खबर- मेनोपॉज के बाद जल्दी आता बुढ़ापा:मसल्स–हड्डियां होतीं कमजोर, शुरू करें वेट ट्रेनिंग, डॉक्टर से जानें इसके फायदे

50 की उम्र तक आते–आते महिलाओं को लगता है कि शरीर पहले की तरह उनका साथ नहीं दे रहा। सीढ़ियां चढ़ते समय जल्दी थकान होना, वजन बढ़ना, ताकत कम होना और जोड़ों में दर्द जैसी समस्याएं कॉमन हो जाती हैं। दरअसल, मेनोपॉज के बाद शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का लेवल घटने लगता है। इससे मांसपेशियां और हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। साथ ही वजन बढ़ने, नींद खराब होने और मूड स्विंग्स जैसी परेशानियों का रिस्क भी बढ़ जाता है। साल 2024, में ‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ में पब्लिश एक स्टडी में पाया गया कि मेनोपॉज के बाद सिर्फ प्रोटीन लेना पर्याप्त नहीं है। मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखने के लिए वेट ट्रेनिंग जरूरी है। वहीं ‘साइंस डायरेक्ट’ में पब्लिश एक अन्य स्टडी के मुताबिक, रेजिस्टेंस ट्रेनिंग से हॉट फ्लैशेज की गंभीरता और उसकी फ्रीक्वेंसी कम होती है। साथ ही नींद और मूड भी बेहतर होते हैं। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में मेनोपॉज के बाद महिलाओं की सेहत में वेट ट्रेनिंग की भूमिका पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. मितुल गुप्ता, सीनियर कंसल्टेंट, आब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, कोकून हॉस्पिटल, जयपुर सवाल- मेनोपॉज क्या है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- मेनोपॉज के बाद महिलाओं के शरीर में क्या बदलाव आते हैं? जवाब- मेनोपॉज के बाद शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का लेवल कम होने लगता है। इससे कई तरह के शारीरिक बदलाव और कुछ समस्याएं हो सकती हैं, जैसेकि- ये बदलाव हर महिला में अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ महिलाओं में लक्षण हल्के होते हैं, जबकि कुछ में ज्यादा नजर आते हैं। सवाल- वेट ट्रेनिंग क्या होती है? जवाब- यह एक तरह की एक्सरसाइज है, जिसमें मसल्स को मजबूत बनाने के लिए वजन या किसी तरह के रेजिस्टेंस का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें डंबल, बारबेल, केटलबेल या रेजिस्टेंस बैंड जैसे उपकरणों का इस्तेमाल किया जा सकता है। सवाल- मेनोपॉज के बाद महिलाओं के लिए वेट ट्रेनिंग की जरूरत क्यों बढ़ जाती है? जवाब- मेनोपॉज के बाद शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का लेवल कम होने लगता है। इसकी वजह से- सवाल- वेट ट्रेनिंग करने से क्या होता है? जवाब- इसमें डंबल, मशीन, रेजिस्टेंस बैंड या शरीर के वजन का इस्तेमाल करके मसल्स को ट्रेन किया जाता है। इससे शरीर धीरे-धीरे मजबूत और ज्यादा एफिशिएंट बनता है। इससे- सवाल- मेनोपॉज के बाद मसल्स लॉस को रोकने में वेट ट्रेनिंग कैसे मदद करती है? जवाब- जब मसल्स पर वजन का प्रेशर पड़ता है, तो शरीर उन्हें मजबूत बनाने के लिए नए मसल टिश्यू तैयार करता है। इससे उम्र के साथ होने वाल मसल्स लॉस का रिस्क घटता है। सवाल- वेट ट्रेनिंग का वेट मैनेजमेंट से क्या कनेक्शन है? जवाब- मेनोपॉज के बाद मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है। इससे बॉडी फैट खासकर पेट के आसपास जमा होने लगता है। वेट ट्रेनिंग इस बदलाव को मैनेज करने में मदद करती है। इससे वेट कंट्रोल करने में भी मदद मिलती है। सवाल- क्या वेट ट्रेनिंग डायबिटीज और हार्ट डिजीज के रिस्क को कम करती है? जवाब- हां, रेगुलर वेट ट्रेनिंग डायबिटीज और हार्ट डिजीज का रिस्क कम करती है। सवाल- क्या वेट ट्रेनिंग का असर मेंटल हेल्थ पर भी पड़ता है? जवाब- हां, साल 2018 में ‘जामा साइकिएट्री’ में 33 क्लिनिकल ट्रायल्स का एक मेटा-एनालिसिस पब्लिश हुआ। इसमें पाया गया कि रेगुरल वेट ट्रेनिंग डिप्रेशन के लक्षणों को कम करने में मदद करती है। सवाल- वेट ट्रेनिंग की शुरुआत कैसे करें? जवाब- इसके लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें- सवाल- मेनोपॉज के बाद महिलाओं के लिए कौन-सी वेट ट्रेनिंग एक्सरसाइज ज्यादा फायदेमंद होती है? जवाब- मसल्स और हड्डियों के लिए जरूरी सभी वेट ट्रेनिंग एक्सरसाइज की लिस्ट ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या घर पर भी वेट ट्रेनिंग की जा सकती है? जवाब- हां, इसके लिए जिम जाना जरूरी नहीं है। आप अपनी क्षमता के अनुसार घर पर इन चीजों का इस्तेमाल कर सकती हैं- सवाल- महिलाओं को हफ्ते में कितनी बार और कितनी देर वेट ट्रेनिंग करनी चाहिए? जवाब- डॉ. मितुल गुप्ता के मुताबिक, मेनोपॉज के बाद महिलाओं के लिए हफ्ते में 2-3 बार वेट ट्रेनिंग करना पर्याप्त है। हर सेशन 30-60 मिनट का रखा जा सकता है। सवाल- वेट ट्रेनिंग के साथ डाइट में क्या बदलाव जरूरी हैं? जवाब- मसल्स रिपेयर और मजबूती के लिए वेट ट्रेनिंग के साथ सही पोषण भी जरूरी है। इसलिए मेनोपॉज के बाद महिलाओं को संतुलित डाइट लेनी चाहिए। इसे ग्राफिक में देखिए- सवाल- किन महिलाओं को वेट ट्रेनिंग करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए? जवाब- वेट ट्रेनिंग ज्यादातर महिलाओं के लिए सेफ है, लेकिन कुछ स्थितियों में ज्यादा सावधानी की जरूरत होती है। ग्राफिक में सभी कंडीशंस देखिए- ऐसे मामलों में एक्सरसाइज शुरू करने से पहले डॉक्टर या प्रशिक्षित फिटनेस एक्सपर्ट की सलाह लेना बेहतर होता है। सवाल- कौन-से संकेत दिखने पर वेट ट्रेनिंग तुरंत रोक देनी चाहिए और डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए? जवाब- वेट ट्रेनिंग के दौरान हल्की थकान या मसल्स में खिंचाव सामान्य है। लेकिन कुछ लक्षण गंभीर समस्या का संकेत हो सकते हैं। इसे ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या 50 या 60 साल की उम्र में भी पहली बार वेट ट्रेनिंग शुरू की जा सकती है? जवाब- हां, मांसपेशियां और हड्डियां किसी भी उम्र में एक्सरसाइज के प्रति पॉजिटिव रिस्पॉन्स देती हैं। शुरुआत हमेशा हल्के वजन, रेजिस्टेंस बैंड या बॉडी-वेट एक्सरसाइज से करनी चाहिए। ………………….. ग्राफिक- महेंद्र वर्मा ………………….. ये खबर भी पढ़ें…. जरूरत की खबर- सेहत का हाल बताती है आपकी चाल:डॉक्टर से समझें वॉकिंग स्पीड का साइंस, रोज वॉक करने के 6 जादुई फायदे चलने की स्पीड सिर्फ एक आदत नहीं है। ये हमारी सेहत का आईना भी है। हम अक्सर इस पर ध्यान नहीं देते, लेकिन डॉक्टर इसे ‘हेल्थ सिग्नल’ के रूप में देखते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चलने की गति हमारे दिल, दिमाग, फेफड़ों, मांसपेशियों और उम्र बढ़ने की रफ्तार तक के बारे में संकेत देती है। पूरी खबर पढ़ें…

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मेंटल हेल्थ- छोटी बातों पर गुस्सा आने लगा है:गुस्से में चीजें पटक देता हूं, पत्नी-बच्चे मुझसे डरने लगे हैं, खुद को कैसे ठीक करूं

सवाल- मैं 38 साल का हूं और एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूं। पहले मैं खुद को काफी शांत स्वभाव का मानता था, लेकिन पिछले एक साल से मुझे छोटी-छोटी बातों पर बहुत गुस्सा आने लगा है। ऑफिस में किसी से मामूली गलती हो जाए तो मैं भड़क जाता हूं। घर पर भी पत्नी, बच्चों पर टेंपर लूज कर देता हूं। जरा सी बात पर मेरी आवाज ऊंची हो जाती है। कई बार गुस्से में चीजें भी पटक देता हूं या कमरे से बाहर चला जाता हूं। गुस्सा शांत होने पर पछतावा भी होता है। पत्नी कहती हैं कि अब घर में सब लोग मेरा मूड देखकर बात करते हैं। समझ नहीं आता कि मैं इतना गुस्सैल कब और कैसे हो गया। क्या इसके पीछे कोई मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम हो सकती है? मैं अपने गुस्से को कैसे नियंत्रित करूं? एक्सपर्ट- डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर। ज्यादा गुस्सा आना और चिड़चिड़ापन बढ़ना, सिर्फ स्वभाव हुआ बदलाव नहीं है। गुस्से के पीछे कई शारीरिक और मानसिक कारण हो सकते हैं। जैसेकि स्वास्थ्य से लेकर जीवन की स्थितियों में कोई बड़ा बदलाव हो सकता है। इसलिए यहां समस्या के मूल कारण को समझने और उसे ठीक करने की जरूरत है। गुस्सा बढ़ने के संभावित कारण गुस्सा अपने आप में कोई मानसिक बीमारी नहीं है। यह एक सामान्य भावना है। यह समस्या तब बनती है, जब गुस्सा बार-बार आए, बहुत तेज हो, उस पर नियंत्रण न रहे या उसका असर काम और रिश्तों पर पड़ने लगे। क्या गुस्से की वजह डिप्रेशन है? डिप्रेशन का मतलब हमेशा उदास रहना या रोते रहना नहीं होता। कुछ पुरुषों में यह चिड़चिड़ेपन और गुस्से के रूप में भी दिखाई दे सकता है। इसके साथ कुछ और बदलाव भी नजर आ सकते हैं, जैसेकि– क्या गुस्से की वजह ऑफिस स्ट्रेस है? अगर पिछले एक साल में काम से जुड़ी परिस्थितियां बदली हैं तो उस पर भी ध्यान दें। खुद से पूछें कि क्या ऐसा कुछ आपके साथ हो रहा है– जब पूरा परिवार आपका मूड देखकर बात करे पत्नी का यह कहना एक महत्वपूर्ण संकेत है कि घर में सब लोग आपका मूड देखकर बात करते हैं। इसका मतलब है कि परिवार आपके गुस्से को लेकर सतर्क रहने लगा है। हालांकि इसका असर बच्चों पर भी पड़ सकता है। वे- क्या ये गुस्सा सहना परिवार की जिम्मेदारी जैसाकि आपने सवाल में लिखा है कि आप गुस्से में चीजें पटक देते हैं। यह एक गंभीर बात है। भले ही आपने किसी व्यक्ति को चोट न पहुंचाई हो, लेकिन ऐसा व्यवहार सामने वाले को डरा सकता है। इसलिए अपने गुस्से के कारण को समझना और उसे ठीक करना आपकी जिम्मेदारी है। परिवार से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वे आपके गुस्से को संभालें या आपको शांत करें। यह आपकी जिम्मेदारी है। आपको गुस्सा क्यों आ रहा है करें सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट मैं यहां आपको तीन सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट दे रहा हूं। पिछले दो हफ्तों को ध्यान में रखकर आपको इन तीनों टेस्ट के सवालों का जवाब देना है। पहले दो ग्राफिक्स के सवाल डिप्रेशन और वर्क स्ट्रेस से जुड़े हुए हैं। ये टेस्ट आपको ये समझने में मदद करेगा कि गुस्सा बढ़ने का कारण क्या है। तीसरे ग्राफिक के सवाल आपको ये समझने में मदद करेंगे कि क्या आपका गुस्सा एक खतरनाक लेवल पर पहुंच रहा है। तीनों ग्राफिक्स के सवालों को ध्यान से पढ़ें और 0 से 3 के स्केल पर रेट करें। स्कोर की एनालिसिस भी ग्राफिक के बाद दी गई है। ऊपर के टेस्ट में अगर आपका स्कोर 10 या उससे ज्यादा है तो आपको एक बार मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से मिलना चाहिए। अगर वीकेंड में, छुट्‌टी के दिन या काम से दूर रहने पर लक्षण कम हो जाते हैं तो आपका गुस्सा वर्क स्ट्रेस या वर्क बर्नआउट का संकेत हो सकता है। अगर इस ग्राफिक के किसी भी सवाल का आपका जवाब 'हां' है तो आपका गुस्सा खतरे के निशान से ऊपर है। यह नुकसानदायक हो सकता है। आपको तुरंत एक सेफ्टी प्लान की जरूरत है। गुस्से को कंट्रोल कैसे करें चार हफ्तों का एंगर मैनेजमेंट प्लान यहां मैं आपको चार हफ्तों का एक सेल्फ हेल्प प्लान दे रहा हूं। चार हफ्ते तक इसे फॉलो करें। पहला हफ्ता गुस्से का पैटर्न समझें सबसे पहले आपको अपने गुस्से के कारण और पैटर्न को समझने की कोशिश करनी चाहिए। इसके लिए एक बार किसी क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट या मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से अपना पूरा इवैल्यूएशन करवाएं। साथ ही अपने लिए कुछ स्पष्ट नियम बनाएं– उस समय सामने वाले से कहें– "अभी मैं बहुत गुस्से में हूं। इस समय ठीक से बात नहीं कर पाऊंगा। मैं थोड़ा शांत होकर 30 मिनट बाद बात करूंगा।" इसके बाद कमरे में अकेले शांत होने की कोशिश करें और ये काम न करें– एक एंगर डायरी बनाएं। गुस्से की घटनाएं लिखें। इसे ABC तरीके से समझ सकते हैं: A यानी घटना: सहकर्मी ने रिपोर्ट समय पर नहीं दी। B यानी उस समय आपके दिमाग में आया विचार: "कोई मेरी बात को गंभीरता से नहीं लेता। मुझे ही सब ठीक करना पड़ता है।" C यानी नतीजा: गुस्सा 8/10, आवाज ऊंची करना, बाद में पछतावा और सहकर्मियों का आपसे बचना। साथ ही डायरी में यह भी लिखें– दूसरा हफ्ता गुस्सा बढ़ने से पहले शरीर के संकेत पहचानें गुस्सा अचानक बहुत तेज नहीं होता। उससे पहले शरीर कुछ संकेत देता है, जैसेकि– इन संकेतों को पहचानते ही– इसके साथ रोजमर्रा की कुछ आदतों पर भी ध्यान दें: तीसरा हफ्ता गुस्से वाले विचारों को चुनौती दें गुस्से का संबंध सिर्फ घटना से नहीं होता। इससे भी होता है कि घटना को हम कैसे देखते–समझते हैं। उदाहरण के लिए– "ये लोग हमेशा गलती करते हैं।" इसे बदलकर सोचें, "गलती हुई है। मैं इसे बिना किसी पर चिल्लाए भी ठीक कर सकता हूं।" "मेरे परिवार को खुद समझना चाहिए कि मुझे अभी शांति चाहिए।" इसे बदलकर सोचें, "वे मेरे मन की बात नहीं समझ सकते। मुझे अपनी जरूरत साफ तरीके से बतानी होगी।" चौथा हफ्ता रिश्तों को सुधारें, आगे की तैयारी करें गुस्से में किसी से गलत व्यवहार कर दिया तो सिर्फ ‘सॉरी’ कहकर बात खत्म न करें। अपनी गलती को साफ शब्दों में स्वीकार करें। यह न कहें, "मुझे गुस्सा इसलिए आया क्योंकि तुमने मुझे परेशान किया।" इसके बजाय कहें, "मुझे चिल्लाना नहीं चाहिए था। मैंने गलत व्यवहार किया।" पत्नी से शांति से बात करें। बच्चों के साथ अलग से शांत समय बिताएं। उन्हें भरोसा दें कि आपके गुस्से के लिए वो जिम्मेदार नहीं हैं। इस दौरान अपनी डायरी देखकर समझें कि गुस्सा कितनी बार आया और क्या उसकी तीव्रता में कोई बदलाव हुआ। साथ ही आगे की योजना में ये बातें शामिल करें: इसके अलावा अपनी सेहत का ध्यान रखें और नीचे ग्राफिक में दी गई सभी बातें फॉलो करें– प्रोफेशनल हेल्प कब जरूरी? नीचे ग्राफिक में दिए संकेत दिखाई दें तो मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट की मदद लें– अंतिम बात सबसे अच्छी बात यह है कि आपको अपने व्यवहार में बदलाव महसूस हो रहा है और गुस्सा शांत होने के बाद आपको पछतावा भी होता है। इसका मतलब है कि आप समस्या को पहचान रहे हैं। अब अगला कदम जिम्मेदारी लेना और सही मदद लेना है। आपका लक्ष्य गुस्से को दबाना नहीं, बल्कि उसे समझना और सॉल्व करना है। *************** ग्राफिक्स- विपुल शर्मा …………………….. मेंटल हेल्थ- बॉयफ्रेंड ने बिना कारण बताए ब्रेकअप कर लिया: तब से डिप्रेशन में हूं, उसे भूल नहीं पा रही, जिंदगी में आगे कैसे बढूं तीन साल का रिश्ता खत्म होने पर दुख होना स्वाभाविक है। यह किसी बेहद अपने को खोने जैसा अनुभव हो सकता है। इसके बाद मन में खालीपन, उदासी और बहुत सारे सवाल भी आ सकते हैं। पूरी खबर पढ़िए…

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