आदित्य ठाकरे को ₹500 करोड़ का मानहानि नोटिस:दिशा सालियान के पिता बोले- 7 दिन में माफी मांगें, इनके बयानों से जांच पर सवाल खड़े हुए
दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान ने शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे और NCP (SP) नेता व महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख को 500 करोड़ रुपए का मानहानि नोटिस भेजा है। नोटिस में दोनों नेताओं से उनके बयानों को वापस लेने, सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और 500 करोड़ रुपए का हर्जाना देने की मांग की गई है। दोनों को इसके लिए 7 दिन का समय दिया गया है। 28 साल की दिशा एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर थीं। उनकी 8 जून 2020 को मुंबई की एक बिल्डिंग से गिरने के कारण मौत हुई थी। दिशा की मौत के 6 दिन बाद 14 जून एक्टर सुशांत सिंह की भी मौत हो गई थी। पिता का आरोप- न्याय की मांग को राजनीतिक बताया सतीश सालियान की ओर से भेजे गए नोटिस में आरोप लगाया गया है कि आदित्य ठाकरे और अनिल देशमुख के बयानों से उनकी बेटी की मौत की दोबारा जांच की मांग करने की उनकी कोशिशों को राजनीतिक बताया गया। नोटिस में कहा गया है कि सतीश अपनी बेटी की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनके इस प्रयास को राजनीतिक मकसद से जोड़ना उनकी प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाने वाला है। नोटिस में दोनों नेताओं से ‘बिना शर्त, स्पष्ट और सार्वजनिक माफी’ मांगने की बात कही गई है। यह माफी प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया के जरिए सार्वजनिक करने के साथ ही उनके आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर भी पोस्ट करने की मांग की गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, वीडियो के जरिए कम से कम 3 मिनट की माफी की मांग भी की गई है। आदित्य बोले- दिशा से कभी मिला ही नहीं यह नोटिस आदित्य ठाकरे के 16 सितंबर के बयान के बाद आया है। CBI की FIR में नाम आने के बाद आदित्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि वह दिशा सालियान से कभी नहीं मिले और उनकी कोई जान-पहचान नहीं थी। उन्होंने कहा कि पिछले करीब 6 साल से राजनीतिक और निजी वजहों से उनका नाम दिशा की मौत से जोड़ा जा रहा है। आदित्य ने इसे बिना सबूत का अभियान बताते हुए कहा कि इससे उनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मामले की दोबारा जांच आधिकारिक एजेंसियों को बिना राजनीतिक हस्तक्षेप और व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप के करनी चाहिए। देशमुख के बयान पर भी आपत्ति कानूनी नोटिस में अनिल देशमुख के पुराने बयान का भी जिक्र किया गया है। नोटिस के मुताबिक, 23 मार्च 2025 को देशमुख ने दिशा सालियान मामले को आदित्य ठाकरे को बदनाम करने की साजिश बताया था। सतीश सालियान का कहना है कि ऐसे बयानों से उनकी ओर से की जा रही कानूनी और जांच की मांग को गलत तरीके से पेश किया गया। CBI ने 14 सितंबर को दर्ज की FIR यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब CBI ने 14 सितंबर 2026 को दिशा सालियान की मौत के मामले में FIR दर्ज की है। यह कार्रवाई बॉम्बे हाईकोर्ट के ताजा जांच के निर्देश के बाद हुई। हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को CBI को मामले में FIR दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया था। CBI की जांच का मकसद 2020 में हुई दिशा की मौत की परिस्थितियों की नए सिरे से जांच करना है। शुरुआती जांच में मुंबई पुलिस ने इसे (ADR) के तौर पर दर्ज किया था। पिता ने हाईकोर्ट में लगाई थी याचिका दिशा के पिता सतीश सालियान ने बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था। उन्होंने बेटी की मौत की दोबारा जांच और FIR दर्ज करने की मांग की थी। उनकी याचिका में कुछ लोगों की भूमिका की जांच की मांग भी की गई थी। इसके बाद हाईकोर्ट के निर्देश पर CBI को मामले की नए सिरे से जांच की जिम्मेदारी मिली और 14 सितंबर को FIR दर्ज की गई। FIR में कई नाम, लेकिन नाम आना अपराध साबित होना नहीं CBI की FIR में आदित्य ठाकरे के अलावा अभिनेता डिनो मोरिया, सूरज पंचोली और रिया चक्रवर्ती समेत कई लोगों के नाम बताए गए हैं। जांच से जुड़े पुलिसकर्मियों, मेडिकल स्टाफ और अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
डीयू छात्रसंघ चुनाव से पहले ABVP-NSUI गुट में झड़प:2 छात्र घायल, गाड़ियों में तोड़फोड़; लाठी लिए जा रहे लोगों के वीडियो सामने आए
दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ (DUSU) चुनाव से पहले बुधवार रात नॉर्थ कैंपस में छात्रों के दो गुटों के बीच झड़प हुई। ABVP और NSUI ने एक-दूसरे से जुड़े लोगों पर अलग-अलग जगहों पर हमला करने के आरोप लगाए। हमले में दो छात्रों को चोटें आई हैं। कैंपस में खड़ी गाड़ियों में भी तोड़फोड़ की गई। घटना से पहले के कुछ वीडियो सामने आए हैं, जिनमें कुछ अज्ञात लोग हाथों में लाठियां लेकर जाते दिख रहे हैं। हालांकि, वे किस संगठन के थे, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। पुलिस के मुताबिक स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और कैंपस में पुलिस तैनात है। फ्लैग मार्च भी किया जा रहा है। DUSU चुनाव के लिए 16 सितंबर को प्रचार खत्म हो चुका है। मतदान 18 सितंबर और मतगणना 19 सितंबर को होगी। ABVP और NSUI ने एक-दूसरे पर लगाए हमले के आरोप ABVP ने आरोप लगाया कि लॉ सेंटर-1 (LC-1) के बाहर उसके एक सदस्य पर जानलेवा हमला किया गया। संगठन का दावा है कि हमले में कांग्रेस, इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) और NSUI से जुड़े लोग शामिल थे। ABVP ने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के हरि मंदिर में उसके सदस्यों के घर पर NSUI कार्यकर्ताओं ने हमला किया। संगठन के मुताबिक, उस समय ABVP सदस्य शांतिपूर्ण बैठक कर रहे थे और वहां महिला छात्र सदस्य भी मौजूद थीं। ABVP ने दावा किया कि एक हमलावर को पकड़कर पुलिस के हवाले किया गया। ABVP के मुताबिक, कांग्रेस से जुड़े गैर-छात्र राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने NSUI पैनल के लिए प्रचार किया। संगठन ने बाहरी राजनीतिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी और क्लासरूम में प्रचार पर सवाल उठाए। साथ ही छात्रों को प्रभावित करने के लिए पैसे के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। NSUI का दावा- आदिवासी छात्र पर हमला हुआ वहीं, NSUI ने आरोप लगाया कि मोतीलाल नेहरू कॉलेज के बाहर उसके आदिवासी छात्र सदस्य पर ABVP से जुड़े लोगों ने हमला किया। संगठन ने घटना की जांच और कार्रवाई की मांग की। NSUI के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रवि हनुमान पांडे ने ABVP पर डराने और अलग-थलग करने की राजनीति करने का आरोप लगाया। मोतीलाल नेहरू कॉलेज में शिक्षक से मारपीट मोतीलाल नेहरू कॉलेज (ईवनिंग) में DUSU के एक प्रचारक पर शिक्षक से मारपीट का आरोप लगा। इसके बाद कॉलेज की फैकल्टी ने प्रदर्शन किया। एक शिक्षक के मुताबिक, फैकल्टी के एक सदस्य को गंभीर चोट आई और उन्हें इलाज के लिए ले जाया गया। शिक्षकों ने कार्रवाई की मांग करते हुए FIR दर्ज कराने और चुनाव से जुड़ी ड्यूटी के बहिष्कार की बात कही। शिक्षकों ने कहा कि छात्रों को अपनी सीमाएं समझनी चाहिए और किसी भी स्थिति में फैकल्टी के साथ मारपीट नहीं होनी चाहिए। हालांकि, शिक्षक यह स्पष्ट नहीं कर पाए कि पर मारपीट करने वाला प्रचारक किस छात्र संगठन से जुड़ा था। दिल्ली HC चुनाव नियमों के उल्लंघन पर तत्काल सुनवाई के लिए तैयार इधर, दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 सितंबर को DUSU चुनाव प्रचार के दौरान लिंगदोह समिति की सिफारिशों, एंटी-डिफेसमेंट गाइडलाइन और कोर्ट के निर्देशों के उल्लंघन से जुड़ी याचिका पर तत्काल सुनवाई करने पर सहमति जताई। वकील प्रशांत मनचंदा की याचिका में उम्मीदवारों के साथ तय संख्या से ज्यादा लोगों के प्रचार करने, बाहरी लोगों की मौजूदगी, वाहनों के काफिले, रैलियों, रोड शो, ट्रैफिक बाधित करने और प्रिंटेड पोस्टर-पर्चों के इस्तेमाल के आरोप लगाए गए हैं। सार्वजनिक जगहों पर तोड़फोड़ और पैसे-बाहुबल से जुड़े नियमों के उल्लंघन का भी जिक्र है। याचिका में नियम तोड़ने वाले उम्मीदवारों पर कार्रवाई, जरूरत पड़ने पर अयोग्य ठहराने और अधिकारियों की कथित लापरवाही पर कार्रवाई की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने कहा कि बार-बार उल्लंघन को देखते हुए तुरंत रोकथाम के कदम जरूरी हैं। --------------------------------- यह खबर भी पढ़ें…. दिल्ली हाईकोर्ट बोला- हॉस्टल हादसे के लिए नगर निगम जिम्मेदार, सरकार भी जवाबदेही से नहीं बच सकती; 7 की मौत हुई थी दिल्ली हॉस्टल मामले में आज हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- हादसे के लिए दिल्ली नगर निगम और दिल्ली यूनिवर्सिटी दोनों जिम्मेदार हैं। कोर्ट ने कहा कि बाहर से पढ़ने आने वाले छात्रों के हॉस्टलों की हालत बेहद दयनीय और खराब है। पूरी खबर पढ़ें…
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