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Relationship Tips: क्या दांपत्य प्रेम की भी होती है एक्सपायरी डेट? जानिए क्यों बदल जाता है प्यार का अंदाज
Relationship Tips: शादी के पांच साल बाद एक दिन पत्नी ने अचानक पूछा, ‘सुनिए, क्या आपको नहीं लगता कि अब हम पहले जैसे नहीं रहे?’पति मुस्कुरा दिए, बोले, ‘हां, पहले हम रात-रात भर प्यार में पगी बातें करते थे। अब बिजली का बिल और बच्चों की फीस पर चर्चा करते हैं।’ इस बात पर दोनों हंस पड़े।
लेकिन यह हंसी अपने भीतर एक गंभीर प्रश्न भी समेटे हुए थी। क्या सचमुच लंबे समय बाद रिश्तों में ऊब आ जाती है? क्या दांपत्य-प्रेम की भी कोई एक्सपायरी डेट होती है? या फिर इस प्रेम को केवल उसके शुरुआती रूप में पहचानते हैं, बाद में इसके बदलते स्वरूप को दंपती स्वीकार नहीं कर पाते?
जीवन और रिश्ते दोनों परिवर्तनशील हैं
आज के समय में दांपत्य रिश्तों की दूरी का सबसे बड़ा कारण केवल मतभेद नहीं, रिश्तों में बोरियत आना भी एक कारण है। दरअसल, हम प्रेम से पहले इसके प्रति एक उत्साह की अपेक्षा करते हैं, फिर जीवन भर इसी उत्साह को बनाए रखने की उम्मीद भी करते हैं, जबकि जीवन और रिश्ते दोनों ही परिवर्तनशील हैं।
प्रेम का स्वरूप बदलता है, खत्म नहीं होता
हमने फिल्मों और कहानियों में प्रेम का जो चेहरा देखा है, उसमें हर दिन सरप्राइज और रोमांच होता है। लेकिन वास्तविक जीवन में प्रेम का दूसरा रूप भी होता है। वह सुबह की चाय पूछने में है, एक-दूजे की दवा का समय ध्यान रखने में है, आपकी थकान को बिना कहे समझ लेने में है।
दांपत्य रिश्ते में दस वर्ष बाद जो प्रेम होता है, वह पहले वर्ष जैसा नहीं दिखता। उसका तापमान बदल जाता है। वह उन्माद से उतरकर विश्वास-भरोसे में बदल जाता है। समस्या यह नहीं कि प्रेम बदल जाता है। समस्या यह है कि हम उसके बदले स्वरूप को स्वीकार नहीं करते।
हम पार्टनर से नहीं, रूटीन लाइफ से ऊबते हैं
मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि मनुष्य का मस्तिष्क नवीनता को पसंद करता है। यही कारण है कि नई नौकरी, नया शहर और नया रिश्ता हमें आकर्षित करता है। लेकिन कुछ समय बाद हर नई चीज सामान्य-सी लगती है। इसे मनोविज्ञान में ‘हेडोनिक एडॉप्टेशन’ कहते हैं।
यही बात रिश्तों पर भी लागू होती है, जो लाइफ पार्टनर कभी हमें सबसे अधिक रोमांचित करता था, वही कुछ वर्षों बाद हमारे रुटीन लाइफ का हिस्सा बन जाता है। इसका अर्थ प्रेम का समाप्त होना नहीं है, बल्कि हमारे मस्तिष्क का उस सुख का अभ्यस्त हो जाना है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि ऊब हमेशा रिश्ते से नहीं होती, कभी-कभी एकरसता से होती है।
समझें ये पांच संकेत
पांच संकेत, जो बताते हैं कि आपको अपने दांपत्य रिश्ते से नहीं, उसकी दिनचर्या से ऊब हुई है
- आपको अपने साथी से शिकायत कम और जीवन की भाग-दौड़ से अधिक शिकायत रहती है।
- छुट्टियों में आप दोनों साथ अच्छा समय बिताते हैं।
- आप आज भी अपने साथी के दुःख से परेशान हो जाते हैं।
- आप अलग होने की कल्पना से खुश नहीं, बल्कि बेचैन होते हैं।
- आप केवल पहले जैसी ताजगी वापस चाहते हैं।
यदि ऐसा है तो आपके रिश्ते को समाप्त करने की नहीं, उसे पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है।
समझें दांपत्य जीवन की वास्तविकता
सवाल यह है कि क्या शादी के बाद रोमांस खत्म हो जाना स्वाभाविक है? नहीं, लेकिन उसका स्वरूप बदल जाना स्वाभाविक है। शादी के शुरुआती दिनों में प्रेम में समय अधिक और जिम्मेदारियां कम होती हैं। बाद में बच्चों की पढ़ाई, करियर, बुजुर्गों की देखभाल, आर्थिक चुनौतियां और सामाजिक दायित्व जीवन का हिस्सा बन जाते हैं।
ऐसे में प्रेम का प्रदर्शन बदल जाता है। एक समय जो प्रेम गुलाब के फूलों में दिखाई देता था, वही बाद में आपके सिरदर्द के समय चुपचाप चाय बनाकर देने में दिखाई देता है। यदि हम प्रेम को केवल उसके पुराने रूप में तलाशेंगे तो हमें लगेगा कि वह कहीं खो गया है। रिश्ते को बचाने के लिए बड़े बदलाव नहीं, छोटी आदतें काफी हैं।
ऐसे बनाए रखें अपने प्रेम का अहसास
रिश्ते बड़े मौकों से नहीं, छोटे-छोटे पलों से जीवित रहते हैं। दिन में केवल दस मिनट बिना मोबाइल के एक-दूसरे से बात करें। सप्ताह में एक बार साथ टहलने जाएं। महीने में एक बार केवल आप दोनों के लिए समय निकालें। एक-दूसरे की तारीफ करने की आदत मत छोड़ें। पुराने दिनों की तस्वीरें और यादें साझा करें।
कभी-कभी धन्यवाद और माफ कीजिए जैसे शब्द भी बोलें। हम अकसर मान लेते हैं, सामने वाला तो जानता ही है कि हम उससे प्रेम करते हैं, लेकिन प्रेम केवल महसूस नहीं कराया जाता, उसे समय-समय पर व्यक्त भी किया जाता है।
क्या कभी-कभी दूरियां भी जरूरी हैं?
हां, हर समय साथ रहना ही अच्छे रिश्ते की निशानी नहीं है। एक स्वस्थ रिश्ते में दो संपूर्ण व्यक्तियों के लिए व्यक्तिगत स्पेस का होना जरूरी है ताकि वे अपने शौक पूरे कर सकें। अपने मित्रों से मिलें, गपशप करें।
कुछ समय स्वयं के लिए भी रख सकें। जब हम स्वयं के भीतर संतुष्ट होते हैं, तभी हम किसी रिश्ते को भी मजबूत बना पाते हैं। याद रखिए, दो अधूरे लोग मिलकर एक संपूर्ण रिश्ता नहीं बना सकते। दो संपूर्ण लोग मिलकर एक सुंदर-प्यारा रिश्ता बनाते हैं।
प्रेम को दें नए अर्थ
हम प्रेम को अकसर केवल धड़कनों और सरप्राइज तक सीमित कर देते है। जबकि जीवन के अंतिम पड़ाव पर लोग यह याद नहीं रखते कि उन्हें कितने गुलाब मिले थे। उन्हें यह याद रहता है कि कठिन दिनों में उनका हाथ किसने थामा था। शायद प्रेम का सबसे सुंदर रूप वही है, जिसमें शब्द कम और अपनापन अधिक होता है।
यदि आज आपको लगता है कि आपके रिश्ते में पहले जैसी बात नहीं रही, तो कोई निर्णय लेने से पहले एक प्रश्न स्वयं से पूछिए, ‘क्या मैं सचमुच अपने लाइफ पार्टनर से ऊब गई हूं/ गया हूं या फिर मैंने इस रिश्ते को नए ढंग से जीना छोड़ दिया है?’ संभव है कि उत्तर आपको चौंका दे।
बीता हुआ कल फिर से जिएं
एक-दूजे का हाथ थामकर पूछिए कि ऐसा क्या है, जो फिर से नहीं हो सकता। एक रोज बीता हुआ कल फिर से जी लीजिए, यकीनन आपका दिल फिर प्यार से सराबोर हो उठेगा।
पूर्ति खरे
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