यूपीआई एमडीआर को लेकर ब्रोकर्स की चिंताओं की जांच करेगा सेबी: चेयरमैन तुहिन कांत पांडे
मुंबई, 17 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने गुरुवार को कहा कि नियामक नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) फ्रेमवर्क को लेकर स्टॉकब्रोकरों द्वारा उठाई गई चिंताओं की जांच करेगा।
नेशनल बैंक फॉर फाइनेंसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट (एनएबीएफआईडी) इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्क्लेव 2026 के इतर पत्रकारों से बातचीत में सेबी प्रमुख ने कहा कि इस संबंध में कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं और नियामक इन चिंताओं पर विचार करेगा।
यह बयान ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले ब्रोकर्स और ब्रोकिंग कंपनियों ने यूपीआई पर लागू नए एमडीआर ढांचे से उद्योग पर पड़ने वाली अतिरिक्त लागत को लेकर चिंता जताई थी।
इससे पहले, बुधवार को जेरोधा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नितिन कामथ ने व्यक्ति से व्यापारी (पी2एम) यूपीआई भुगतान पर लागू नए ढांचे का समर्थन करते हुए कहा था कि यूपीआई के व्यापक स्तर पर अपनाए जाने के बाद यह कदम उठाया जाना आवश्यक हो गया था।
हालांकि, कामथ ने यह भी कहा था कि निवेश और ब्रोकिंग जैसे कुछ उपयोग मामलों में प्रस्तावित एमडीआर संरचना व्यावहारिक नहीं लगती। उन्होंने कहा कि कई बार ग्राहक अपने ब्रोकिंग खाते में यूपीआई के जरिए धनराशि जमा करते हैं, लेकिन बाद में कोई ट्रेड नहीं करते। ऐसी स्थिति में ब्रोकर्स को शुल्क का बोझ उठाना पड़ सकता है, जबकि उन्हें कोई राजस्व प्राप्त नहीं होता।
उन्होंने सुझाव दिया था कि ब्रोकिंग से जुड़े यूपीआई भुगतानों के लिए कम ट्रांजैक्शन लिमिट पर विचार किया जाना चाहिए।
नितिन कामथ के अनुसार, ब्रोकर्स यह सुनिश्चित नहीं कर सकते कि यूपीआई के माध्यम से उनके खाते में भेजी गई राशि अंततः किसी ट्रेड में उपयोग होगी। चूंकि वे ग्राहकों को ट्रेड करने के लिए बाध्य नहीं कर सकते, इसलिए यदि एमडीआर का शुल्क ग्राहकों पर नहीं डाला जा सकता तो ब्रोकर्स को बिना किसी आय के अतिरिक्त लागत उठानी पड़ सकती है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा था कि यदि 10,000 ग्राहक एक महीने में 2 लाख रुपए के 50-50 यूपीआई ट्रांसफर करें और बाद में कोई ट्रेड निष्पादित न करें, तो प्रस्तावित एमडीआर ढांचे के तहत किसी ब्रोकर पर लगभग 2 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च आ सकता है।
इसके अलावा, कामथ ने त्रैमासिक निपटान (क्वाटर्ली सेटलमेंट - क्यूएस) नियमों का भी उल्लेख किया। सेबी के इस नियम के तहत ब्रोकर्स को ग्राहकों की अप्रयुक्त धनराशि हर महीने या तिमाही में वापस करनी होती है।
उन्होंने कहा कि ग्राहक अक्सर यह धनराशि दोबारा अपने ब्रोकिंग खातों में जमा करते हैं और इन पुनः जमा की गई रकम का बड़ा हिस्सा यूपीआई के माध्यम से आता है। इससे बार-बार फंड ट्रांसफर पर ब्रोकर्स को बार-बार शुल्क वहन करना पड़ सकता है, जबकि उनके कारोबार में कोई अतिरिक्त आय नहीं होती।
--आईएएनएस
डीबीपी
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पंजाब में मजबूत होंगी मानसिक स्वास्थ्य और नशामुक्ति सेवाएं, CM भगवंत मान ने लिया बड़ा फैसला
Punjab News: पंजाब की भगवंत मान सरकार ने राज्य में मानसिक स्वास्थ्य और नशामुक्ति सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. दरअसल, मान सरकार ने पंजाब सरकार ने स्टेट मेंटल हेल्थ अथॉरिटी(SMHA) में 11 गैर-सरकारी सदस्यों को मनोनीत किया है. इससे पंजाब में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को नई गति मिलेगी. मान सरकार के इस कदम से राज्य में मानसिक बीमारी से जूझ रहे लोगों के अधिकारों की रक्षा और अधिक जवाबदेह मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल माना जा रहा है.
पंजाब में मजबूत होंगी मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं
बता दें कि स्टेट मेंटल हेल्थ अथॉरिटी राज्य में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 के प्रावधानों के क्रियान्वयन की निगरानी करेगी. साथ ही अधिनियम के अनुरूप मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी, विनियमन और गुणवत्ता में सुधार सुनिश्चित किया जाएगा. बता दें कि मान सरकार की प्रमुख पहल 'युद्ध नशेआं विरुद्ध' के तहत मानसिक स्वास्थ्य और नशामुक्ति सेवाओं के विस्तार के बीच यह कदम विशेष महत्त्व रखता है.
बता दें कि स्टेट मेंटल हेल्थ अथॉरिटी मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के नियमन के लिए राज्य की सर्वोच्च वैधानिक संस्था है, जिसका काम मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए गुणवत्ता एवं सेवा मानक निर्धारित करना है. साथ ही संबंधित मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों के रजिस्ट्रेशन और मानसिक स्वास्थ्य नीति से जुड़े मामलों में सरकार को सलाह देने का काम करता है.
ये हैं अथॉरिटी के आधिकारिक सदस्य
स्टेट मेंटल हेल्थ अथॉरिटी के आधिकारिक सदस्यों में स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा और सामाजिक कल्याण विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं; जबकि 11 गैर-सरकारी मनोनीत सदस्य मनोचिकित्सकों, मनोवैज्ञानिकों, मनोरोग सामाजिक कार्यकर्ताओं, नर्सों, मानसिक बीमारी से जूझ रहे लोगों, देखभालकर्ताओं और गैर-सरकारी संगठनों का प्रतिनिधित्व करते हैं. बता दें कि इस प्रतिनिधित्व का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी नीतियां सिर्फ प्रशासनिक और चिकित्सकीय विशेषज्ञता तक सीमित न रहें, बल्कि मरीजों, उनके परिवारों और उनके साथ निकटता से काम करने वाले लोगों के अनुभवों को भी ध्यान में रखा जाए.
जिला स्तर पर कार्यरत है मानसिक स्वास्थ्य समीक्षा बोर्ड
इसके लिए मान सरकार ने जिला स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य समीक्षा बोर्ड भी कार्यरत किया है, जिनकी अध्यक्षता जिला न्यायाधीश या पात्र न्यायिक अधिकारी करते हैं. इस बोर्ड का काम भर्ती और उपचार संबंधी निर्णयों की स्वतंत्र समीक्षा, शिकायतों एवं अधिकारों के कथित उल्लंघन के मामलों के निवारण, अग्रिम निर्देशों और नामित प्रतिनिधियों की जांच तथा आवश्यकता पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों के निरीक्षण के लिए स्वतंत्र व्यवस्था प्रदान करना है.
बता दें कि एसएमएचए के लिए मनोनीत सदस्यों की सूची में मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में लंबे समय से कार्य कर रहे अनुभवी विशेषज्ञ और प्रतिष्ठित संस्थाएं शामिल हैं, इन सभी ने राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है.
क्या बोले स्टेट मेंटल हेल्थ अथॉरिटी के मनोनीत सदस्य?
स्टेट मेंटल हेल्थ अथॉरिटी के मनोनीत सदस्य और वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. सत्येन शर्मा ने कहा, "एसएमएचए का गठन यह सुनिश्चित करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम है कि पंजाब में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का विकास गुणवत्ता और जवाबदेही को केंद्र में रखकर हो. सरकार ने हमें अधिकार-आधारित एक स्पष्ट ढांचा दिया है और अब अथॉरिटी की जिम्मेदारी है कि इसे ऐसी सेवाओं में बदले, जिन तक लोग वास्तव में पहुंच सकें, जिन पर भरोसा कर सकें और लाभ ले सकें. इसके लिए गरिमा, उपचार की निरंतरता, रिहैबिलिटेशन तथा परिवारों और देखभालकर्ताओं की जरूरतों पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है."
डॉ. शर्मा ने आगे कहा, "मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं अब लोगों तक उनके अपने क्षेत्रों में पहुंचना शुरू हो गई हैं. पंजाब जैसे राज्य के लिए जिला और सामुदायिक स्तर पर सेवाओं को मजबूत करना विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है, ताकि लोगों को शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के उपचार की सुविधा भी उपलब्ध हो सके. अथॉरिटी के पास इस उद्देश्य को साकार करने का महत्त्वपूर्ण अवसर है."
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