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जरूरत की खबर- सर्दियों में फटती हैं एड़ियां:डर्मेटोलॉजिस्ट से जानें कैसे करें ठीक, क्रैक्ड हील्स को मुलायम बनाने के 9 स्टेप्स

सर्दियों के मौसम में कुछ लोगों की एड़ियों में क्रैक्स आ जाते हैं। यह एक आम समस्या है, लेकिन अक्सर लोग इसे नजरअंदाज करते हैं। दरअसल ठंडी हवा, वातावरण में नमी की कमी, गरम पानी से नहाना और स्किन की सही केयर न करना, एड़ियों को रूखा और सख्त बना देता है। शुरुआत में यह परेशानी सिर्फ हल्की ड्राईनेस जैसी लगती है। लेकिन समय रहते ध्यान न दिया जाए तो एड़ियों में गहरे क्रैक्स, दर्द, जलन और यहां तक कि खून निकलने तक की स्थिति बन सकती है। यह समस्या बुजुर्गों, डायबिटिक लोगों और लंबे समय तक खड़े रहने वालों में ज्यादा देखने को मिलती है। हालांकि सही जानकारी और रेगुलर केयर से इस परेशानी से बचा जा सकता है। तो चलिए, आज जरूरत की खबर में हम क्रैक्ड हील्स यानी फटी एड़ियों के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. संदीप अरोड़ा, सीनियर कंसल्टेंट, डर्मेटोलॉजी, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- सर्दियों में एड़ियां क्यों फटती हैं? जवाब- सर्दियों में हवा में नमी कम हो जाती है। इससे स्किन का नेचुरल मॉइश्चर तेजी से खत्म होने लगता है। एड़ियों की स्किन पहले से ही मोटी होती है। जब ड्राईनेस बढ़ती है तो वह सख्त होकर फैलने लगती है और दबाव पड़ते ही उसमें क्रैक्स आ जाते हैं। नीचे दिए ग्राफिक से इसके मुख्य कारणों को समझिए- सवाल- क्या सिर्फ सर्दियों में ही एड़ियां फटती हैं या यह समस्या कभी भी हो सकती है? जवाब- डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. संदीप अरोड़ा बताते हैं कि यह समस्या किसी भी मौसम में हो सकती है। लेकिन सर्दियों में हवा ज्यादा ड्राई होने और वातावरण में नमी कम होने के कारण इसका रिस्क थोड़ा बढ़ जाता है। सवाल- एड़ियां फटने के साथ-साथ और क्या लक्षण दिखाई दे सकते हैं? जवाब- शुरुआत में स्किन में केवल ड्राईनेस और हल्के क्रैक्स दिखाई देते हैं। लेकिन समय पर ध्यान न दिया जाए तो इसमें दर्द, खून निकलने और संक्रमण तक की समस्या हो सकती है। डायबिटिक लोगों को इसमें खास सावधानी बरतने की जरूरत होती है, क्योंकि कई बार यह समस्या गंभीर घाव का रूप ले सकती है। नीचे दिए गए ग्राफिक से इसके अन्य लक्षणों को समझिए- सवाल- क्या एड़ियां फटना किन्हीं स्वास्थ्य समस्याओें का संकेत भी हो सकता है? जवाब- डॉ. संदीप अरोड़ा बताते हैं कि क्रैक्ड हील्स कई बार किसी अंदरूनी स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकती हैं। डायबिटीज या थायरॉइड होने या शरीर में विटामिन A, C या B7 (बायोटिन) की कमी होने पर एड़ियां फटने लगती हैं। साथ ही एक्जिमा और सोरायसिस जैसी स्किन डिजीज में भी क्रैक्ड हील्स दिख सकती हैं। सवाल- किन लोगों को एड़ियां फटने का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- कुछ लोगों में इसका रिस्क ज्यादा होता है। जैसेकि- इसके अलावा बुजुर्ग, डायबिटीज और थायरॉइड के मरीज और ओवरवेट लोगों में भी यह समस्या ज्यादा देखी जाती है। सवाल- एड़ियां फटने पर कौन से घरेलू उपाय मददगार हो सकते हैं? जवाब- इसमें कई घरेलू उपाय मददगार हो सकते हैं। केला, नारियल/जैतून का तेल, शिया बटर और ओटमील जैसी नेचुरल चीजें स्किन को मॉइश्चराइज और हाइड्रेटेड रखती हैं। नींबू और वैसलीन का मिश्रण, शहद और विनेगर का स्क्रब डेड स्किन हटाने में मदद करता है। इन उपायों के साथ रेगुलर एक्सफोलिएट और मॉइश्चराइज करना एड़ियों को फटने से बचाने का सबसे बेहतर तरीका है। नीचे दिए ग्राफिक से कुछ घरेलू उपाय समझिए- सवाल- क्या नारियल तेल क्रैक्ड हील्स के लिए अच्छा है? जवाब- हां, इसमें मॉइश्चराइजिंग और एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं। यह स्किन में नमी बनाए रखता है और संक्रमण के खतरे को कम करता है। सर्दियों में नहाने के बाद रोज एड़ियों में नारियल तेल लगाएं। सवाल- एड़ियों को फटने से बचाने के क्या उपाय हैं? जवाब- इसके लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें। जैसेकि- सवाल- क्रैक्ड हील्स को नजरअंदाज करने से क्या हो सकता है? जवाब- इससे चलने/खड़े होने में तेज दर्द और खून निकलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यह एक तरह का खुला घाव है, जो सेलुलाइटिस जैसे खतरनाक संक्रमण का कारण बन सकता है। डायबिटिक लोगों में फुट अल्सर तक का रिस्क हो सकता है। सवाल- क्या क्रैक्ड हील्स को स्थायी रूप से ठीक किया जा सकता है? जवाब- हां, लेकिन इसके लिए कारणों को पहचानकर उन्हें ठीक करना और रेगुलर केयर करना बहुत जरूरी है। सवाल- किन स्थितियों में डॉक्टर को दिखाना जरूरी है? जवाब- अगर दर्द लगातार बढ़ रहा हो, क्रैक्स से खून निकल रहा हो, सूजन हो और घरेलू उपायों के बाद भी सुधार न हो तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए। इसके अलावा डायबिटीज, हाइपोथायरायडिज्म या गंभीर स्किन डिजीज वाले लोग हल्की क्रैक्ड हील्स को भी नजरअंदाज न करें। ...................... जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- सर्दियों में ज्यादा खर्राटे क्यों आते हैं: हो सकते हैं ये कारण, डॉक्टर से जानें बचाव के लिए 7 जरूरी सावधानियां अमेरिकन एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन (AASM) के मुताबिक, पूरी दुनिया में लगभग 24% महिलाएं और 40% पुरूष खर्राटे लेते हैं। पूरी खबर पढ़िए...

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फिजिकल हेल्थ- फास्टफूड खाने से लड़की की मौत:जंक फूड से ब्रेन, लिवर होता डैमेज, फाइबर वाले फल-सब्जी खाएं, हेल्दी रहें

यूपी के अमरोहा में 11वीं की छात्रा की ज्यादा फास्टफूड खाने से मौत हो गई। दिल्ली AIIMS में उसका इलाज चल रहा था। डॉक्टर ने बताया कि ज्यादा फास्टफूड खाने से लड़की की आंतें आपस में चिपक गई थीं। पाचन तंत्र पूरी तरह से डैमेज हो गया था। फूड यानी भोजन क्या है? यह एक तरह का ईंधन है। हमारा शरीर एक उन्नत मशीन की तरह है। इसे भी इंजन की तरह अच्छे से काम करने के लिए ईंधन चाहिए। अब फर्ज करिए कि कोई कार के इंजन में पानी मिला पेट्रोल-डीजल डाले तो क्या होगा? इंजन खराब होता जाएगा और एक दिन काम करना बंद कर देगा। इसी तरह फास्टफूड शरीर के लिए मिलावटी ईंधन है। यह धीरे-धीरे शरीर को डैमेज कर रहा है। अगर लगातार फास्टफूड खाते रहे तो एक दिन शरीर भी काम करना बंद कर देगा। आज फिजिकल हेल्थ कॉलम में समझेंगे कि फास्ट फूड खाने से शरीर में क्या होता है। साथ ही जानेंगे कि- फास्ट फूड में होता क्या है? ज्यादातर फास्टफूड मैदे से बने होते हैं। इसमें ढेर सारा नमक, ऐडेड शुगर और पाम ऑयल होता है। ये चीजें खाने में स्वादिष्ट लगती हैं, लेकिन इनमें न के बराबर न्यूट्रिशन होता है। फास्टफूड खाने से शरीर पर क्या असर होता है? फास्टफूड में रिफाइंड कार्ब, खूब सारा ऐडेड शुगर, नमक और खराब फैट होते हैं। जबकि फाइबर, विटामिन और मिनरल्स न के बराबर होते हैं। इसलिए यह खाना छोटी आंत में जल्दी पच जाता है और तुरंत दिमाग को खुशी वाला सिग्नल देता है। इससे हमें अच्छा महसूस होता है, लेकिन ब्लड शुगर तेजी से बढ़ जाता है। इसे कंट्रोल करने के लिए पैंक्रियाज ज्यादा इंसुलिन रिलीज करता है। वहीं बड़ी आंत के हेल्दी बैक्टीरिया फाइबर के इंतजार में भूखे रह जाते हैं। इससे पाचन खराब होता है, वजन बढ़ता है और डायबिटीज, फैटी लिवर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ये किस ऑर्गन पर कैसे असर करता है? फास्टफूड खाने से किस अंग पर क्या असर होता है, एक-एक करके विस्तार से जानते हैं- ब्रेन पर क्या असर होता है? जब हम फास्टफूड खाते हैं, तो हमें खुशी का एहसास होता है। ज्यादा शुगर, नमक और फैट मिलते ही दिमाग में डोपामिन तेजी से रिलीज होता है। ब्रेन को लगता है कि उसे कोई इनाम मिल गया है। यही वजह है कि बार-बार वही खाना खाने का मन करता है। लेकिन यह खुशी थोड़ी देर की होती है। इसोफेगस पर क्या असर होता है? फास्टफूड इसोफेगस यानी फूड पाइप को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है। पैंक्रियाज पर क्या असर होता है? फास्टफूड खाते ही पैंक्रियाज पर सबसे ज्यादा काम का दबाव पड़ता है। लिवर पर क्या असर होता है? लिवर हमारे शरीर का फिल्टर है। फास्टफूड लिवर के काम को सबसे ज्यादा बिगाड़ता है। छोटी आंत पर क्या असर होता है? छोटी आंत का काम है खाने से पोषण निकालना, पूरे शरीर को जरूरत के हिसाब से बांटना। बड़ी आंत पर क्या असर होता है? बड़ी आंत में हमारे शरीर के गुड बैक्टीरिया रहते हैं। उनका खाना फाइबर है, फास्टफूड में फाइबर नहीं होता है तो वे भूखे रह जाते हैं। किडनी पर क्या असर होता है? किडनी का काम है, खून को साफ करना। फास्टफूड इसमें रुकावट डालता है। खूब सब्जियां खाने से क्या होता है? खूब सब्जियां खाने से शरीर को फाइबर, विटामिन्स और मिनरल्स मिलते हैं। पाचन सुधरता है। इम्यूनिटी मजबूत होती है। वजन कंट्रोल में रहता है। डायबिटीज, हार्ट डिजीज और पेट की बीमारियों का खतरा घटता है। ब्रेन ब्रेन को पालक और ब्रॉकली पसंद हैं। इनमें फोलेट, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। ये दिमाग को धीरे-धीरे एनर्जी देते हैं। शुगर स्पाइक नहीं होता। न्यूरॉन्स सुरक्षित रहते हैं। याददाश्त और फोकस बेहतर रहता है। ब्रेन शांत होकर काम करता है। इसोफेगस इसोफेगस के लिए लौकी और तोरई अच्छी हैं। इनमें पानी और फाइबर ज्यादा होता है। ये पेट के एसिड को माइल्ड करते हैं। जलन कम होती है। सूजन घटती है। फूड पाइप सुरक्षित रहता है। पैंक्रियाज पैंक्रियाज को करेला और गाजर सूट करते हैं। इनमें फाइबर और फाइटोन्यूट्रिएंट्स होते हैं। शुगर धीरे खून में जाती है। इंसुलिन अचानक ज्यादा नहीं बनती। पैंक्रियाज को आराम मिलता है। लिवर लिवर के लिए चुकंदर और पालक जरूरी हैं। इनमें एंटीऑक्सीडेंट और नाइट्रेट होते हैं। ये लिवर की कोशिकाओं को बचाते हैं। फैट कम जमा होता है। डिटॉक्स एंजाइम अच्छे से काम करते हैं। छोटी आंत छोटी आंत को गाजर और बीन्स पसंद हैं। इनमें घुलनशील फाइबर होता है। पाचन धीमा रहता है। पोषक तत्व अच्छे से吸शोषित होते हैं। आंत की परत मजबूत बनी रहती है। बड़ी आंत बड़ी आंत के लिए भिंडी और पत्तागोभी फायदेमंद हैं। इनमें प्रीबायोटिक फाइबर होता है। अच्छे बैक्टीरिया बढ़ते हैं। सूजन कम होती है। गट हेल्थ बेहतर रहती है। किडनी किडनी को लौकी और खीरा पसंद हैं। इनमें पानी और पोटेशियम संतुलित होता है। सोडियम का असर कम पड़ता है। ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। किडनी आराम से फिल्टर करती है। ……………… ये खबर भी पढ़िए फिजिकल हेल्थ- आंखें बतातीं सेहत का हाल: डॉक्टर से जानें आंखों में सूजन, पीलापन या उभार किस बीमारी का संकेत, 11 आई केयर टिप्स आंखों का रंग बदलना, धुंधलापन, उनका बार-बार फड़कना या मैल बढ़ना। ये सभी संकेत बता सकते हैं कि शरीर में कहां पर क्या समस्या चल रही है। कई बार ये लक्षण डायबिटीज, थायरॉइड, लिवर या नर्वस सिस्टम से जुड़ी बीमारियों का शुरुआती संकेत होते हैं। आगे पढ़िए...

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शुभमन गिल के राजकोट में खेलने पर सवाल, कप्तान ने कराया पीठ का पूरा चेकअप, वडोदरा में बल्लेबाजी के दौरान उभरा था दर्द

shubhman gill doubtful for 2nd odi सूत्रों के अनुसार शुभमन गिल प्रसेंटेशन होने के बाद सीधे फीजियो के साथ स्कैन कराने के लिए क्योंकि उनको नॉर्मल चलने में कोई दिक्कत नहीं है पर वो जब ज्यादा देर तक बल्लेबाजी के लिए झुक रहे है तो उनको अकड़न सी महसूस हो रही है Mon, 12 Jan 2026 14:12:55 +0530

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