Tata Group: 5 साल के लिए बढ़ा चेयरमैन चंद्रशेखरन का कार्यकाल, शेयर बाजार में दिखा असर
Tata Group: भारतीय कॉर्पोरेट जगत और शेयर बाजार के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है. देश के सबसे पुराने और भरोसेमंद कारोबारी घरानों में शामिल टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी, टाटा संस ने आखिरकार शेयर बाजार में अपनी सार्वजनिक लिस्टिंग की योजना को हरी झंडी दिखा दी है. इसके साथ ही कंपनी के निदेशक मंडल ने मौजूदा चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन से अनुरोध किया है कि वे अपना कार्यकाल अगले पांच सालों के लिए बढ़ा लें, ताकि पूरी लिस्टिंग प्रक्रिया उनकी देखरेख में सुचारू रूप से पूरी हो सके. इस ऐतिहासिक खबर के सामने आते ही दलाल स्ट्रीट पर जबरदस्त हलचल मच गई और समूह की प्रमुख कंपनियों के शेयरों में जोरदार उछाल देखने को मिला.
रिजर्व बैंक के नियमों के बाद लिया गया बड़ा फैसला
टाटा संस की लिस्टिंग का यह रास्ता भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई के कड़े वित्तीय दिशा निर्देशों के तहत तैयार हुआ है. केंद्रीय बैंक ने ऊपरी स्तर की गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए यह अनिवार्य किया था कि वे तय समयसीमा के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट हों. टाटा संस ने पहले इस नियम से छूट पाने के कई प्रयास किए थे, लेकिन केंद्रीय बैंक ने उन दलीलों को स्वीकार नहीं किया. RBI ने इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट में कैविएट भी दाखिल कर रखी थी, जिससे किसी भी संभावित कानूनी चुनौती के समय उसका पक्ष पहले सुना जा सके. इन तमाम परिस्थितियों को देखते हुए टाटा संस के बोर्ड ने अब नियमों का पालन करते हुए बाजार में उतरने की तैयारी शुरू कर दी है.
चंद्रशेखरन पर बोर्ड ने फिर जताया पूरा भरोसा
इस पूरी प्रक्रिया का सबसे अहम पहलू चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन का नेतृत्व है. चंद्रशेखरन ने पिछले महीने यह संकेत दिया था कि वे फरवरी 2027 में अपना वर्तमान कार्यकाल पूरा होने के बाद अपने पद से हट सकते हैं. कंपनी के भीतर लिस्टिंग और भविष्य के पूंजी आवंटन को लेकर अलग अलग राय सामने आ रही थी. लेकिन अब बोर्ड ने साफ कर दिया है कि इतने बड़े और जटिल आईपीओ को पूरा करने के लिए चंद्रशेखरन का अनुभव और नेतृत्व बेहद जरूरी है. बोर्ड चाहता है कि वे अगले पांच वर्षों तक पद पर बने रहकर इस पूरी यात्रा का मार्गदर्शन करें, जिससे निवेशकों का भरोसा पूरी तरह बना रहे.
शेयरधारकों के बीच नियंत्रण और लाभ का गणित
टाटा संस की इस लिस्टिंग का सीधा असर इसके दो सबसे बड़े शेयरधारकों पर पड़ने वाला है. कंपनी में सबसे बड़ी 66 प्रतिशत की हिस्सेदारी टाटा ट्रस्ट्स के पास है, जिसके प्रमुख नोएल टाटा हैं. ट्रस्ट की ओर से पहले लिस्टिंग को लेकर हिचकिचाहट जताई जाती रही थी, क्योंकि इससे सार्वजनिक खुलासे बढ़ेंगे और कंपनी पर नियंत्रण को लेकर चिंताएं थीं. दूसरी तरफ, 18.4 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले शापूरजी पालोनजी समूह के लिए यह फैसला संजीवनी की तरह देखा जा रहा है. पालोनजी समूह लंबे समय से लिस्टिंग की मांग कर रहा था, ताकि उसकी हिस्सेदारी का सही बाजार मूल्यांकन हो सके और वह अपने भारी कर्ज के बोझ को हल्का कर सके.
बाजार में जश्न और शेयरों में आई जोरदार तेजी
टाटा संस के इस कदम की खबर बाहर आते ही निवेशकों ने टाटा समूह की लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में जमकर खरीदारी की. समूह की ऑटोमोबाइल इकाई टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के शेयरों में पांच प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई. इसके अलावा टाटा स्टील के शेयर लगभग तीन प्रतिशत तक चढ़ गए, जबकि देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस के शेयरों में भी ढाई प्रतिशत से ज्यादा का उछाल देखा गया. बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि टाटा संस का आईपीओ बाजार में आता है, तो यह देश का अब तक का सबसे विशाल निर्गम साबित होगा, जो पूरे घरेलू शेयर बाजार की रूपरेखा को नई ऊंचाई दे सकता है.
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Patna High Court: क्या पत्नी को दूसरे पुरुष के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखना ही अवैध संबंध साबित करने के लिए काफी?
Husband Caught Wife with Another Man: पटना हाईकोर्ट के सामने पति-पत्नी के विवाद का अजीबोगरीब मामला सामने आया है. यहां एक पति ने पत्नी पर आरोप लगाया है कि उसने अपनी पत्नी की किसी दूसरे पुरुष के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखा है. इसके तहत वह पत्नी पर व्यभचार का आरोप लगाता है और उससे तलाक की मांग करता है. वहीं, पत्नी का कहना है कि ये सभी आरोप झूठ है और ससुराल पक्ष के लोग पत्नी को मानसिक प्रताड़ना दे रहे थे. ऐसे में पहले यह मामला जब मधुबनी फैमिली कोर्ट ने 4 अप्रैल 2024 को अपना फैसला सुनाते हुए तलाक की अर्जी खारीज कर दी. कोर्ट का कहना था कि सिर्फ पत्नी को किसी और के साथ देख लेना तलाक के लिए पर्याप्त नहीं. ऐसा दावा गलत और शक से भरा हो सकता है. जबकि पत्नी ने भी आरोप लगाते हुए कहा कि उसका पति उसे जहर देकर मारना चाहता था, इसलिए वह अपने मायके लौट गई थी. इसके बाद मामला पटना हाईकोर्ट पहुंचा, जहां पर कोर्ट ने पति की अपील पर विचार करते हुए मुख्य सवाल यह देखा कि क्या पति-पत्नी के कथित अवैध संबंध को पर्याप्त सबूतों के साथ साबित कर पाया था कि नहीं. वहीं, पटना कोर्ट ने भी माना कि सिर्फ पत्नी को किसी दूसरे मर्द के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखना तलाक का कारण नहीं बनता है. अदालत के सामने पत्नी के अवैध संबंध के कोई ठोस सबूत नहीं थे. इसलिए, उन्होंने भी निचली कोर्ट का फैसला बरकरार रखा.
कोर्ट का कहना है कि व्यभचार का आरोप लगाने पर उसे सही साबित करना बहुत जरूरी है सिर्फ शक के आधार पर तलाक नहीं लिया जा सकता है.
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