यूपी में असिस्टेंट प्रोफेसर के 1936 पदों पर निकली भर्ती:एज लिमिट 62 साल, सैलरी 1 लाख 82 हजार तक
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने प्रदेश के डिग्री कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 1,936 पदों पर भर्ती निकाली है। उम्मीदवारों की सुविधा के लिए आवेदन प्रक्रिया में वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) की प्रोसेस लागू की गई है। आवेदन करने से पहले OTR की प्रोसेस पूरी करनी होगी। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट upessc.up.gov.in पर जाकर अप्लाई कर सकते हैं। आवेदन में करेक्शन के लिए 11 अक्टूबर 2026 तक का समय दिया जाएगा। असिस्टेंट प्रोफेसर पदों के लिए रिटन एग्जाम 19 और 20 नवंबर 2026 को होगी। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : एज लिमिट : फीस : सैलरी : सिलेक्शन प्रोसेस : ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ऑनलाइन आवेदन लिंक --------------------------------------------------------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें कहीं उफनती नदी, कहीं निर्माणाधीन पुल पार करते बच्चे:स्कूल के रास्ते जान जोखिम में डालते स्कूली बच्चों के वीडियो वायरल छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्थित कोडार डैम से होकर स्कूल जाते बच्चे हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचते हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें
लखनऊ के प्रणव को 83 लाख वजीफा, लंदन में पढ़ेंगे:AI और तकनीक नीति में हासिल करेंगे विशेषज्ञता, UCL में लेंगे परास्नातक की डिग्री
लखनऊ के प्रणव भास्कर तिवारी का करीब 83 लाख रुपए की चेवनिंग-भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी उत्तर प्रदेश राज्य सरकार छात्रवृत्ति के लिए चयन हुआ है। इस छात्रवृत्ति से वे लंदन की यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन में विकास, तकनीक और नवाचार नीति में लोक प्रशासन की परास्नातक पढ़ाई करेंगे। प्रणव ने अपने करियर की शुरुआत कानून के क्षेत्र से की थी। अब वे (AI) और तकनीक नीति के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने की तैयारी कर रहे हैं। ला मार्टिनियर में पहली बार नहीं मिला था प्रवेश प्रणव की सफलता के पीछे उनकी मां गीता तिवारी और पिता ओम प्रकाश भास्कर का बड़ा योगदान है। बचपन में ला मार्टिनियर, लखनऊ में प्रवेश नहीं मिलने के बाद उनकी मां ने करीब छह महीने तक कोशिश जारी रखी। पिता ने भी सीमित आर्थिक संसाधनों और औसत अंकों को कभी बच्चों के भविष्य की सीमा नहीं बनने दिया। परिवार में शिक्षा को लेकर इसी सोच ने प्रणव और उनके भाइयों को आगे बढ़ने का हौसला दिया। प्रणव कहते हैं, मां ने मुझे अटल रहना सिखाया और पिता ने यह भरोसा दिया कि परिस्थितियां या अंक आपका भविष्य तय नहीं करते। अपने माता-पिता के अथक प्रयासों का पूर्णविराम हूं मैं, मेरा हाथ पर हाथ रखकर बैठना शोभा नहीं देता। वकालत से शुरू किया सफर प्रणव पहली पीढ़ी के वकील हैं। कानून की पढ़ाई और वकालत के बाद उन्होंने तकनीक नीति की ओर रुख किया। अमेजन वेब सर्विसेज के साथ काम करते हुए उन्हें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल नीति और उभरती तकनीकों से जुड़े विषयों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव मिला। अब यूसीएल में पढ़ाई के दौरान वे तकनीक, नवाचार और सार्वजनिक नीति के बीच संबंधों को और गहराई से समझेंगे। लंदन की पढ़ाई का लक्ष्य उत्तर प्रदेश में बदलाव लाना प्रणव इस छात्रवृत्ति को सिर्फ विदेश में पढ़ाई का अवसर नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश से मिले अवसरों को वैश्विक अनुभव से जोड़ने का माध्यम मानते हैं। उनका लक्ष्य पढ़ाई पूरी करने के बाद भारत लौटकर उत्तर प्रदेश के तकनीकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े तंत्र को मजबूत करने में योगदान देना है। वे कहते हैं, लंदन जाना उपलब्धि हो सकती है, लेकिन असली सफलता तब होगी जब वहां की सीख वापस उत्तर प्रदेश और भारत के काम आए।
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