भारत से धूल चटाने के बाद एशियन गेम्स से बाहर होने से बाल-बाल बचा पाकिस्तान, थाईलैंड ने कर दी क्वार्टर फाइनल में बुरी हालत
Asian Games 2026 : एशियन गेम्स 2026 से पाकिस्तान महिला क्रिकेट बाहर होने से बाल-बाल बच गई. थाईलैंड महिला क्रिकेट टीम ने एशियन गेम्स 2026 के दूसरे क्वार्टर फाइनल मैच में पाकिस्तान को लगभग हरा दिया था लेकिन किस्मत के चलते पाकिस्तान को जीत मिली और अंत में उनसे एशियन गेम्स 2026 के सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया है. इससे पहले महिला एशिया कप 2026 में कुछ ही दिन पहले पाकिस्तान को भारत ने सेमीफाइनल-1 में रौंद दिया था, जिसके बाद पाकिस्तान महिला क्रिकेट टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गई थी.
???? THAILAND WOMEN ???????? VS PAKISTAN WOMEN ????????
— The Cricket????Village ???????????????????????????????????????????????????????? (@MSohailAfzal10) September 17, 2026
???? PAKISTAN WOMEN WIN BY 3 WICKETS! ????????????
???????? Thailand Women: 91/4 (11 overs)
⁰???????? Pakistan Women: Won by 3 wickets ✅ pic.twitter.com/PVwKS6dti6
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Ganeshotsav 2026: सभी देवी-देवताओं से पहले क्यों होती है गणेश जी की पूजा? जानें रोचक कथा
Ganeshotsav 2026: गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को मनाई गई थी. इस दिन से गणेशोत्सव का भी आरंभ हो गया था. आज 17 सितंबर को गणेशोत्सव का चौथा दिन है. धार्मिक मान्यता है कि दस दिन के इस उतस्व में हमें गणेश जी से जुड़ी पौराणिक कथाओं का पाठ करना चाहिए, उनके बारे में जानना चाहिए. आपने अक्सर देखा होगा कि घर में जब भी कोई नया कार्य शुरू होता है तो सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाती है. शादी-विवाह से जुड़े कार्यों में भी पहले बप्पा का आशीर्वाद मांगा जाता है. मगर क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर बप्पा कैसे प्रथम पूज्य बन गए. उन्हें किसने यह दर्जा दिया था. आइए जानते हैं इसके पीछे की रोचक गाथा क्या है.
माता-पिता ने ली दोनों पुत्रों परीक्षा
शिव पुराण के अनुसार, एक दिन भगवान शिव और माता पार्वती ने अपने दोनों पुत्रों भगवान कार्तिकेय और भगवान गणेश की परीक्षा लेनी चाही. दोनों ने अपने पुत्रों से कहा कि जो सबसे पहले पूरे ब्रह्मांड के चक्कर लगाकर आएगा, उसे ही सर्वश्रेष्ठ माना जाएगा. शर्त सुनते ही भगवान कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर सवार हुए और संसार का चक्कर काटने चले गए. वहीं, दूसरी तरफ मूषक यानी चूहा, जो गणेश जी का वाहन था. मूषक छोटा सा वाहन था. ऐसे में उन्होंने अपनी तीव्र बुद्धि का प्रयोग किया. उन्होंने ब्रह्मांड के चक्कर लगाने की बजाय अपने माता-पिता के चारों ओर परिक्रमा की.
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इसके बाद जब शिव और पार्वची ने पूछा तो गणेश जी बोले कि मेरे लिए तो मेरा पूरी पूरी दुनिया मेरे माता-पिता के चरणों में समर्पित है. गणेश जी के इस उत्तर से प्रसन्न होकर शिव जी और माता पार्वती ने उन्हें खुश होकर आशीर्वाद दिया. उनकी सूझबूझ को देखकर उन्हें यह वरदान मिला कि आज के बाद किसी भी कार्य के प्रारंभ में सबसे पहले उन्हीं की पूजा की जाएगी.
लोक मंगल के देवता श्रीगणेश
श्री गणेश भगवान को लोक मंगल का देवता मावा जाता है. लोक मंगल उनका उद्देश्य है परंतु जहां भी अमंगल होता है, उसे दूर करने के लिए श्री गणेश अग्रणी रहते हैं. गणेश भगवान रिद्वी और सिद्धी के स्वामी हैं. इसलिए, उनकी कृपा से संपदा और समृद्धि का कभी अभाव नहीं होता है. भगवान श्री गणेश जी को दूर्वा और मोदक अत्यंत प्रिय होते हैं.
भगवान गणेश को प्रथम पूज्य मानने का धार्मिक महत्व क्या है?
हिंदू धर्म में भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक, ज्ञान और शुभता का प्रतीक माना जाता है. किसी भी शुभ कार्य के प्रारंभ में गणेश जी का स्मरण करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. धार्मिक मान्यता है कि गणपति जी की पूजा करने से कार्य में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं. यही वजह है कि उन्हें 'विघ्नहर्ता' और 'मंगलकर्ता' जैसे नामों से भी पुकारा जाता है.
अनोखा है गणेश जी का स्वरूप
गणेश भगवान का स्वरूप भी अपने आप में कई महत्वपूर्ण संदेश देता है. उनका बड़ा मस्तक अधिक सोचने और ज्ञान प्राप्त करने की प्रेरणा देता है, जबकि उनके बड़े कान यह संदेश देते हैं कि व्यक्ति को अधिक सुनना और कम बोलना चाहिए. छोटी आंखों को एकाग्रता का प्रतीक माना जाता है. वहीं, उनका वाहन मूषक मन की चंचलता और इच्छाओं का प्रतीक माना जाता है. गणेश जी का मूषक पर सवार होना इस बात का संकेत माना जाता है कि बुद्धि और विवेक से मन की चंचलता पर नियंत्रण पाना मुमकिन है.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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