Hath Mein Car Vahan Ki Rekha: मेरे पास अपनी कार होगी या नहीं? हाथ की इस रेखा से जान सकते हैं वाहन सुख मिलेगा या नहीं
Hath Mein Car Vahan Ki Rekha: हाथ की रेखाएं बताती हैं कि आपके पास अपनी कार होगी या नहीं. आपको जीवन में वाहन सुख प्राप्त होगा या नहीं? हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों के हाथ में स्पष्ट और साफ भाग्य रेखा या शनि रेखा होती है, जो शनि पर्वत तक जाती है, उन लोगों को वाहन सुख मिलता है. ऐसे ही बुध, शुक्र की रेखाओं की वजह से भी लोगों को कार या वाहन का सुख होता है.
Vishwakarma Puja 2026: विश्वकर्मा पूजा आज, 7:58 से 12:40 बजे तक शुभ मुहूर्त; जानें पूजा विधि
Vishwakarma Puja 2026: भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का शिल्पकार और यंत्रों का देवता माना जाता है। हर साल कन्या संक्रांति के अवसर पर विश्वकर्मा पूजा मनाने की परंपरा है। इस साल 17 सितंबर, गुरुवार को विश्वकर्मा पूजा की जा रही है।
विश्वकर्मा पूजा के दिन कारखानों, दुकानों, वर्कशॉप और अन्य कार्यस्थलों पर मशीनों, औजारों और उपकरणों की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने से कार्यस्थल पर सुख-समृद्धि बनी रहती है।
विश्वकर्मा पूजा 2026 का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, विश्वकर्मा पूजा के लिए सुबह 7:58 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक का समय शुभ बताया गया है। इस अवधि में कारखाने, दुकान या कार्यस्थल पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जा सकती है।
वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक रहेगा। धार्मिक परंपरा में अभिजीत मुहूर्त को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। अलग-अलग पंचांगों में मुहूर्त में थोड़ा अंतर संभव है, इसलिए स्थानीय पंचांग को भी देखा जा सकता है।
विश्वकर्मा पूजा की आसान विधि
पूजा से पहले स्नान करके अपने कार्यस्थल, दुकान या कारखाने की अच्छी तरह साफ-सफाई करें। इसके बाद एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान विश्वकर्मा और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
प्रतिमा स्थापित करने के बाद दोनों देवताओं को प्रणाम करें। इसके बाद अक्षत, रोली, चंदन, फूल और माला अर्पित करें। पूजा के दौरान श्रद्धा के साथ भगवान विश्वकर्मा का स्मरण करें।
मशीनों और औजारों की भी करें पूजा
विश्वकर्मा पूजा में मशीनों, औजारों, वाहनों और दूसरे उपकरणों का पूजन भी किया जाता है। सभी मशीनों और औजारों को पहले साफ कर लें। इसके बाद उन पर रोली और चंदन से तिलक लगाएं।
धार्मिक परंपरा के अनुसार, इस दिन यंत्रों का पूजन कर उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है। कई जगहों पर विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर मशीनों और औजारों को काम में नहीं लेने की भी परंपरा है।
कथा और आरती के बाद लगाएं भोग
पूजा के दौरान धूप और दीप जलाएं। इसके बाद भगवान विश्वकर्मा की कथा का पाठ करें और आरती करें। पूजा पूरी होने के बाद भगवान को फल और मिठाई का भोग लगाया जाता है।
इसके बाद प्रसाद को कार्यस्थल पर मौजूद सभी लोगों में बांटें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस तरह पूजा करने से भगवान विश्वकर्मा का आशीर्वाद प्राप्त होता है और कार्यस्थल पर सुख-शांति बनी रहती है।
क्यों मनाई जाती है विश्वकर्मा पूजा?
धार्मिक मान्यता में भगवान विश्वकर्मा को शिल्प, निर्माण और विभिन्न प्रकार के यंत्रों का देवता माना गया है। इसी वजह से विश्वकर्मा पूजा के दिन मशीनों, औजारों और निर्माण कार्य से जुड़े उपकरणों की विशेष रूप से पूजा की जाती है।
हालांकि, पूजा से कारोबार में निश्चित रूप से धन या सफलता मिलने जैसे दावों को धार्मिक मान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए। व्यापार और रोजगार में प्रगति के लिए मेहनत, बेहतर प्रबंधन, गुणवत्ता और काम के प्रति निरंतरता भी महत्वपूर्ण होती है।
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