मेरी डिग्री का क्या? कैंपेन लेकर आई यूथ कांग्रेस, खाली सरकारी पदों पर भर्ती की मांग
इंडियन यूथ कांग्रेस ने देशभर के सरकारी विभागों में खाली पड़े मंजूर पदों को लेकर ‘मेरी डिग्री का क्या?’ कैंपेन शुरू किया है। कैंपेन की शुरुआत दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के साथ हुई, जहां एक वेबसाइट लॉन्च की गई और आगे की गतिविधियों का रोडमैप भी बताया गया। यूथ कांग्रेस का कहना है कि देश के युवाओं के सामने बेरोजगारी एक बड़ी चुनौती है और बड़ी संख्या में सरकारी पद खाली होने के बावजूद उन पर भर्ती नहीं हो रही है।
50 लाख से ज्यादा खाली पदों का मुद्दा उठाया
दिल्ली प्रदेश यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष अक्षय लाकड़ा ने दावा किया कि देशभर में 50,05,850 मंजूर सरकारी पद खाली हैं। उनके मुताबिक, इन पदों पर भर्ती होने से युवाओं को रोजगार मिलने के साथ स्कूलों और अस्पतालों जैसी सरकारी सेवाओं में भी सुधार हो सकता है।
यूथ कांग्रेस का कहना है कि एक तरफ युवाओं के पास डिग्रियां हैं और वे नौकरी की तलाश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बड़ी संख्या में सरकारी पद खाली पड़े हैं। इसी सवाल को लेकर संगठन ने ‘मेरी डिग्री का क्या?’ अभियान शुरू किया है।
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प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर शुरू हुआ कैंपेन
यूथ कांग्रेस के मुताबिक, यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर शुरू किया गया है। संगठन ने अपने बयान में प्रधानमंत्री और देश के युवाओं के बीच रोजगार के मुद्दे को लेकर तुलना की है।
यूथ कांग्रेस ने प्रधानमंत्री की डिग्री और युवाओं की डिग्रियों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि आम परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए फीस भरने और कई बार कर्ज लेने तक की कोशिश करते हैं, इस उम्मीद में कि पढ़ाई के बाद उन्हें रोजगार मिलेगा और वे परिवार का सहारा बन सकेंगे।
‘50 लाख पद खाली हैं तो भर्ती क्यों नहीं?’
यूथ कांग्रेस ने अपने अभियान के जरिए सवाल उठाया है कि अगर देश में बड़ी संख्या में युवा नौकरी के लिए योग्य हैं और सरकारी विभागों में मंजूर पद खाली हैं, तो इन पदों पर भर्ती क्यों नहीं की जा रही है।
संगठन ने केंद्र सरकार की ओर से हर साल दो करोड़ नौकरियां देने के वादे को लेकर भी सवाल उठाए हैं। यूथ कांग्रेस ने अपने बयान में प्रधानमंत्री के लिए ‘जुमलाजीवी’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए रोजगार के वादों पर निशाना साधा है।
हालांकि, ये यूथ कांग्रेस द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप और उसके अभियान का हिस्सा हैं। इनके संदर्भ में सरकार का पक्ष इस बयान में शामिल नहीं है।
भर्ती प्रक्रिया के लिए तय हो समय-सीमा
यूथ कांग्रेस ने खाली सरकारी पदों को भरने के लिए दो प्रमुख मांगें रखी हैं।
पहली मांग: हर खाली पद के लिए समय-सीमा वाला भर्ती कैलेंडर जारी किया जाए।
दूसरी मांग: भर्ती परीक्षा से लेकर अंतिम नियुक्ति तक पूरी प्रक्रिया के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय की जाए।
संगठन का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में देरी का सीधा असर उन युवाओं पर पड़ता है, जो लंबे समय तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते रहते हैं।
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‘जॉब मार्च’ और ‘डिग्री मार्च’ निकालने की तैयारी
यूथ कांग्रेस ने कहा है कि आने वाले एक साल में खाली सरकारी पदों को भरने की मांग को लेकर देशभर में अभियान चलाया जाएगा। संगठन ‘जॉब मार्च’ और ‘डिग्री मार्च’ जैसी पहल के जरिए युवाओं को इस मुद्दे से जोड़ने की बात कह रहा है।
यूथ कांग्रेस के मुताबिक, जरूरत पड़ने पर मुख्यमंत्रियों और प्रधानमंत्री के खिलाफ भी विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। संगठन ने यह भी कहा है कि अगर सरकार की ओर से मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो अगले साल प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर उनके आवास के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा।
‘मेरी डिग्री का क्या?’ को देशभर में पहुंचाने का दावा
यूथ कांग्रेस ने कहा है कि ‘मेरी डिग्री का क्या?’ अब सिर्फ एक अभियान नहीं रहेगा, बल्कि इसे देशभर के युवाओं से जुड़े रोजगार के मुद्दे के तौर पर उठाया जाएगा।
संगठन के मुताबिक, यह सवाल विश्वविद्यालयों, सड़कों और देश के गांवों तक पहुंचाया जाएगा। यूथ कांग्रेस का कहना है कि चुनी हुई सरकार को युवाओं के रोजगार और भविष्य से जुड़े सवालों पर जवाब देना चाहिए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये नेता रहे मौजूद
प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिल्ली प्रदेश यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष अक्षय लाकड़ा और आईवाईसी के राष्ट्रीय सचिव व दिल्ली के सह-प्रभारी परमिंदर सिंह पम्मी मौजूद थे।
यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष, आईवाईसी मीडिया विभाग की ओर से जारी बयान में इस अभियान को लेकर आगे भी देशव्यापी गतिविधियां चलाने की बात कही गई है।
MDR विवाद पर राजीव चंद्रशेखर ने राहुल गांधी को जवाब दिया: "UPI छोटे व्यवसायों की सुरक्षा करता है, यह Visa से कहीं बड़ा है
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ट्रांज़ैक्शन चार्ज को लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की आलोचना पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि सरकार का नया सिस्टम छोटे व्यवसायों और आम ग्राहकों की सुरक्षा करता है और साथ ही भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को दुनिया का सबसे सस्ता नेटवर्क बनाए रखता है। मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) चार्ज से जुड़े रेगुलेटरी सिस्टम के बारे में सफाई देते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि यह व्यवस्था आम यूज़र्स या छोटे व्यापारियों पर बोझ डाले बिना डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने के लिए बनाई गई है। चंद्रशेखर ने एएनआई से कहा कि यह असल में मंत्री और सरकार की ओर से लाई गई एक नई व्यवस्था है जो छोटे व्यवसायों और ग्राहकों को किसी भी तरह के चार्ज से बचाती है, लेकिन किसी व्यक्ति और व्यापारी के बीच होने वाले ट्रांज़ैक्शन पर मामूली चार्ज लगाती है।
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उन्होंने बताया कि UPI इंटरनेशनल पेमेंट सिस्टम से कहीं बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। उन्होंने कहा कि UPI आज डिजिटल पेमेंट के लिए दुनिया के सबसे सस्ते, सबसे तेज़ और सबसे बड़े इकोसिस्टम में से एक है। यह वीज़ा से भी कहीं बड़ा है। कांग्रेस वही करती है जिसमें वह माहिर है - नकारात्मक होना और अपने ही सांसदों की राय को नज़रअंदाज़ करना।" संशोधित यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) फ्रेमवर्क को लेकर सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच ज़बरदस्त राजनीतिक खींचतान शुरू हो गई है। जहाँ केंद्र सरकार का कहना है कि नागरिकों के लिए डिजिटल पेमेंट पूरी तरह से मुफ़्त है और ग्राहकों पर मर्चेंट की लागत डालना गैर-कानूनी और आपराधिक अपराध है, वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष ने इस कदम को "धोखा" और "UPI टैक्स" करार दिया है। विपक्ष का आरोप है कि मोदी सरकार विदेशी पेमेंट कंपनियों को फ़ायदा पहुँचाने के लिए अमेरिकी दबाव के आगे झुक गई है।
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लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी दबाव में झुक गए हैं" और उन्होंने UPI पर "टैक्स" लगा दिया है। X पर पोस्ट किए गए एक वीडियो मैसेज में राहुल गांधी ने कहा, "एक बार इंदिरा जी से पूछा गया था कि क्या उनका झुकाव बाईं ओर है या दाईं ओर और उनका जवाब था, मैं न तो बाईं ओर झुकती हूं, न ही दाईं ओर; मैं सीधी खड़ी रहती हूं।' मोदी जी की सोच बिल्कुल अलग है। वह न तो बाईं ओर हैं और न ही दाईं ओर; उन्होंने सीधे लेटकर डोनाल्ड ट्रंप के सामने झुकने का फैसला किया है। उन्होंने UPI पर टैक्स लगाकर और अमेरिका को भारी रकम देकर हर भारतीय पर टैक्स का बोझ डाला है। मोदी जी, कृपया अमेरिका के सामने झुकना बंद करें। हिम्मत दिखाएं, खड़े हों और UPI टैक्स वापस लें।
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