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सुबह उठते ही अकड़ जाती है कमर? इन वजहों से हो सकती है परेशानी, ऐसे पाएं राहत

नई दिल्ली, 17 सितंबर (आईएएनएस)। सुबह बिस्तर से उठते ही अगर कमर सीधी करने में परेशानी हो या फिर झुकने पर खिंचाव महसूस हो, तो इसे सिर्फ थकान समझकर नजरअंदाज न करें। कमर का अकड़ना एक आम समस्या है, जो कई बार गलत तरीके से सोने, लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने या ज्यादा मेहनत करने के बाद हो सकती है। हालांकि, अगर यह समस्या बार-बार हो रही है या लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसके पीछे मांसपेशियों के अलावा रीढ़ से जुड़ी कोई परेशानी भी हो सकती है।

कमर अकड़ने की सबसे आम वजहों में लंबे समय तक बैठे रहना शामिल है। आजकल दफ्तर में लगातार कई घंटे कुर्सी पर बैठना या घर पर लंबे समय तक मोबाइल चलाना कमर की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ा सकता है। जब शरीर लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहता है, तो कमर और कूल्हों के आसपास की मांसपेशियां ठीक तरह से काम नहीं कर पातीं। इससे उठते समय अकड़न और खिंचाव महसूस हो सकता है।

गलत तरीके से बैठना भी इस परेशानी को बढ़ा सकता है। कुर्सी पर बैठते समय लगातार आगे की ओर झुकना, कमर को सहारा न देना या मोबाइल को नीचे रखकर लंबे समय तक देखना शरीर की सामान्य बनावट पर असर डालता है। इसी तरह बहुत देर तक खड़े रहना या अचानक भारी सामान उठाना भी कमर की मांसपेशियों में खिंचाव पैदा करता है। ऐसी स्थिति में अकड़न के साथ दर्द भी हो सकता है।

सोने का तरीका भी कमर की अकड़न से जुड़ा हो सकता है। अगर रातभर शरीर ऐसी स्थिति में रहा, जिसमें कमर और उसके आसपास की मांसपेशियों पर ज्यादा दबाव पड़ा, तो सुबह उठने पर अकड़न महसूस होती है। कई बार कम चलना-फिरना भी इसका कारण बनता है। जब शरीर की मांसपेशियां नियमित रूप से काम नहीं करतीं, तो इससे शरीर का लचीलापन और ताकत प्रभावित होते है। इसलिए दिनभर बैठे रहने वाले लोगों को हल्की गतिविधि और नियमित कसरत को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए।

कमर अकड़ने पर थोड़ी राहत के लिए हल्की गर्म सिकाई की जा सकती है। गर्माहट से मांसपेशियों को आराम मिलता है। इसके साथ ही लंबे समय तक बिस्तर पर पड़े रहने के बजाय अपनी क्षमता के अनुसार हल्का चलना-फिरना बनाए रखना बेहतर होता है। बहुत हल्के खिंचाव वाले व्यायाम भी मदद करते हैं, लेकिन अगर किसी गतिविधि से दर्द बढ़ता है तो उसे जबरदस्ती नहीं करना चाहिए।

बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि लंबे समय तक लगातार न बैठें। बीच-बीच में उठकर कुछ कदम चलें और बैठते समय कमर को सहारा दें। रोजाना हल्की कसरत, टहलना और शरीर की क्षमता के अनुसार मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम करें, ये कमर को मजबूत रखने में मदद करते हैं।

हर बार कमर की अकड़न सामान्य नहीं होती। अगर दर्द बहुत ज्यादा है, बार-बार लौट रहा है या कई हफ्तों तक बना रहता है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

--आईएएनएस

पीके/पीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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झारखंड की आम्रपाली कोल माइंस में सुरक्षा-निगरानी होगी मजबूत, 200 CISF जवान संभालेंगे मोर्चा

Jharkhand Coal Mines: झारखंड के चतरा जिले में स्थित आम्रपाली ओपेन कास्ट कोल माइंस की सुरक्षा व्यवस्था को अब और मजबूत किया जा रहा है. नॉर्थ कर्णपुरा कोलफील्ड की इस प्रमुख खदान की सुरक्षा 18 सितंबर से केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के हवाले की जाएगी. शुरुआत में यहां 200 CISF जवानों की तैनाती की गई है. आने वाले समय में जवानों की संख्या बढ़ाने की भी तैयारी है.

आम्रपाली प्रोजेक्ट झारखंड की प्रमुख कोयला खदानों में शामिल है. यहां रोजाना करीब 70 हजार टन कोयले का उत्पादन होता है. खदान की सुरक्षा मजबूत होने से कोयले की निगरानी, परिवहन व्यवस्था और उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है.

18 सितंबर से शुरू होगी नई सुरक्षा व्यवस्था

CISF के डीजी के झारखंड दौरे के दौरान आम्रपाली प्रोजेक्ट में नई सुरक्षा व्यवस्था की शुरुआत की जाएगी. बताया गया है कि वह 17 सितंबर को झारखंड पहुंचेंगे और 18 सितंबर को रांची से इस व्यवस्था की शुरुआत करेंगे. आम्रपाली प्रोजेक्ट में फिलहाल 200 CISF जवानों को तैनात किया गया है. जरूरत के अनुसार आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ाई जा सकती है. सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए DIG स्तर के एक विशेष पद की भी व्यवस्था की गई है. इससे खदान के अलग-अलग हिस्सों में सुरक्षा और निगरानी को एक बेहतर कमांड सिस्टम के तहत संचालित करने में मदद मिलेगी.

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कोयला चोरी रोकने पर खास फोकस

आम्रपाली में CISF की तैनाती का एक अहम उद्देश्य कोयले की चोरी और अवैध कारोबार पर रोक लगाना है. केंद्र सरकार ने झारखंड में कोयला चोरी को लेकर चिंता जताई थी और इसे रोकने के लिए ‘जीरो कोल लीकेज’ अभियान पर जोर दिया गया है. इस अभियान के तहत खदानों की सुरक्षा और कोयले के परिवहन की पूरी प्रक्रिया पर पहले से ज्यादा निगरानी की जा रही है. CISF के साथ राज्य पुलिस और कोयला कंपनी भी मिलकर काम कर रही हैं. एक आंतरिक रिपोर्ट में चतरा और हजारीबाग की मगध और आम्रपाली खदानों से हर साल बड़े स्तर पर कोयले की चोरी का अनुमान जताया गया था. अब नई सुरक्षा व्यवस्था के जरिए इस तरह की गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने की कोशिश की जा रही है.

तकनीक से होगी हर ट्रक की निगरानी

‘जीरो कोल लीकेज’ अभियान में सुरक्षा के साथ-साथ तकनीक का भी बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जा रहा है. खदानों और कोयले के परिवहन की निगरानी के लिए ड्रोन, GPS और वेजब्रिज जैसी तकनीकों को व्यवस्था से जोड़ा गया है. ड्रोन पेट्रोलिंग के जरिए खदान और आसपास के क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है. वहीं GPS ट्रैकिंग से कोयला ले जाने वाले ट्रकों और डंपरों की आवाजाही पर नजर रखी जा रही है. वेजब्रिज की मदद से ट्रकों में लदे कोयले का वजन दर्ज किया जा रहा है. इससे यह पता लगाने में मदद मिलती है कि खदान से कितना कोयला निकला और कितना कोयला निर्धारित स्थान तक पहुंचा.

संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत अलर्ट

नई व्यवस्था में किसी भी संदिग्ध या अवैध गतिविधि की जानकारी मिलने पर तुरंत अलर्ट जारी करने की व्यवस्था भी तैयार की गई है. अभियान से जुड़ी अलग-अलग निगरानी प्रणालियों को इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम से जोड़ा जा रहा है. इससे अधिकारियों को अलग-अलग जगहों से मिलने वाली जानकारी एक साथ देखने और जरूरत पड़ने पर तेजी से कार्रवाई करने में मदद मिलेगी. बताया गया है कि ‘जीरो कोल लीकेज’ अभियान के तहत पिछले दो महीनों में छह करोड़ रुपये से अधिक का अवैध कोयला जब्त किया गया है. यह कार्रवाई अभियान के तहत निगरानी बढ़ाए जाने का संकेत है.

सुरक्षा मजबूत होने से बढ़ेगी व्यवस्था की पारदर्शिता

आम्रपाली में CISF की तैनाती और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से खदान की सुरक्षा व्यवस्था को नया आधार मिलने की उम्मीद है. 200 जवानों की तैनाती, ड्रोन निगरानी, GPS ट्रैकिंग और डिजिटल मॉनिटरिंग के जरिए कोयले की चोरी रोकने और परिवहन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दिया जा रहा है. 

नई व्यवस्था का सबसे बड़ा लक्ष्य यही है कि खदान से निकलने वाला कोयला सुरक्षित तरीके से निर्धारित स्थान तक पहुंचे और अवैध गतिविधियों पर समय रहते कार्रवाई हो. इससे खनन क्षेत्र में अनुशासन और निगरानी मजबूत होने के साथ राज्य और कोयला उद्योग को भी आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है.

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