US Russia Sanctions Bill: रूसी तेल खरीद पर 100% टैरिफ के अमेरिकी कानून पर भारत ने दिया जवाब, कहा- कई मोर्चों पर होगा हिसाब
अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक संबंधों को लेकर एक बार फिर टैरिफ का मुद्दा सामने आया है। अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस और ईरान से जुड़े प्रतिबंधों वाला Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 पास कर दिया है। इस कानून में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान है।
बिल बुधवार को 262-159 वोट से पास हुआ। इससे अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से ऊर्जा खरीद जारी रखने वाले बड़े खरीदार देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का कानूनी रास्ता मिल सकता है। भारत और चीन जैसे बड़े रूसी तेल खरीदार इस प्रावधान के दायरे में आ सकते हैं।
भारत पर 100% टैरिफ तुरंत नहीं लगेगा
इस घटनाक्रम के बाद भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लगाए जाने की चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, मौजूदा स्थिति में यह कहना सही नहीं होगा कि भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लागू हो गया है। अमेरिकी कानून राष्ट्रपति को 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है, लेकिन वास्तविक टैरिफ कितना लगाया जाएगा और कब लगाया जाएगा, यह आगे के फैसलों पर निर्भर करेगा। बिल फिलहाल राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की प्रक्रिया में है।
भारत सरकार ने क्या कहा?
अमेरिकी बिल पर भारत के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को प्रतिक्रिया दी। मंत्रालय ने कहा कि भारत ने अमेरिकी कांग्रेस में रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून के पारित होने का संज्ञान लिया है और आगे होने वाले घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है।
विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है और अपनी जरूरतों के लिए ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण जारी रखेगा। भारत ने अमेरिकी पक्ष के साथ इस कदम के द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर संभावित प्रभावों को लेकर भी बात की है।
रूस से तेल खरीद बना बड़ा मुद्दा
रूस से मिलने वाला कच्चा तेल भारत के लिए इस पूरे विवाद का अहम हिस्सा है। अमेरिकी कानून का उद्देश्य रूस के ऊर्जा राजस्व पर दबाव बढ़ाना और ऐसे देशों पर आर्थिक दबाव डालना है जो रूसी ऊर्जा खरीद जारी रखते हैं। भारत ने अपनी ओर से ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों को प्राथमिकता देने की बात कही है।
ऐसे में आगे अमेरिका की ओर से इस कानून के तहत क्या कदम उठाया जाता है, इस पर भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार की भी नजर रहेगी।
PM Modi के 25 साल: 2013-14 से 2025-26 तक कैसे बदली भारत की अर्थव्यवस्था? अमित चिमनानी ने बताए 30 बड़े आंकड़े
रायपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के तौर पर जनसेवा के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर भारत की आर्थिक यात्रा से जुड़े आंकड़े सामने रखे गए हैं। वरिष्ठ सीए एवं आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ अमित चिमनानी ने वर्ष 2013-14 और 2025-26 की तुलना करते हुए अर्थव्यवस्था के 30 प्रमुख मापदंडों के आंकड़े पेश किए हैं। इनमें टैक्स कलेक्शन, GST, बजट, निर्यात, विदेशी मुद्रा भंडार, FDI, DBT, स्टार्टअप, मुद्रा योजना, मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, रेलवे, रक्षा और रोजगार जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
चिमनानी के प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर विस्तार हुआ है। उदाहरण के तौर पर नेट इनकम टैक्स कलेक्शन ₹6.38 लाख करोड़ से बढ़कर ₹23.40 लाख करोड़, बजट ₹16.65 लाख करोड़ से बढ़कर ₹50.65 लाख करोड़ और मोबाइल फैक्ट्रियों की संख्या 2 से बढ़कर 300 बताई गई है।
2013-14 से 2025-26 तक भारत की आर्थिक तस्वीर
अमित चिमनानी द्वारा प्रस्तुत 30 आंकड़ों में टैक्स, बजट, एक्सपोर्ट, विदेशी मुद्रा भंडार, डिजिटल लेनदेन, स्टार्टअप, रोजगार और मैन्युफैक्चरिंग समेत अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों की तुलना की गई है।
टैक्स, स्टार्टअप और मैन्युफैक्चरिंग में बड़ा बदलाव
प्रस्तुत आंकड़ों में टैक्स कलेक्शन, स्टार्टअप और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े आंकड़े खास तौर पर सामने आते हैं। DPIIT के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 31 मार्च 2026 तक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या 2.23 लाख से अधिक हो चुकी थी।
इसी तरह PM MUDRA Yojana के तहत 27 मार्च 2026 तक 57.79 करोड़ ऋण और ₹40.07 लाख करोड़ की राशि का आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध है।
Disclaimer: इस रिपोर्ट में 2013-14 और 2025-26 के तुलनात्मक आंकड़े अमित चिमनानी द्वारा उपलब्ध कराई गई सामग्री के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं। अलग-अलग आर्थिक संकेतकों की परिभाषा, गणना पद्धति और डेटा अवधि अलग हो सकती है। इसलिए आंकड़ों को संबंधित सरकारी स्रोतों/विभागों के उपलब्ध आंकड़ों के संदर्भ में पढ़ा जाना चाहिए। यह रिपोर्ट प्रस्तुत आंकड़ों का विश्लेषण है, किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति का स्वतंत्र मूल्यांकन नहीं।
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