Vishwakarma Puja 2026: विश्वकर्मा पूजा आज, 7:58 से 12:40 बजे तक शुभ मुहूर्त; जानें पूजा विधि
Vishwakarma Puja 2026: भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का शिल्पकार और यंत्रों का देवता माना जाता है। हर साल कन्या संक्रांति के अवसर पर विश्वकर्मा पूजा मनाने की परंपरा है। इस साल 17 सितंबर, गुरुवार को विश्वकर्मा पूजा की जा रही है।
विश्वकर्मा पूजा के दिन कारखानों, दुकानों, वर्कशॉप और अन्य कार्यस्थलों पर मशीनों, औजारों और उपकरणों की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने से कार्यस्थल पर सुख-समृद्धि बनी रहती है।
विश्वकर्मा पूजा 2026 का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, विश्वकर्मा पूजा के लिए सुबह 7:58 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक का समय शुभ बताया गया है। इस अवधि में कारखाने, दुकान या कार्यस्थल पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जा सकती है।
वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक रहेगा। धार्मिक परंपरा में अभिजीत मुहूर्त को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। अलग-अलग पंचांगों में मुहूर्त में थोड़ा अंतर संभव है, इसलिए स्थानीय पंचांग को भी देखा जा सकता है।
विश्वकर्मा पूजा की आसान विधि
पूजा से पहले स्नान करके अपने कार्यस्थल, दुकान या कारखाने की अच्छी तरह साफ-सफाई करें। इसके बाद एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान विश्वकर्मा और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
प्रतिमा स्थापित करने के बाद दोनों देवताओं को प्रणाम करें। इसके बाद अक्षत, रोली, चंदन, फूल और माला अर्पित करें। पूजा के दौरान श्रद्धा के साथ भगवान विश्वकर्मा का स्मरण करें।
मशीनों और औजारों की भी करें पूजा
विश्वकर्मा पूजा में मशीनों, औजारों, वाहनों और दूसरे उपकरणों का पूजन भी किया जाता है। सभी मशीनों और औजारों को पहले साफ कर लें। इसके बाद उन पर रोली और चंदन से तिलक लगाएं।
धार्मिक परंपरा के अनुसार, इस दिन यंत्रों का पूजन कर उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है। कई जगहों पर विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर मशीनों और औजारों को काम में नहीं लेने की भी परंपरा है।
कथा और आरती के बाद लगाएं भोग
पूजा के दौरान धूप और दीप जलाएं। इसके बाद भगवान विश्वकर्मा की कथा का पाठ करें और आरती करें। पूजा पूरी होने के बाद भगवान को फल और मिठाई का भोग लगाया जाता है।
इसके बाद प्रसाद को कार्यस्थल पर मौजूद सभी लोगों में बांटें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस तरह पूजा करने से भगवान विश्वकर्मा का आशीर्वाद प्राप्त होता है और कार्यस्थल पर सुख-शांति बनी रहती है।
क्यों मनाई जाती है विश्वकर्मा पूजा?
धार्मिक मान्यता में भगवान विश्वकर्मा को शिल्प, निर्माण और विभिन्न प्रकार के यंत्रों का देवता माना गया है। इसी वजह से विश्वकर्मा पूजा के दिन मशीनों, औजारों और निर्माण कार्य से जुड़े उपकरणों की विशेष रूप से पूजा की जाती है।
हालांकि, पूजा से कारोबार में निश्चित रूप से धन या सफलता मिलने जैसे दावों को धार्मिक मान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए। व्यापार और रोजगार में प्रगति के लिए मेहनत, बेहतर प्रबंधन, गुणवत्ता और काम के प्रति निरंतरता भी महत्वपूर्ण होती है।
Vishwakarma Puja 2026: दुकान-मशीनों की पूजा करते समय न भूलें ये काम, जानें पूजा की पूरी विधि
Vishwakarma Puja 2026: भगवान विश्वकर्मा को शिल्प, निर्माण और यंत्रों का देवता माना जाता है। हर साल कन्या संक्रांति के अवसर पर विश्वकर्मा पूजा की परंपरा है। साल 2026 में 17 सितंबर, गुरुवार को विश्वकर्मा पूजा मनाई जा रही है। इस दिन दुकानों, कारखानों, वर्कशॉप और अन्य कार्यस्थलों पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना की जाती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, विश्वकर्मा पूजा के दिन कार्यस्थल की साफ-सफाई और यंत्रों का विधि-विधान से पूजन करना शुभ माना जाता है। कई कारोबारी इस दिन अपने व्यापार और कामकाज में सुख-समृद्धि की कामना के साथ पूजा करते हैं।
सबसे पहले दुकान और कार्यस्थल की करें सफाई
विश्वकर्मा पूजा के दिन सबसे पहले दुकान, कारखाने या कार्यस्थल की अच्छी तरह सफाई करने की परंपरा है। इसके बाद पूजा के लिए एक लकड़ी की चौकी रखें और उस पर लाल कपड़ा बिछाएं।
चौकी पर भगवान विश्वकर्मा के साथ भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जा सकती है। इसके बाद दोनों देवताओं को अक्षत, रोली, चंदन, फूल और माला अर्पित करें। धार्मिक मान्यता में भगवान गणेश को शुभ कार्यों का आरंभ करने वाला माना जाता है, जबकि भगवान विश्वकर्मा की पूजा यंत्रों और शिल्प से जुड़े कार्यों के लिए की जाती है।
मशीनों और औजारों का करें पूजन
विश्वकर्मा पूजा में मशीनों, औजारों, उपकरणों और वाहनों की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। दुकान या कार्यस्थल पर इस्तेमाल होने वाले सभी प्रमुख यंत्रों को साफ करके उन पर रोली और चंदन से तिलक लगाया जाता है।
इसके बाद मशीनों और औजारों पर कलावा या रक्षा सूत्र बांधने की भी परंपरा है। इस दिन कई जगहों पर मशीनों और उपकरणों का इस्तेमाल नहीं किया जाता और उन्हें आराम दिया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यंत्रों का पूजन उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का एक तरीका है।
धूप-दीप जलाकर करें कथा और आरती
पूजा की तैयारियां पूरी होने के बाद भगवान विश्वकर्मा के सामने धूप और दीप जलाएं। इसके बाद श्रद्धा के साथ विश्वकर्मा भगवान की कथा का पाठ किया जाता है।
कथा के बाद भगवान की आरती करें और फल-मिठाई का भोग लगाएं। प्रसाद में बूंदी या बूंदी के लड्डू चढ़ाने की भी परंपरा कई स्थानों पर देखने को मिलती है। पूजा पूरी होने के बाद प्रसाद को दुकान या कार्यस्थल पर मौजूद लोगों में बांटा जाता है।
कारोबार की तरक्की के लिए क्या करें?
विश्वकर्मा पूजा का मुख्य उद्देश्य भगवान विश्वकर्मा की पूजा के साथ अपने काम, औजारों और कार्यस्थल के प्रति सम्मान व्यक्त करना माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने से कार्यस्थल पर सकारात्मक माहौल बना रहता है और भगवान विश्वकर्मा का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
हालांकि, कारोबार में सफलता केवल धार्मिक अनुष्ठानों पर निर्भर नहीं होती। बेहतर प्रबंधन, मेहनत, गुणवत्ता और ग्राहकों के साथ अच्छा व्यवहार भी व्यापार की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विश्वकर्मा पूजा पर इन बातों का रखें ध्यान
विश्वकर्मा पूजा के दिन कार्यस्थल को साफ रखना, मशीनों और औजारों की सफाई करना, पूजा के दौरान सावधानी बरतना और इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों को व्यवस्थित रखना उपयोगी माना जाता है।
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