गुरुग्राम हिट एंड रन केस में बड़ा एक्शन, 5 सदस्यीय SIT गठित, पुलिस करेगी क्राइम सीन का रीक्रिएशन
Gurugram Hit and Run Case: गुरुग्राम के पॉश इलाके गोल्फ कोर्स रोड पर हुए सनसनीखेज हिट-एंड-रन मामले में पुलिस ने जांच तेज कर दी है. महिला बाइकर शिवानी ‘सिया’ चौहान को कार से टक्कर मारने के इस चर्चित मामले की तह तक जाने के लिए गुरुग्राम पुलिस ने 5 सदस्यीय विशेष जांच टीम का गठन किया है. इस एसआईटी की कमान महिला अपराध शाखा की एसीपी सुशीला को सौंपी गई है. पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए दो मुख्य आरोपियों, कल्याण बैंसला और लवनीश गुर्जर को गिरफ्तार कर लिया है.
अदालत में पेशी और पुलिस कस्टडी
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें 2 दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया. पेशी के दौरान दोनों आरोपियों के चेहरे ढके हुए थे. पुलिस ने कोर्ट के सामने दलील दी कि हादसे की कड़ियों को जोड़ने के लिए सीन ऑफ क्राइम का रीक्रिएशन करना बेहद जरूरी है. इसके साथ ही वारदात के वक्त गाड़ी में और कौन-कौन लोग मौजूद थे, इसकी भी गहन पूछताछ की जानी है.
Gurugram's Golf Course road hit-and-run case | SIT has been formed to investigate the case. The SIT will investigate under the supervision of an ACP.
— ANI (@ANI) September 16, 2026
बचाव पक्ष के वकील ने किया कस्टडी का विरोध
दूसरी ओर, सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने पुलिस कस्टडी का कड़ा विरोध किया. वकीलों ने पुलिस द्वारा लगाई गई हत्या के प्रयास (धारा 109) पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह धारा मीडिया प्रेशर में लगाई गई है. बचाव पक्ष की दलील थी कि हत्या की कोशिश जैसा गंभीर आरोप साबित करने के लिए कोई ठोस वजह या मकसद (मोटिव) होना चाहिए, जो इस केस में अब तक सामने नहीं आया है. साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि बाइक सवार ने हेलमेट और ऐसे कपड़े पहने थे, जिससे हादसे के वक्त उसकी पहचान पुरुष या महिला के रूप में करना मुमकिन नहीं था.
क्या है पूरा मामला?
आपको बता दें कि गुरुग्राम के गोल्फ कोर्स रोड पर राइडिंग के दौरान बाइक सवार शिवानी सिया चौहान को एक तेज रफ्तार कार ने टक्कर मार दी थी. इस दर्दनाक हादसे के बाद से ही शहर में आक्रोश का माहौल है. पुलिस ने घटना का संज्ञान लेते हुए हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया था, जिसकी जांच अब एसआईटी के हवाले कर दी गई है.
'अपनी शर्तों पर जारी रखेंगे तेल की खरीदारी', US के 100 फीसदी टैरिफ पर भारत ने दिया करारा जवाब
India on US Tariff: अमेरिकी संसद के निचले सदन- हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बुधवार (16 सितंबर) को 'सेंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट' पारित हो गया. इस बिल के पास होने के बाद अमेरिका भारत-चीन समेत दुनिया भर के देशों पर रूस से तेल खरीदने पर उनके सामानों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का रास्ता साफ हो गया है. इसके बाद भारत ने वाशिंगटन को करारा जवाब दिया है.
भारत ने कहा है कि वह अपनी शर्तों पर तेल खरीदेगा और किसी के सामने नहीं झुकेगा. गुरुवार को विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि भारत अपनी 1.4 अरब आबादी की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के हिसाब से अलग-अलग स्रोतों से तेल और गैस की खरीद जारी रखेगा. बता दें कि 16 सितंबर 2026 को पारित अमेरिकी विधेयक में रूस से ऊर्जा आयात करने वाले मुल्कों पर कड़े अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान है, जिसका सीधा असर भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है.
भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध
विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि केंद्र सरकार ने अमेरिकी कांग्रेस में रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून (Sanctioning Russia and Iran Act) के पारित होने का संज्ञान लिया है और वह इस मामले में आगे की गतिविधियों पर नजर रखे हुए है. जैसा कि पहले भी कई बार कहा जा चुका है, भारत अपनी 1.4 अरब आबादी के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा प्राप्त करके और बाज़ार की बदलती स्थितियों के आधार पर ऐसा करना जारी रखेगा.
Our statement on passage of the Sanctioning Russia and Iran Act in the US Congress
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) September 17, 2026
???? https://t.co/kD0Yg9sWbU pic.twitter.com/rSc21AqwEh
रूप पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून पर क्या बोला विदेश मंत्रालय?
वहीं रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून पर विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि सरकार इसके असर से निपटने के लिए भारतीय व्यापार और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर काम करेगी. भारत का ये बयान US हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में उस बिल के पास होने के बाद आया है राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस पर प्रतिबंध लगाने और भारत और चीन समेत तेल और गैस के क्षेत्र में उसके व्यापारिक साझेदारों पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार देगा. 'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' नाम का यह बिल पिछले महीने अमेरिकी सीनेट ने पास किया था. बुधवार शाम को हाउस ने 262-159 वोटों से इसे मंजूरी दी और अब यह बिल ट्रंप के पास कानून बनने के लिए जाएगा.
रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून के पक्ष में किसने दिया वोट?
रूप पर प्रतिबंध लगाने वाले बिल के पक्ष में 203 रिपब्लिकन के अलावा, 58 डेमोक्रेट और एक निर्दलीय सदस्य ने भी वोट किया. वहीं रिपब्लिकन के 7 और डेमोक्रेट के 152 सदस्यों ने इसका विरोध किया. बता दें कि डेमोक्रेट्स का विरोध मुख्य रूप से ट्रंप को दिए गए टैरिफ अधिकारों को लेकर था. इस नए बिल का नाम साउथ कैरोलिना के रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है, जिनका जुलाई में निधन हो गया था. उन्होंने इस बिल के लिए समर्थन जुटाने में एक साल से ज्यादा का समय दिया था.
बिल पर बहस के दौरान डेमोक्रेट कांग्रेसमैन रिचर्ड नील ने कहा, "हम इस राष्ट्रपति को और ज्यादा टैरिफ अधिकार देने के पक्ष में नहीं हैं." नया बिल न केवल रूस के नेतृत्व और ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश करता है, बल्कि उन जहाजों के "शैडो फ्लीट" (गुप्त बेड़े) पर भी प्रतिबंध लगाने की ताकत रखता है जो मॉस्को को तेल की डिलीवरी पर लगे प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं.
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नए बिल से ट्रंप को मिल जाएगा भारत-चीन पर टैरिफ लगाने का अधिकार?
बता दें कि इस नए बिल में ट्रंप को चीन, भारत और दूसरे देशों पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार देने की भी बात है, ताकि रूसी तेल और गैस पर उनकी निर्भरता कम हो सके. साथ ही, इसमें ईरान पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का भी प्रावधान है. बिल पास होने के बाद डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लुमेंथल ने पत्रकारों से कहा, "चीन और भारत, बेहतर होगा कि आप अपना तेल और गैस कहीं और से खरीदें."
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