अगस्त में भारत के टेक्सटाइल निर्यात में 16.1 प्रतिशत की तेजी; 29,776 करोड़ रुपए पर पहुंचा निर्यात
नई दिल्ली, 17 सितंबर (आईएएनएस)। भारत के टेक्सटाइल क्षेत्र ने अगस्त 2026 में मजबूत निर्यात वृद्धि दर्ज की। कपड़ा मंत्रालय के गुरुवार को जारी एक बयान के अनुसार, अगस्त के दौरान कुल टेक्सटाइल निर्यात सालाना आधार पर 16.1 प्रतिशत बढ़कर 29,776 करोड़ रुपए पर पहुंच गया।
बयान के अनुसार, अप्रैल से अगस्त 2026 के दौरान संचयी टेक्सटाइल निर्यात 1.43 लाख करोड़ रुपए रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 10.3 प्रतिशत अधिक है।
निर्यात वृद्धि कई प्रमुख टेक्सटाइल श्रेणियों में देखने को मिली। अगस्त में सूती धागा, कपड़ा, मेड-अप्स और हथकरघा उत्पादों के निर्यात में 24.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं मानव निर्मित धागे, कपड़े और मेड-अप्स का निर्यात 19.9 प्रतिशत बढ़ा।
कालीन निर्यात में 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि हस्तशिल्प उत्पादों (हस्तनिर्मित कालीनों को छोड़कर) के निर्यात में 41.4 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई।
मंत्रालय ने कहा कि सभी प्रकार के वस्त्रों के रेडीमेड परिधानों का निर्यात भी सकारात्मक बना रहा और अगस्त के दौरान इसमें 6.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
बयान के अनुसार, अप्रैल-अगस्त 2026 की संचयी अवधि में भी प्रदर्शन उत्साहजनक रहा। इस दौरान सूती वस्त्रों के निर्यात में 18 प्रतिशत, मानव निर्मित वस्त्रों में 13.6 प्रतिशत, कालीनों में 11.9 प्रतिशत और हस्तशिल्प उत्पादों में 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
बयान में कहा गया है कि प्रमुख श्रेणियों में लगातार दर्ज हो रही वृद्धि भारत के टेक्सटाइल निर्यात की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मकता और विविधता को दर्शाती है। बेहतर बाजार पहुंच, नीतिगत हस्तक्षेपों, मूल्य संवर्धन और नए बाजारों में विस्तार के प्रयासों से इस क्षेत्र को समर्थन मिला है।
मंत्रालय ने कहा कि टेक्सटाइल क्षेत्र विनिर्माण, रोजगार सृजन और भारत के कुल निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला प्रमुख क्षेत्र बना हुआ है।
बयान के अनुसार, जनवरी 2026 में भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर वार्ता पूरी होने से भारतीय टेक्सटाइल क्षेत्र को बड़ा प्रोत्साहन मिला है।
इस समझौते के तहत भारत के निर्यात को 96.8 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर तरजीही बाजार पहुंच मिलेगी, जो भारत के कुल निर्यात का 99.5 प्रतिशत कवर करती हैं। समझौते के प्रभावी होने के बाद व्यापार मूल्य के आधार पर भारत के 90.7 प्रतिशत निर्यात के शुल्क-मुक्त होने की उम्मीद है।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
इंडिगो ने बढ़ाए कई घरेलू सेवाओं के शुल्क, शिशु यात्रा से लेकर अतिरिक्त सामान तक जेब पर बढ़ेगा बोझ
नई दिल्ली, 17 सितंबर (आईएएनएस)। इंडिगो ने अपनी घरेलू उड़ानों में कई सेवाओं के शुल्क संशोधित कर दिए हैं। संशोधित शुल्कों के तहत अब यात्रियों को शिशु यात्रा, अतिरिक्त सामान, बिना अभिभावक यात्रा करने वाले बच्चों, प्रायोरिटी सेवाओं और ट्रैवल सर्टिफिकेट के लिए पहले की तुलना में अधिक राशि चुकानी होगी।
नई शुल्क संरचना के अनुसार, किसी वयस्क यात्री के साथ यात्रा करने वाले शिशु के लिए शुल्क 2,000 रुपए से बढ़ाकर 3,000 रुपए कर दिया गया है। यह शुल्क तीन दिन से अधिक और दो वर्ष तक की आयु के शिशुओं पर लागू होगा।
इंडिगो के नियमों के अनुसार, शिशु के लिए अलग सीट उपलब्ध नहीं होगी और उसे साथ यात्रा कर रहे वयस्क की गोद में बैठकर यात्रा करनी होगी। प्रत्येक वयस्क यात्री के साथ केवल एक शिशु को यात्रा की अनुमति है। शिशु के लिए लागू शुल्क बुकिंग के समय ही जमा करना होगा और यात्रा के दौरान बच्चे की आयु का वैध प्रमाण भी मांगा जा सकता है।
एयरलाइन ने घरेलू उड़ानों पर अतिरिक्त सामान (एक्सेस बैगेज) शुल्क भी बढ़ा दिया है। निर्धारित सीमा से अधिक सामान ले जाने वाले यात्रियों को अब 700 रुपए प्रति किलोग्राम के बजाय 800 रुपए प्रति किलोग्राम का भुगतान करना होगा।
इस बदलाव के बाद यात्रियों को निर्धारित बैगेज सीमा से अधिक हर किलोग्राम सामान पर 100 रुपए अतिरिक्त देने होंगे।
इंडिगो ने बिना अभिभावक यात्रा करने वाले बच्चों (अनअकंपनिड माइनर) के लिए दी जाने वाली विशेष सेवा का शुल्क भी 5,000 रुपए से बढ़ाकर 5,999 रुपए कर दिया है। यह सेवा उन बच्चों के लिए लागू होती है जो किसी वयस्क के साथ यात्रा नहीं कर रहे होते और यह एयरलाइन की पात्रता एवं यात्रा नियमों के अधीन रहती है।
प्रायोरिटी चेक-इन और प्रायोरिटी बोर्डिंग सेवाओं के शुल्क में भी संशोधन किया गया है। इन दोनों सेवाओं के संयुक्त शुल्क को 450 रुपए से बढ़ाकर 650 रुपए कर दिया गया है। यानी इस सुविधा का लाभ लेने वाले यात्रियों को अब 200 रुपए अधिक चुकाने होंगे।
इसके अलावा, इंडिगो ने ट्रैवल सर्टिफिकेट जारी करने का शुल्क भी 200 रुपए से बढ़ाकर 300 रुपए कर दिया है।
इन संशोधनों के बाद इंडिगो की घरेलू उड़ानों में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए कई वैकल्पिक और यात्रा से जुड़ी सेवाओं की लागत बढ़ जाएगी, हालांकि एयरलाइन के मूल किराए (बेस फेयर) में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
--आईएएनएस
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