Arabian Sea में भारतीय युद्धपोत से टकराया पाक नौसेना का जहाज, भारत ने दूतावास प्रभारी तलब किया
अरब सागर में पाकिस्तानी नौसेना के एक पोत द्वारा भारतीय नौसेना के एक अग्रिम पंक्ति के युद्धपोत को टक्कर मारने के ‘‘अस्वीकार्य आचरण’’ को लेकर भारत ने पाकिस्तान के दूतावास प्रभारी को बुधवार को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया। विदेश मंत्रालय ने बताया कि पाकिस्तान उच्चायोग के प्रभारी साद वाराइच को विदेश मंत्रालय में तलब किया गया और समुद्र में पाकिस्तानी नौसेना की इकाइयों के उस ‘‘अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर आचरण’’ को लेकर उनके समक्ष ‘‘कड़ा विरोध’’ दर्ज कराया गया, जिसके कारण यह टक्कर हुई। यह घटना मंगलवार रात को हुई।
वहीं, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने देर शाम जारी एक बयान में कहा कि उसने इस्लामाबाद में भारत के दूतावास प्रभारी को तलब किया और पाकिस्तान के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में भारतीय नौसेना के एक पोत की कथित ‘‘बेहद उकसावे वाली और अस्वीकार्य कार्रवाई’’ को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, 15 सितंबर की शाम को पाकिस्तानी नौसेना का एक पोत तेज गति से उत्तरी अरब सागर में नियमित निगरानी मिशन पर तैनात भारतीय नौसेना के एक अग्रिम पंक्ति के युद्धपोत के करीब आ गया। सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तानी पोत ‘हुनैन’ ने गैर-पेशेवर और असुरक्षित तरीके से दिशा बदली, जिसके कारण टक्कर हो गई।
‘हुनैन’ को भारी नुकसान हुआ है। वहीं, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि जब पाकिस्तानी नौसेना अपना द्विवार्षिक अभ्यास ‘सीस्पार्क-26’ कर रही थी, तब भारतीय पोत ने पाकिस्तानी नौसेना के जहाज के बेहद करीब आकर ‘‘आक्रामक तरीके से दिशा बदली, जिसके परिणामस्वरूप दोनों पोतों के बीच टक्कर हो गई।
RPF कस्टोडियल डेथ मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो जवानों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने गोंडा में 35 साल के एक व्यक्ति की कथित तौर पर हिरासत में हुई मौत के मामले में आरोपी रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के दो जवानों की अग्रिम जमानत याचिकाएं बुधवार को खारिज कर दीं। अदालत ने कहा कि भले ही कोविड-19 महामारी खत्म हो गई है लेकिन हिरासत में मौत का सिलसिला कम होता नहीं दिख रहा है। न्यायमूर्ति मनीष माथुर ने आरपीएफ के दारोगा करण सिंह यादव और सिपाही अमित कुमार यादव की अलग-अलग अपीलों को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।
इन दोनों ने गोंडा के विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) के चार अगस्त के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गई थीं। यह मामला गोंडा के किंकी गांव के रहने वाले संजय कुमार सोनकर की कथित रूप से हिरासत में हुई मौत से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार 28 सितंबर 2025 को गोंडा से गुवाहाटी जा रही एक मालगाड़ी से मोतीगंज रेलवे स्टेशन इलाके में सरसों के तेल के छह डिब्बे चोरी हो गए थे और आरपीएफ द्वारा जांच में सोनकर का नाम सामने आया था।
आरोप है कि चार नवंबर 2025 को आरपीएफ के जवान सोनकर को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गए थे और शाम करीब साढ़े चार बजे उसे जांच के सिलसिले में उसके गांव लाया गया था और बाद में उसे फिर वापस ले जाया गया था। अगली सुबह सोनकर के भाई को बताया गया कि उसके भाई का शव मुर्दाघर में है। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि हिरासत में सोनकर के साथ मारपीट की गई, जिससे उसकी मौत हो गई।
इसके खिलाफ अपील दायर करते हुए आरपीएफ के दारोगा करण सिंह यादव और सिपाही अमित कुमार यादव ने आरोपों से इनकार किया और दावा किया कि उन्हें इस मामले में गलत फंसाया गया है। इन आरपीएफ कर्मियों के वकील ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला दिया जिसमें जांघ के ऊपरी हिस्से पर चोट और दोनों घुटनों पर खरोंच का जिक्र था। उन्होंने दलील दी कि इन चोटों की वजह से किसी की मौत नहीं हो सकती।
पीठ ने अपीलों को खारिज करते हुए कहा कि यह सबूतों के आधार पर तय किया जाएगा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के नतीजे आरोपों का समर्थन करते हैं या नहीं। पीठ ने कहा, ऐसा लगता है कि भले ही कोविड-19 महामारी का दौर खत्म हो गया है, लेकिन हिरासत में मौत की समस्या कम होती नहीं दिख रही है। अदालत ने कहा कि हिरासत में मौत के मामलों में आम तौर पर सबूत पेश करने की जिम्मेदारी पुलिसकर्मियों की होनी चाहिए ताकि वे अपने गलत व्यवहार के कारण इंसानी जिंदगी को कमतर आंकने के आरोपों को गलत साबित कर सकें।
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