PM Modi 76: जब पुलिस के सामने से भेष बदलकर निकल जाते थे मोदी, जानिए अंडरग्राउंड रहने की इनसाइड स्टोरी
PM Modi Underground Struggle Story: आज पीएम मोदी 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। दुनिया उन्हें ताकतवर ग्लोबल लीडर मानती है, लेकिन 1975 की इमरजेंसी में गिरफ्तारी से बचने के लिए भेष बदलकर पुलिस की आंखों में धूल झोंकते थे। जानिए अंडरग्राउंड की पूरी कहानी…
Sridevi Property Dispute: श्रीदेवी की 4.7 एकड़ जमीन पर विवाद; बोनी कपूर, जाह्नवी-खुशी को सुप्रीम कोर्ट ने भेजा नोटिस
Sridevi Property Dispute: दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी की चेन्नई स्थित जमीन को लेकर चल रहा कानूनी विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में बोनी कपूर, जाह्नवी कपूर और खुशी कपूर को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने अगली सुनवाई तक जमीन की मौजूदा स्थिति बनाए रखने का आदेश भी दिया है। यह मामला चेन्नई के ईस्ट कोस्ट रोड के पास मौजूद करीब 4.7 एकड़ जमीन से जुड़ा है। एमसी शिवकामी और उनके भाई एमसी नटराजन ने इस जमीन में अपना हिस्सा होने का दावा किया है।
हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती
शिवकामी और नटराजन ने मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उनकी जमीन से जुड़ी याचिका खारिज कर दी गई थी। उनका दावा है कि यह जमीन उनके दादा की थी। उन्होंने श्रीदेवी और उनकी बहन की ओर से जमीन खरीदने के लिए किए गए चार बिक्री दस्तावेजों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि ये दस्तावेज सही नहीं थे और जमीन में उनका भी हिस्सा है।
बोनी कपूर ने क्या कहा?
बोनी कपूर ने इस मामले में पहले निचली अदालत का रुख किया था। उन्होंने याचिका खारिज करने की मांग करते हुए कहा था कि शिकायत करने वालों का दावा कानून के हिसाब से टिकता नहीं है। बोनी की ओर से यह भी कहा गया कि शिकायत करने वालों ने अपने पिता की पहली शादी से जुड़ी जरूरी जानकारी अदालत से छिपाई।
जमीन 1988 में खरीदी गई थी
बोनी कपूर ने 2025 में अदालत में बताया था कि श्रीदेवी ने यह जमीन 1988 में खरीदी थी। उनके मुताबिक, उस समय जमीन एमसी संबंदा मुदलियार की थी। उन्होंने बताया था कि मुदलियार के तीन बेटे और दो बेटियां थीं। साल 1960 में परिवार ने आपसी सहमति से जमीन का बंटवारा कर लिया था। इसके बाद श्रीदेवी ने जमीन से जुड़े कागजों की जांच करने के बाद इसे खरीदा था और खरीद के दस्तावेज भी दर्ज कराए गए थे।
40 साल बाद उठाया गया मामला
मद्रास हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि जमीन से जुड़े बिक्री दस्तावेज 1988 से मौजूद हैं। अदालत के मुताबिक, इतने साल बाद यानी करीब 40 साल बाद इस जमीन को लेकर दावा किया गया। हाईकोर्ट ने यह भी माना था कि शिकायत करने वालों ने कुछ जरूरी जानकारी अदालत से छिपाई थी। इसी आधार पर अदालत ने बोनी कपूर की याचिका स्वीकार करते हुए मूल शिकायत को खारिज कर दिया था।
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