शिल्पा शेट्टी के घर गणपति बप्पा का आगमन:पति राज के साथ की आरती, भारी बारिश के बीच बप्पा को लेने पहुंची अंकिता लोखंडे
बॉलीवुड सेलेब्स गणेश उत्सव बड़े धूमधाम से मनाते हैं। एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी के घर आज गणपति बप्पा का आगमन हुआ। एक्ट्रेस ने पति राज कुंद्रा के साथ बप्पा की आरती की। शिल्पा शेट्टी हर साल गणपति उत्सव धूमधाम से मनाती हैं। इस बार भी उन्होंने इको-फ्रेंडली गणपति की मूर्ति घर लाई। एक्ट्रेस अंकिता लोखंडे भारी बारिश के बीच गणपति की मूर्ति लेने पहुंचीं। इस दौरान वह पारंपरिक लुक में नजर आईं। देखें तस्वीरें- सलमान के परिवार में हर साल गणपति उत्सव मनता है गौरतलब है कि सलमान खान समेत कई सेलेब्स के यहां गणपति बप्पा की स्थापना हर साल की जाती है। सलमान खान और उनका पूरा परिवार हर साल उनकी बहन अर्पिता खान शर्मा और आयुष शर्मा के मुंबई स्थित घर पर बप्पा का स्वागत करता है। गणेश चतुर्थी पर उनका पूरा परिवार बहन अर्पिता खान शर्मा और आयुष शर्मा के मुंबई स्थित घर पहुंचता है। पिछले साल भी सलमान खान ने अपने माता-पिता सलीम और सलमा खान के साथ आरती की थी। इस मौके पर खान परिवार के कई सदस्य पूजा में शामिल होते हैं। भाई अरबाज और सोहेल खान, बहन अलवीरा और बच्चे भी उत्सव का हिस्सा बनते हैं। इसके अलावा सलमान के करीबी दोस्त रितेश देशमुख और जेनेलिया डिसूजा भी पिछले साल गणपति उत्सव में शामिल हुए थे। सोनू सूद के घर हर साल गणपति बप्पा आते हैं बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद के घर में गणपति बप्पा की स्थापना होती है। पिछले साल गणेशोत्सव के मौके पर बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की थी। उन्होंने पहली बार मुंबई के घर में गणेश जी को लाने का अनुभव शेयर करते हुए बताया था कि मैं अंधेरी स्टेशन से बाइक पर बप्पा को लेने गया था। उस समय बस यही प्रार्थना की थी कि जिस सफर में निकले, उसमें बप्पा का साथ कभी न छूटे। आज जब मैं आप लोगों के साथ खड़ा हूं, तो लगता है बप्पा से मांगी दुआ कबूल हुई। सोनू ने कहा था कि बप्पा विघ्नहर्ता हैं, जो हमेशा रास्ता दिखाते हैं और परेशानियां दूर कर देते हैं। जब उनसे पूछा गया कि अगर उन्हें बप्पा से कोई सुपरपावर चाहिए तो वह क्या होगी, तो सोनू ने कहा, “मैं चाहता हूं बप्पा हर किसी को शक्ति दें जिससे देश-दुनिया की मुश्किलें खत्म हो सकें। पूरी खबर यहां पढ़ें… पलक मुछाल के घर बप्पा विराजे थे 2025 में मशहूर सिंगर पलक मुछाल के घर भी गणपति बप्पा विराजे थे। हर साल की तरह उन्होंने पूरे उत्साह के साथ बप्पा का स्वागत किया था। इस मौके पर उन्होंने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की थी। पलक ने बताया था कि उनके लिए गणपति उत्सव सिर्फ एक त्योहार नहीं है। यह उनके लिए आस्था और भावनाओं से जुड़ा खास समय है। उन्होंने कहा था कि उनके जीवन की खुशियां, सफलता और उपलब्धियां बप्पा की कृपा से मिली हैं। इसलिए गणेशोत्सव उनके लिए साल का सबसे पसंदीदा समय है। पलक ने कहा था कि बप्पा के आने से माहौल में उमंग और सकारात्मकता भर जाती है। उन्होंने बताया था कि इन दिनों वह काफी भावुक हो जाती हैं। हर साल बप्पा को धन्यवाद देने की उनकी वजहें और बढ़ जाती हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
तिग्मांशु धूलिया ने यश के लुक पर कसा तंज:KGF को लेकर बोले- ऐसी फिल्मों के हीरो लंबे बाल-दाढ़ी में राक्षस जैसे लगते हैं
निर्देशक तिग्मांशु धूलिया ने हाल ही में साउथ फिल्मों में दिखाए जा रहे हीरोज के लुक और हिंसा पर अपनी राय रखी। उन्होंने फिल्म ‘KGF’ के हीरो यश के लुक पर तंज कसा। तिग्मांशु ने कहा कि आजकल फिल्मों में हीरो लंबे बाल और बड़ी दाढ़ी में नजर आते हैं, जो उन्हें राक्षस जैसे लगते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस तरह के किरदार पहले रामायण और महाभारत में राक्षसों के होते थे, वे आज फिल्मों में हीरो बनकर युवाओं को पसंद आ रहे हैं। तिग्मांशु धूलिया ने यह बात कोशाला साहित्य महोत्सव में बातचीत के दौरान कही। उन्होंने कहा कि आजकल फिल्मों में बहुत ज्यादा गुस्से वाले और हिंसक किरदार दिखाए जा रहे हैं। उनके मुताबिक, ‘बाहुबली’ के बाद ‘कांतारा’ जैसी फिल्मों में मार-काट और खून-खराबा काफी बढ़ गया है। तिग्मांशु ने कहा कि उन्हें इस तरह का सिनेमा बिल्कुल पसंद नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि दर्शक ऐसी फिल्मों को पसंद कर रहे हैं। उनके मुताबिक, इसकी एक वजह समाज में लोगों के अंदर मौजूद गुस्सा हो सकता है। उन्होंने कहा कि शायद लोगों को अपना गुस्सा निकालने का कोई जरिया नहीं मिल रहा, इसलिए वे फिल्मों के इन किरदारों में खुद को देखते हैं और उन्हें देखकर मजा लेते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि इन फिल्मों का लोगों पर इतना असर क्यों है? तिग्मांशु ने यह भी कहा कि लगातार ऐसी फिल्में बन रही हैं और दर्शक उन्हें पसंद कर रहे हैं। तिग्मांशु धूलिया ने ‘धुरंधर’ की कहानी पर सवाल उठाए हाल ही में तिग्मांशु धूलिया ने मौजूदा हिंदी सिनेमा में कहानी कहने के तरीके पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि कॉरपोरेट कल्चर और एक जैसे फिल्मी टेम्पलेट के कारण फिल्मों में मौलिक कहानियां कम होती जा रही हैं। धूलिया ने यह टिप्पणी हाल ही में एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (EGI) की ओर से आयोजित राजेंद्र माथुर मेमोरियल लेक्चर के दौरान की थी। धूलिया ने कमर्शियल मेनस्ट्रीम सिनेमा का उदाहरण देते हुए ‘पुष्पा’, 'KGF' और ‘धुरंधर’ का जिक्र किया था। उन्होंने कहा, “हर फिल्म एक फिक्शनल बायोपिक है।” ‘धुरंधर’ का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अगर किसी से फिल्म की कहानी पूछी जाए तो शायद वह उसे ठीक से बता नहीं पाएगा। उन्होंने कहा था, “मैंने वह फिल्म देखी है। मुझे फिल्म का पहला पार्ट काफी पसंद आया। बहुत अच्छी तरह प्रेजेंट किया गया है, काफी एंगेजिंग है और म्यूजिक भी अच्छा है, लेकिन आप उसकी कहानी पूछिएगा तो आप कहानी बता नहीं पाएंगे।” धूलिया ने फिल्म की कहानी को अपने अंदाज में समझाते हुए कहा, “एक आदमी है, अंडरकवर स्पाई है, पाकिस्तान जाता है और वहां तबाही मचा देता है। ये कोई कहानी हुई?” उन्होंने आगे कहा था कि फिल्मों में कहानी कहने वाले लोग कम हो गए हैं और जो लोग अलग तरह की कहानी कहना चाहते हैं, उन्हें बनाने का मौका नहीं मिलता। उनके मुताबिक मेकर्स को डर रहता है कि ऐसी फिल्में चलेंगी नहीं। धूलिया बोले- फिल्मों में एक जैसा टेंपलेट दिखाई दे रहा है धूलिया ने कहा था कि एक ही जैसा टेंपलेट हर जगह दिखाई दे रहा है। उन्होंने इसे एक्सट्रीम कैपिटलिज्म से जोड़ते हुए कहा कि जिस तरह शहरों, फैशन, गाड़ियों और दुकानों में एकरूपता बढ़ रही है, उसी तरह फिल्मों में भी इंडिविजुअलिटी कम होती जा रही है। उन्होंने पुराने हिंदी सिनेमा का जिक्र करते हुए कहा कि बिमल रॉय, शक्ति सामंत, मनमोहन देसाई, प्रकाश मेहरा और सुभाष घई जैसे फिल्मकारों से लेकर 2017 तक हिंदी सिनेमा में स्थिति ठीक थी। इसके बाद अचानक बदलाव आया और हम कहानी कहना ही भूल चुके हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें… तिग्मांशु धूलिया के वर्कफ्रंट की बात करें तो उनकी फिल्म ‘घमासान’ 11 सितंबर को ZEE5 पर रिलीज हुई है। फिल्म में प्रतीक गांधी और अरशद वारसी मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म बुंदेलखंड के डकैत संसार से प्रेरित कहानी पर आधारित है।
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