PM Modi 76th Birthday: धारा 370 की समाप्ति से लेकर राम मंदिर का निर्माण तक, 12 सालों में पीएम मोदी के 12 ऐतिहासिक फैसले
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के इस खास अवसर पर, उनके नेतृत्व और निर्णायक क्षमता का लेखा-जोखा करना अत्यंत प्रासंगिक हो जाता है। साल 2014 में देश की कमान संभालने से लेकर अब तक के अपने 12 साल से अधिक के सेवा काल में उन्होंने राजनीतिक सीमाओं और चुनौतियों की परवाह किए बिना कई नीतिगत और ऐतिहासिक निर्णय लिए। इन निर्णयों की गूँज न केवल भारत के कोने-कोने में सुनाई दी, बल्कि दुनिया भर के राजनीतिक विश्लेषकों ने भी इनकी सराहना की।
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A का खात्मा
5 अगस्त 2019 को मोदी सरकार ने संसद में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 और 35A को समाप्त कर दिया। इसके साथ ही राज्य को पुनर्गठित कर दो केंद्रशासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित किया गया। इस फैसले ने जम्मू-कश्मीर को भारतीय संविधान के दायरे में लाकर देश के मुख्यधारा के साथ पूरी तरह जोड़ दिया।
नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लागू करना
संसद से पारित नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक प्रताड़ना झेल चुके गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों (हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई) को भारत की नागरिकता देने का मार्ग प्रशस्त किया गया। कड़े राजनीतिक विरोध के बावजूद सरकार ने देशहित में इसे लागू किया।
जीएसटी (GST) के जरिए 'एक राष्ट्र, एक कर' व्यवस्था
1 जुलाई 2017 को भारत में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) लागू किया गया, जो आजादी के बाद का सबसे बड़ा अप्रत्यक्ष कर सुधार माना जाता है। इसने देश भर में लागू दर्जनों अलग-अलग करों को समाप्त कर पूरे भारत को एक एकीकृत और पारदर्शी साझा बाजार में तब्दील कर दिया।
नोटबंदी और डिजिटल भुगतान क्रांति की शुरुआत
8 नवंबर 2016 को 500 और 1000 रुपये के तत्कालीन करेंसी नोटों को चलन से बाहर करने का कड़ा फैसला लिया गया। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य काले धन और नकली नोटों पर लगाम लगाना था। इसी फैसले के बाद देश में डिजिटल पेमेंट, यूपीआई (UPI) और कैशलेस अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व बढ़ावा मिला।
तीन तलाक से मुस्लिम महिलाओं को कानूनी मुक्ति
मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए मोदी सरकार ने एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) की प्रथा को कानूनन गैर-जमानती और दंडनीय अपराध बनाया। 'मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम' पारित कर सदियों पुरानी इस कुप्रथा को समाप्त कर दिया गया।
अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा
दशकों पुराने अयोध्या भूमि विवाद पर सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद सरकार ने पारदर्शी प्रक्रिया के तहत 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र' ट्रस्ट का गठन किया। इसके बाद 22 जनवरी 2024 को भव्य श्री राम मंदिर की ऐतिहासिक प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई, जो सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बनी।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम (33% महिला आरक्षण बिल)
संसद के विशेष सत्र में दशकों से अधर में लटके महिला आरक्षण विधेयक 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को ऐतिहासिक बहुमत से पास कराया गया। इस कानून के तहत देश की लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का वैधानिक प्रावधान किया गया।
भारतीय सेना में 'अग्निपथ योजना' की शुरुआत
सेना की औसत आयु को कम करने और उसे आधुनिक तथा तकनीकी रूप से चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए 2022 में 'अग्निपथ योजना' लागू की गई। इसके तहत युवाओं को चार साल की अवधि के लिए 'अग्निवीर' के रूप में थल सेना, नौसेना और वायुसेना में देश सेवा का अवसर दिया जा रहा है।
जन धन योजना से बैंकिंग तंत्र में सभी की भागीदारी
2014 में सरकार संभालते ही 'प्रधानमंत्री जन धन योजना' शुरू की गई, जिसके तहत देश के 50 करोड़ से अधिक गरीब नागरिकों के बैंक खाते खोले गए। इस कदम ने 'डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर' (DBT) की नींव रखी, जिससे सरकारी योजनाओं की सब्सिडी बिना बिचौलियों के सीधे गरीबों के खातों में पहुँच रही है।
आयुष्मान भारत योजना से स्वास्थ्य सुरक्षा कवच
देश के गरीब और मध्यम वर्ग को गंभीर बीमारियों के इलाज के वित्तीय बोझ से बचाने के लिए दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना 'आयुष्मान भारत' (PM-JAY) शुरू की गई। इसके तहत पात्र परिवारों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक के मुफ्त और कैशलेस इलाज की गारंटी दी गई है।
सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक से सुरक्षा नीति में बदलाव
2016 के उरी हमले के बाद सीमा पार सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 के पुलवामा हमले के बाद बालाकोट एयर स्ट्राइक कर भारत ने दुनिया को संदेश दिया कि वह आतंकवाद के खिलाफ रक्षात्मक रहने के बजाय आक्रामक रुख अपना सकता है। इसने देश की विदेश और रक्षा नीति में एक नया सिद्धांत स्थापित किया।
नए भारतीय न्याय संहिता (अंग्रेजी कानूनों की समाप्ति)
अंग्रेजों के शासनकाल के 150 साल से अधिक पुराने आईपीसी, सीआरपीसी और एविडेंस एक्ट को पूरी तरह निरस्त कर 1 जुलाई 2024 से 'भारतीय न्याय संहिता', 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' और 'भारतीय साक्ष्य अधिनियम' लागू किए गए। इन नए कानूनों का मूल उद्देश्य नागरिकों को दंड देने के बजाय शीघ्र और निष्पक्ष न्याय प्रदान करना है।
Delhi SIR Controversy: दिल्ली एसआईआर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, 33 लाख लोगों को नोटिस मामले पर मंगलवार को होगी सुनवाई
Delhi SIR Controversy: दिल्ली में चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान करीब 33 लाख लोगों को "लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी" और "अनमैप्ड" के कारण नोटिस दिए जा रहे हैं। बता दें कि यह संख्या उन 42 लाख लोगों से अलग है जिनके नाम पहले ही वोटर लिस्ट से हटाए जा चुके हैं। इस मामले को अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है और चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच ने इस मामले पर मंगलवार 22 सितंबर को सुनवाई करने की सहमति जताई है।
जानकारी के मुताबिक, यह पूरा विवाद चुनाव आयोग की उस प्रक्रिया से जुड़ा है जिसमें वोटर लिस्ट को सही करने के लिए लोगों की जांच की जा रही है। दरअसल इस जांच के दौरान लाखों लोगों के नाम के आगे "लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी" यानी तार्किक गड़बड़ी और "अनमैप्ड" जैसे टैग लगा दिए गए हैं।
लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि इन नोटिस को लेकर कोई साफ जानकारी सामने नहीं आई है। याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग इन नोटिस से जुड़े नियमों का पालन नहीं कर रहा है।
#SupremeCourt | Supreme Court hears an urgent mentioning of a fresh writ petition concerning SIR in Delhi.
— Bar and Bench (@barandbench) September 17, 2026
Prashant Bhushan says notices have been issued to 33 lakh more people over "logical discrepancies" and being "unmapped", apart from 47 lakh-plus deletions from the draft… pic.twitter.com/F39VqjjE8h
याचिका में क्या आरोप लगाया गया ?
याचिका में आरोप लगाया गया है कि जिन लोगों को यह नोटिस भेजे गए हैं, उनके नाम चुनाव आयोग की वेबसाइट पर दिखाए ही नहीं गए हैं। इसके अलावा यह भी कहा गया है कि आखिर उनके नाम के आगे किस आधार पर यह गड़बड़ी वाला टैग लगाया गया है? इसका परिणाम यह है कि आम लोगों को यह पता ही नहीं चल पा रहा कि उन्हें नोटिस मिला है या नहीं, और अगर मिला है तो उसकी वजह क्या है?
मंगलवार को होगी सुनवाई
बिना वजह बताए इतने बड़े लेवल पर लोगों के नाम पर सवाल उठाना गंभीर चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि इससे वोटर लिस्ट से नाम कटने का खतरा बढ़ जाता है। इसी मुद्दे को लेकर SIR के दौरान सामने आई "लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी" को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
मामले पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कहा कि इसे दूसरे एसआईआर से जुड़े मामलों के साथ मंगलवार को सुना जाएगा। अब इस मामले पर स्थिति मंगलवार को ही स्पष्ट हो सकेगी, इन नोटिस का कारण क्या है, और आयोग को इसमें क्या नियम मानने होंगे।
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