डायबिटीज के मरीजों के लिए बड़ी खबर, IIT दिल्ली ने बनाया नया स्प्रे जो घाव भरने में करेगा मदद, टेस्ट में हुआ पास
Spray for Diabetic Wounds: शुगर की बीमारी एक ऐसी बीमारी है, जो अपने साथ-साथ और भी कई परेशानियों का कारण बनती है. जैसे की घाव न भरना. मधुमेह के मरीजों को लंबे समय से यह प्रॉब्लम खूब होती है. IIT दिल्ली के सेंटर ऑप बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा स्प्रे जैसा हाइड्रोजेल निर्मित किया है, जो किसी भी घाव पर सीधा छिड़का जाएगा. इसमें मरीज को मलहम और पट्टी नहीं लगवानी होगी. शोधकर्ताओं ने चूहों पर इसका सफल परीक्षण कर लिया है. अब उन्होंने इस हाइड्रोजेल की तुलना बाजार में उपलब्ध स्प्रे सी की है. उनका कहना है कि इस हाइड्रोजेल स्प्रे से सिर्फ छह दिनों के अंदर घाव भर जाएंगे जबकि बाजार में मिलने वाले स्प्रे थोड़े कमजोर है.
घाव भरेंगे और नई सेल्स भी बनेंगी
इस हाइड्रोजेल से घाव भरने और नई सेल्स बनने की गति तेज हो जाती है. ये स्प्रे नई कोलेजन को जमाता है और ब्लड वैसल्स की कार्यक्षमता को सुधारता है. वहीं, बाजारों में मिलने वाले स्प्रे थोड़े कम असरदार थे. शोधकर्ताओं का दावा है कि हाइड्रोजेल में एक्टिव इंग्रीडिएंट्स है. रिपोर्ट्स में बताया गया कि इसमें IIT के रिसर्चर्स के साथ दिल्ली AIIMS के शोधार्थी भी शामिल हैं. अब एम्स के डॉक्टरों के सहयोग से ह्यूमन ट्रायल्स के जरिए इसकी प्रभावशीलता और सुरक्षा की जांच की जाएगी, जिसके बाद मरीजों में इसके उपयोग का रास्ता साफ हो सकता है.
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शोधकर्ताओं का मानना है कि इस हाइड्रोजेल को एल्जिनेट और फाइब्रिन की मदद से तैयार किया गया है. इस स्प्रे में पॉलीलैक्टिक एसिड के मॉलेक्यूल्स है. इनकी मदद से कैल्शियम, जिंक और तांबे के कण भी स्प्रे में शामिल किए हैं. स्प्रे को घाव पर लगाने के बाद यह धीरे-धीरे फैलता है और असर दिखाता है.
कैल्शियम, जिंक और कॉपर से होगा घाव का इलाज
इस स्प्रे में ये तीनों तत्व मौजूद है, जो अपने-अपने तरीके से घाव भरने में सहायता प्रदान करते हैं. कैल्शियम खून के थक्के बनाने और सेल्स को एक्टिव करते हैं. जिंक इंफेक्शन और सूजन को करता है. वहीं, तांबा यानी कॉपर नई ब्लड वैसल्स के के निर्माण, कोलेजन बनाने में और टिश्यू रिडेवलप करने में मदद करता है. शोधकर्ताओं के अनुसार, हाइड्रोजेल सिर्फ घाव में संक्रमण के जीवाणु को नियंत्रित करने के साथ-साथ सेल्स की सक्रियता को भी बढ़ाता है. ये स्प्रे शरीर की इम्यूनिटी को अपलिफ्ट करता है और कोलेजन प्रोडक्शन भी करता है.
दरअसल, डायबिटीज में ब्लड सर्कुलेशन और सेल्स की मरम्मत प्रभावित होने से घाव लंबे समय तक बने रहते हैं. यह तकनीक भविष्य में मधुमेह के घावों के साथ लंबे समय से न भरने वाले जख्म और जलने के घाव के उपचार में प्रभावी तरीके से काम कर सकता है.
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Disclaimer: यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें.
अयोध्या तक दौड़ेगी नमो भारत रैपिड रेल! लखनऊ-बाराबंकी कॉरिडोर के लिए ₹13.5 करोड़ मंजूर
Lucknow to Ayodhya Namo Bharat: उत्तर प्रदेश में क्षेत्रीय परिवहन व्यवस्था को पंख लगाने की दिशा में केंद्र और राज्य सरकार ने एक बेहद बड़ा फैसला लिया है. प्रदेश की राजधानी लखनऊ और औद्योगिक शहर कानपुर के बीच प्रस्तावित 'नमो भारत' रैपिड रेल परियोजना का दायरा अब धार्मिक नगरी अयोध्या तक बढ़ाया जाएगा. इस महत्वाकांक्षी परियोजना की एलाइनमेंट और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के लिए केंद्र सरकार ने 13.5 करोड़ रुपये के बजट को हरी झंडी दे दी है. इस फैसले के बाद अब लखनऊ, बाराबंकी और अयोध्या के बीच हाई-स्पीड कनेक्टिविटी का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है.
150 किलोमीटर लंबा होगा नया कॉरिडोर
शासन स्तर से मिली जानकारी के मुताबिक प्रस्तावित लखनऊ-बाराबंकी-अयोध्या आरआरटीएस कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 150 किलोमीटर होगी. इस प्रोजेक्ट के प्राथमिक सर्वे, एलाइनमेंट और डीपीआर का काम जल्द से जल्द पूरा करने के लिए शासन ने संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों और विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्षों को पत्र जारी कर पूरा सहयोग करने के निर्देश दिए हैं. पहले चरण में लखनऊ-कानपुर कॉरिडोर के लिए 6.03 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे, जिसके बाद अब अयोध्या विस्तार के लिए अतिरिक्त 13.50 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है.
लखनऊ और अयोध्या के बीच कम समय में होगा सफर
अयोध्या के बढ़ते धार्मिक और पर्यटन महत्व को देखते हुए इस प्रोजेक्ट को सरकार की ओर से विशेष प्राथमिकता दी जा रही है. इस कॉरिडोर के तैयार होने से लखनऊ और रामनगरी अयोध्या के बीच का सफर बेहद कम समय में पूरा हो सकेगा. इससे सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव घटेगा और लाखों यात्रियों को सुरक्षित तथा आरामदायक सफर का बेहतरीन विकल्प मिलेगा.
नौ शहरों के लिए पीपीपी मॉडल पर शुरू होंगी नई एसी स्लीपर बसें
रैपिड रेल नेटवर्क के विस्तार के साथ ही उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने अंतरराज्यीय यात्रा को सुगम बनाने के लिए पहली बार पीपीपी मॉडल पर एसी स्लीपर बसें चलाने का बड़ा ऐलान किया है. सात राज्यों के बीच बस सेवा देने के लिए पहले 15 रूटों पर सहमति बनी थी, लेकिन हाल ही में नौ नए रूट और 24 नई एसी स्लीपर बसें इसमें शामिल की गई हैं. इन नए रूटों में लखनऊ से गया, इंदौर, दिल्ली वाया बरेली और एक्सप्रेसवे के अलावा गोरखपुर से दिल्ली वाया लखनऊ, गाजियाबाद से गोरखपुर वाया लखनऊ और गाजियाबाद से बनारस रूट शामिल हैं. क्षेत्रीय प्रबंधक विमल राजन ने बताया कि निजी ऑपरेटरों के जरिए स्लीपर बसों के संचालन की टेंडर प्रक्रिया जारी है और 25 सितंबर को निविदा खुलते ही संचालन पर अंतिम मुहर लग जाएगी.
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