शेड्यूल दवाओं की बिक्री पर सरकार सख्त, मेडिकल स्टोर पर CCTV लगाना होगा जरूरी
सरकार ने शेड्यूल एच, एच1 और एक्स दवाओं पर निगरानी को और सख्त करने का फैसला किया है. गुरुवार को सरकार ने कहा कि उसने मेडिकल स्टोर पर अनिवार्य रूप से सीसीटीवी निगरानी लगाने का प्रस्ताव रखा है, ताकि इन दवाओं की अवैध बिक्री को रोका जा सके.
स्वास्थ्य मंत्रालय ने 'ड्रग्स रूल्स, 1945' में संशोधन का प्रस्ताव दिया है. इसके लिए 8 सितंबर को एक ड्राफ्ट गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया है. इस प्रस्तावित संशोधन का मकसद शेड्यूल एच, एच1 और एक्स दवाओं की अनधिकृत पहुंच और बिक्री से जुड़ी चिंताओं को दूर करना है. भारत में ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स (1945) के तहत शेड्यूल एच, एच1 और एक्स ऐसी दवाएं हैं जिनके दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार ने बिक्री और पर्ची पर कड़े नियम बनाए हैं.
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मंत्रालय ने कहा कि इस संशोधन के लागू होने के बाद शेड्यूल एच, एच1 और एक्स दवाओं की बिक्री और वितरण की निगरानी मजबूत होगी और बिना वैध पर्ची के इनकी अनधिकृत बिक्री पर रोक लगेगी. स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, "प्रस्तावित सीसीटीव निगरानी प्रणाली से फार्मा सप्लाई चेन में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा और मजबूत होगी." बताया गया कि इस प्रस्ताव पर पहले ड्रग्स कंसल्टेटिव कमेटी (डीसीसी) में विचार किया गया था और बाद में इसे ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (डीटीएबी) के सदस्यों के बीच चर्चा के लिए भेजा गया था. प्रस्ताव पर विचार करने के बाद डीटीएबी ने इसकी मंजूरी की सिफारिश की है.
मंत्रालय ने प्रस्तावित संशोधन पर हितधारकों और आम जनता से आपत्तियां और सुझाव भी मांगे हैं. पिछले महीने सरकार ने चार साल से कम उम्र के बच्चों के लिए क्लोरफेनिरामाइन मेलिएट और फेनिलएफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड वाली सभी फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (एफडीसी) दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया था. स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक अधिसूचना में यह अनिवार्य किया था कि इन दवाओं पर स्पष्ट चेतावनी लिखी हो कि ये चार साल से कम उम्र के बच्चों में इस्तेमाल नहीं की जानी चाहिए। यह छोटे बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम था. सरकार ने निर्माताओं को निर्देश दिया था कि वे इन दवाओं के लेबल, पैकेज इंसर्ट और प्रचार साहित्य पर साफ-साफ लिखें - "फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन का उपयोग चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों में नहीं किया जाना चाहिए."मंत्रालय ने बताया कि यह अधिसूचना जनहित में ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 26ए के तहत जारी की गई है और यह आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से प्रभावी है.
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INPUT: IANS
Tata Group: 5 साल के लिए बढ़ा चेयरमैन चंद्रशेखरन का कार्यकाल, शेयर बाजार में दिखा असर
Tata Group: भारतीय कॉर्पोरेट जगत और शेयर बाजार के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है. देश के सबसे पुराने और भरोसेमंद कारोबारी घरानों में शामिल टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी, टाटा संस ने आखिरकार शेयर बाजार में अपनी सार्वजनिक लिस्टिंग की योजना को हरी झंडी दिखा दी है. इसके साथ ही कंपनी के निदेशक मंडल ने मौजूदा चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन से अनुरोध किया है कि वे अपना कार्यकाल अगले पांच सालों के लिए बढ़ा लें, ताकि पूरी लिस्टिंग प्रक्रिया उनकी देखरेख में सुचारू रूप से पूरी हो सके. इस ऐतिहासिक खबर के सामने आते ही दलाल स्ट्रीट पर जबरदस्त हलचल मच गई और समूह की प्रमुख कंपनियों के शेयरों में जोरदार उछाल देखने को मिला.
रिजर्व बैंक के नियमों के बाद लिया गया बड़ा फैसला
टाटा संस की लिस्टिंग का यह रास्ता भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई के कड़े वित्तीय दिशा निर्देशों के तहत तैयार हुआ है. केंद्रीय बैंक ने ऊपरी स्तर की गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए यह अनिवार्य किया था कि वे तय समयसीमा के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट हों. टाटा संस ने पहले इस नियम से छूट पाने के कई प्रयास किए थे, लेकिन केंद्रीय बैंक ने उन दलीलों को स्वीकार नहीं किया. RBI ने इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट में कैविएट भी दाखिल कर रखी थी, जिससे किसी भी संभावित कानूनी चुनौती के समय उसका पक्ष पहले सुना जा सके. इन तमाम परिस्थितियों को देखते हुए टाटा संस के बोर्ड ने अब नियमों का पालन करते हुए बाजार में उतरने की तैयारी शुरू कर दी है.
चंद्रशेखरन पर बोर्ड ने फिर जताया पूरा भरोसा
इस पूरी प्रक्रिया का सबसे अहम पहलू चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन का नेतृत्व है. चंद्रशेखरन ने पिछले महीने यह संकेत दिया था कि वे फरवरी 2027 में अपना वर्तमान कार्यकाल पूरा होने के बाद अपने पद से हट सकते हैं. कंपनी के भीतर लिस्टिंग और भविष्य के पूंजी आवंटन को लेकर अलग अलग राय सामने आ रही थी. लेकिन अब बोर्ड ने साफ कर दिया है कि इतने बड़े और जटिल आईपीओ को पूरा करने के लिए चंद्रशेखरन का अनुभव और नेतृत्व बेहद जरूरी है. बोर्ड चाहता है कि वे अगले पांच वर्षों तक पद पर बने रहकर इस पूरी यात्रा का मार्गदर्शन करें, जिससे निवेशकों का भरोसा पूरी तरह बना रहे.
शेयरधारकों के बीच नियंत्रण और लाभ का गणित
टाटा संस की इस लिस्टिंग का सीधा असर इसके दो सबसे बड़े शेयरधारकों पर पड़ने वाला है. कंपनी में सबसे बड़ी 66 प्रतिशत की हिस्सेदारी टाटा ट्रस्ट्स के पास है, जिसके प्रमुख नोएल टाटा हैं. ट्रस्ट की ओर से पहले लिस्टिंग को लेकर हिचकिचाहट जताई जाती रही थी, क्योंकि इससे सार्वजनिक खुलासे बढ़ेंगे और कंपनी पर नियंत्रण को लेकर चिंताएं थीं. दूसरी तरफ, 18.4 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले शापूरजी पालोनजी समूह के लिए यह फैसला संजीवनी की तरह देखा जा रहा है. पालोनजी समूह लंबे समय से लिस्टिंग की मांग कर रहा था, ताकि उसकी हिस्सेदारी का सही बाजार मूल्यांकन हो सके और वह अपने भारी कर्ज के बोझ को हल्का कर सके.
बाजार में जश्न और शेयरों में आई जोरदार तेजी
टाटा संस के इस कदम की खबर बाहर आते ही निवेशकों ने टाटा समूह की लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में जमकर खरीदारी की. समूह की ऑटोमोबाइल इकाई टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के शेयरों में पांच प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई. इसके अलावा टाटा स्टील के शेयर लगभग तीन प्रतिशत तक चढ़ गए, जबकि देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस के शेयरों में भी ढाई प्रतिशत से ज्यादा का उछाल देखा गया. बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि टाटा संस का आईपीओ बाजार में आता है, तो यह देश का अब तक का सबसे विशाल निर्गम साबित होगा, जो पूरे घरेलू शेयर बाजार की रूपरेखा को नई ऊंचाई दे सकता है.
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