PM Modi Birthday Special: वडनगर में जन्में, वाराणसी को बनाया कर्मभूमि, 30 साल बाद देश में बनाई पूर्ण बहुमत वाली सरकार; जानें PM मोदी का सफर
PM Modi Birthday Special: गुजरात के वडनगर से शुरू हुआ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर देश की राजनीति का सबसे चर्चित सफर रहा है. एक छोटे शहर से निकलकर गुजरात की राजनीति में अपनी पहचान बनाई और फिर देश की राजधानी दिल्ली में देश की कमान संभालकर दुनिया भर में अपना नाम बनाया. नरेंद्र मोदी ने दिल्ली पहुंचने के लिए काशी विश्वनाथ की नगरी वाराणसी को अपनी कर्मभूमि के रूप में चुना. पीएम मोदी के इसी सफर को ध्यान में रखकर दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भाजपा वाराणसी से वडनगर तक सेवा यात्रा की शुरुआत करने वाली है.
वडनगर से शुरू हुआ सफर
17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में जन्में नरेंद्र मोदी का बचपन इसी शहर में बीता. वडनगर से उनका जुड़ाव सिर्फ जन्मस्थान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़ने के दौरान भी यह शहर उनके जीवन और राजनीतिक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ने के बाद मोदी ने संगठन के स्तर पर काम किया. धीरे-धीरे उनकी संगठनात्मक भूमिका बढ़ती गई और गुजरात की राजनीति में उनका प्रभाव मजबूत हुआ. भाजपा में संगठन के लिए काम करते हुए उन्होंने कई जिम्मेदारियां संभालीं. यही अनुभव आगे चलकर उनके राजनीतिक सफर का आधार बना.
गुजरात की कमान और मुख्यमंत्री पद
साल 2001 में नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने. इसके बाद उन्होंने राज्य की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई. पार्टी ने उनके नेतृत्व में गुजरात में लगातार कई विधानसभा चुनाव जीते और राज्य सरकार के शीर्ष पद तक पहुंचे. मुख्यमंत्री के तौर पर उनका कार्यकाल विकास, औद्योगिक निवेश, बुनियादी ढांचे और प्रशासन जैसे मुद्दों के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी केंद्र रहा. गुजरात में लंबे समय तक सत्ता में रहने के बाद मोदी की राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका लगातार बढ़ती गई.
गुजरात से दिल्ली तक का रुख
2013 में भाजपा ने नरेंद्र मोदी को पार्टी का प्रधानमंत्री पद का चेहरा चुना. इसके बाद 2014 का लोकसभा चुनाव उनके राष्ट्रीय राजनीतिक सफर का बड़ा पड़ाव बना. भाजपा ने वर्षों बाद बहुमत हासिल किया और 26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाई. प्रधानमंत्री बनने के बाद भी गुजरात और वडनगर से उनका संबंध बना रहा, लेकिन राष्ट्रीय राजनीति में उनकी मुख्य राजनीतिक पहचान अब दिल्ली से जुड़ गई.
वाराणसी को बनाया राजनीतिक कर्मभूमि
नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय सफर में वाराणसी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही. 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने उत्तर प्रदेश की वाराणसी सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया. उनके वाराणसी से चुनाव लड़ने को भाजपा ने राष्ट्रीय राजनीति में पूर्वांचल और उत्तर प्रदेश के महत्व से भी जोड़ा. 2014 के चुनाव में मोदी ने वाराणसी सीट से जीत हासिल की. इसके बाद 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने वाराणसी से चुनाव जीता. इस तरह वाराणसी उनकी लगातार तीन लोकसभा जीतों का आधार बना.
वाराणसी में प्रधानमंत्री के तौर पर भी उन्होंने कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया. काशी विश्वनाथ धाम, सड़क और परिवहन से जुड़ी परियोजनाएं, रेलवे और एयरपोर्ट से संबंधित विकास कार्य तथा धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने वाले प्रयास उनके वाराणसी दौरे के प्रमुख हिस्से रहे हैं.
‘सेवा यात्रा’ में दिखेगा जन्मभूमि से कर्मभूमि तक का सफर
भाजपा की प्रस्तावित ‘सेवा यात्रा’ को नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के अलग-अलग पड़ावों को जोड़ने की थीम के रूप में देखा जा रहा है. इसमें वडनगर को जन्मभूमि और वाराणसी को लोकसभा की राजनीतिक यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव के तौर पर प्रस्तुत किया जाएगा.
इस यात्रा की थीम में वडनगर से गुजरात की कमान संभालने, फिर दिल्ली का रुख करने और वाराणसी से सांसद बनने तक के सफर को शामिल किया जा सकता है. कार्यक्रम के जरिए मोदी के राजनीतिक जीवन में गुजरात और वाराणसी के योगदान को सामने रखने की तैयारी है.
नक्शे पर दिखाया जा सकता है पूरा सफर
इस पूरी कहानी को एक मैप के जरिए भी समझाया जा सकता है. वडनगर → गुजरात → दिल्ली → वाराणसी का रूट नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर के प्रमुख पड़ावों को एक साथ दिखा सकता है. वडनगर उनकी जन्मभूमि, गुजरात मुख्यमंत्री के रूप में उनकी राजनीतिक पहचान का प्रमुख केंद्र, दिल्ली प्रधानमंत्री के रूप में राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र और वाराणसी लोकसभा की उनकी राजनीतिक कर्मभूमि के तौर पर सामने आता है.
इस सफर में चुनावी जीत भी अहम कड़ी रही है. वाराणसी की जनता ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी को अपना सांसद चुना. इस तरह वडनगर से शुरू हुआ सफर वाराणसी तक पहुंचकर राष्ट्रीय राजनीति में एक लंबे राजनीतिक जुड़ाव में बदल गया.
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