PM Narendra Modi ने वैश्विक Semiconductor हब बनाने के लिए 13.5 अरब डॉलर के प्लान पर जोर दिया
नई दिल्ली में गुरुवार को आयोजित एक बड़े कार्यक्रम में भारत की सेमीकंडक्टर तैयारी की तस्वीर सामने आई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यशोभूमि में सेमीकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारत दुनिया की सेमीकंडक्टर कंपनियों के लिए भरोसेमंद और पसंदीदा जगह बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया नई और भरोसेमंद विनिर्माण जगहों की तलाश में है और भारत इस मौके के लिए खुद को तैयार कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में सेमीकंडक्टर का पूरा सिस्टम तेजी से बढ़ रहा है। इससे नई तकनीक, निवेश और रोजगार के अवसर खुल रहे हैं। उन्होंने खास तौर पर एआई की बढ़ती मांग का जिक्र किया। उनके मुताबिक, एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ अब केवल चिप को छोटा बनाने पर ध्यान देना काफी नहीं है। चिप के साथ मेमोरी की बेहतर व्यवस्था, डेटा की तेज आवाजाही और गर्मी को नियंत्रित करने जैसी चीजें भी उतनी ही जरूरी हो गई हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि एक तरफ भारत की अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है और दूसरी तरफ दुनिया का भरोसा भी बढ़ रहा है। उन्होंने हाल की तिमाही में 7.8 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि का जिक्र करते हुए कहा कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल के बावजूद देश ने मजबूत प्रदर्शन किया है। उन्होंने जापान की एक साख निर्धारण संस्था द्वारा भारत की संप्रभु साख बढ़ाए जाने का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने इसे भारत के प्रति बढ़ते अंतरराष्ट्रीय भरोसे से जोड़कर देखा है।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र को लेकर सरकार की अगली बड़ी योजना सेमीकॉन 2.0 है। नरेंद्र मोदी ने बताया कि सेमीकंडक्टर मिशन के दूसरे चरण के लिए 13.5 अरब डॉलर का प्रावधान किया गया है, जबकि पहले चरण का आकार करीब 8 अरब डॉलर था। अब तक चिप निर्माण से जुड़ी 12 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है और अगले चरण में इनकी संख्या बढ़ाने पर जोर रहेगा।
गौरतलब है कि भारत की सेमीकंडक्टर योजना अब केवल कागजों और घोषणाओं तक सीमित नहीं है। सरकार के अनुसार 12 परियोजनाओं में से तीन इकाइयों में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है। इससे देश में चिप निर्माण की दिशा में काम को जमीन पर आगे बढ़ाने का संकेत मिला है।
प्रधानमंत्री ने शोध और नई तकनीक के क्षेत्र में युवाओं की भूमिका को भी अहम बताया। उन्होंने भारत में शोध कर रहे युवाओं से आगे आने की अपील की। विदेशों में ऐडवांस तकनीक पर काम कर रहे भारतीय युवाओं से भी देश के विकास में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने उद्योग जगत से शोध और विकास को आगे बढ़ाने की अपील करते हुए कहा कि इससे कंपनियों के साथ देश के युवा प्रतिभाओं को भी फायदा मिलेगा।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत लंबे समय से सेमीकंडक्टर उद्योग खड़ा करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन अब इस दिशा में ठोस आधार तैयार हो चुका है। उन्होंने बताया कि सेमीकॉन 2.0 के तहत चिप डिजाइन, मशीन और सामग्री, मेमोरी, सिलिकॉन तथा अन्य चिप निर्माण इकाइयों और शोध एवं विकास जैसे क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य भारत में चिप डिजाइन करने वाली कम से कम 200 नई कंपनियों और नए उद्यमों को समर्थन देना है।
इस बीच, प्रधानमंत्री ने हाल में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली में हुए सम्मेलन में सभी सदस्य देशों की सहमति से नई दिल्ली घोषणा को अपनाया गया, जिसे उन्होंने भारत के प्रति बढ़ते वैश्विक भरोसे का एक और संकेत बताया है।
बता दें कि सेमीकॉन इंडिया 2026 का आयोजन 17 से 19 सितंबर तक यशोभूमि में हो रहा है। इस बार 600 से अधिक प्रदर्शक और करीब 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां हिस्सा ले रही हैं। 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी है। जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, नीदरलैंड, सिंगापुर और स्वीडन के छह देश पवेलियन के साथ 12 राज्यों के पवेलियन भी लगाए गए हैं। स्टार्टअप और नई तकनीक से जुड़े अलग मंच भी कार्यक्रम का हिस्सा हैं। तीन दिन का यह आयोजन भारत में चिप से लेकर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों तक पूरा सिस्टम खड़ा करने की कोशिश को सामने रख रहा है।
NCLAT का बड़ा फैसला: Shubh Kamna बिल्डटेक मामले में नोएडा प्राधिकरण की अपील खारिज
राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने रियल एस्टेट कंपनी शुभकामना बिल्डटेक की दिवाला प्रक्रिया में सुरक्षित कर्जदाता का दर्जा देने के आग्रह वाली नोएडा और ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरणों की अपील खारिज कर दी है। दो सदस्यीय पीठ ने कहा कि दिवाला और ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) में 2026 में किया गया संशोधन कानून के आधार पर बने शुल्क को सुरक्षित हित मानने की अनुमति नहीं देता। इसके साथ ही पीठ ने दोनों प्राधिकरणों को असुरक्षित परिचालन ऋणदाता मानने के पहले के फैसले को बरकरार रखा।
नोएडा ने 99.32 करोड़ रुपये और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने 60.64 करोड़ रुपये के बकाये का दावा किया था। समाधान योजना में इनके लिए क्रमशः 25 करोड़ रुपये और 18.5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। प्राधिकरणों ने उच्चतम न्यायालय के ‘राज्य कर अधिकारी बनाम रेनबो पेपर्स लिमिटेड’ और ‘ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण बनाम प्रभजीत सिंह सोनी’ मामलों के फैसलों का हवाला दिया था।
हालांकि, एनसीएलएटी ने कहा कि 26 मई, 2026 से लागू संशोधन के बाद केवल कानून के आधार पर बने शुल्क के जरिये ‘सुरक्षा हित’ का दावा नहीं किया जा सकता। एनसीएलएटी ने कहा कि दोनों प्राधिकरणों और कंपनी के बीच हुए जमीन के पट्टे के दस्तावेजों में सभी बकायों पर सामान्य और बिना शर्त शुल्क का प्रावधान नहीं था। घर खरीदारों की ओर से पेश वकील आदित्य पारोलिया ने कहा कि दोनों प्राधिकरणों के दावों और समाधान योजना में किए गए प्रावधान के बीच करीब 116 करोड़ रुपये का अंतर था।
अपील मंजूर होने पर यह राशि घर खरीदारों पर अतिरिक्त बोझ बन सकती थी। उन्होंने कहा कि फैसले के बाद शुभकामना सिटी और शुभकामना टेकहोम्स परियोजनाओं के घर खरीदारों को समाधान योजना के तहत अतिरिक्त भुगतान नहीं करना पड़ेगा। समाधान योजना को ऋणदाताओं की समिति ने 87 प्रतिशत से अधिक मतों से मंजूरी दी थी।
एनसीएलएटी के निर्देश पर हुए मतदान में हिस्सा लेने वाले 95.6 प्रतिशत घर खरीदारों ने दोनों प्राधिकरणों को सुरक्षित लेनदार का दर्जा देने के खिलाफ मतदान किया था। एनसीएलएटी ने अपने 43 पृष्ठ के आदेश में कहा, ‘‘अपीलें खारिज की जाती हैं।
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