दिल्ली से सीधे सागर पहुंचे CM डॉ. मोहन यादव, बोले दोषियों को ऐसी सजा देंगे कि दोबारा कोई हिम्मत नहीं करेगा, प्रशासन को दिया फ्री हैंड
बंडा-शाहगढ़ क्षेत्र में जहरीली शराब से हुई मौतों और कई लोगों के बीमार होने के मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सख्त रुख दिखाया है। मंगलवार को नई दिल्ली से लौटने के बाद मुख्यमंत्री सीधे सागर पहुंचे। यहां जिला अस्पताल में भर्ती प्रभावित लोगों से मुलाकात कर उनका हाल जाना और डॉक्टरों को बेहतर उपचार के साथ सभी जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
अस्पताल से निकलने के बाद मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की। उन्होंने मामले में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अधिकारियों को फ्री-हैंड देते हुए साफ कहा कि जहां भी जरूरत हो, कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए।
दोषियों पर ऐसी कार्रवाई होगी कि दोबारा हिम्मत नहीं करेंगे- CM
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जहरीली शराब के मामले में प्रशासन को कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। जहां अवैध अतिक्रमण से जुड़े मामले सामने आएं, वहां भी कार्रवाई की जाए। सीमावर्ती इलाकों को देखते हुए अधिकारियों से पड़ोसी राज्यों के अधिकारियों के संपर्क में रहने को भी कहा गया है।
सीएम ने कहा, “हम दोषियों पर ऐसी कार्रवाई करेंगे कि दोबारा किसी की इस तरह के काम करने की हिम्मत नहीं होगी।” उन्होंने बताया कि इस संबंध में पूरे प्रदेश के लिए निर्देश दिए गए हैं।
जहरीली शराब के मामलों में कठोर सजा का किया जिक्र
मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने जहरीली शराब से जुड़े मामलों में प्रदेश के कानूनी प्रावधानों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने इस तरह के अपराधों को लेकर कानून को कठोर बनाया है और इसमें हत्या से लेकर आजीवन कारावास तथा फांसी तक की सजा का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने इस दौरान पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में इस तरह के मामलों को लेकर इतने कठोर कानूनी प्रावधान नहीं थे।
कांग्रेस से बोले- इस मामले में राजनीति नहीं, एकजुटता दिखाएं
मुख्यमंत्री ने शराबबंदी को लेकर धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर अभियान चलाने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि किसी परिवार में पिता या पुत्र की मौत बेहद कष्टकारी है और ऐसे मामलों को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। सीएम डॉ. यादव ने नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेताओं से अपील करते हुए कहा कि इस मामले में राजनीति करने के बजाय सभी को एकजुट होकर इस चुनौती का सामना करना चाहिए।
Sidhi News: बुजुर्ग की पीठ पर बैठकर पानी पार करने वाले पटवारी नीलेश नामदेव निलंबित, कलेक्टर ने बताया कार्रवाई का असली कारण
सीधी जिले की माटा ग्राम पंचायत के पटवारी नीलेश नामदेव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बीच प्रशासन ने उन्हें निलंबित कर दिया है। वीडियो में पटवारी एक बुजुर्ग की पीठ पर बैठकर पानी से भरा गड्ढा पार करते नजर आ रहे हैं। हालांकि, कलेक्टर विकास मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि यह वीडियो करीब एक साल पुराना है और पटवारी के खिलाफ कार्रवाई राहत कार्यों में गड़बड़ी और ग्रामीणों से मिली शिकायतों के आधार पर की गई है।
माटा ग्राम पंचायत का यह वीडियो बुधवार को सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। बताया जा रहा है कि घटना करीब 11 महीने से एक साल के बीच की है अर्थात पुरानी है। उस समय पटवारी नीलेश नामदेव सर्वे के सिलसिले में ग्रामीण क्षेत्र में पहुंचे थे। रास्ते में पानी भरा होने पर एक बुजुर्ग उन्हें अपनी पीठ पर बैठाकर दूसरी ओर ले गया था। अब पुराना वीडियो सामने आने के बाद पटवारी के व्यवहार को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कलेक्टर बोले- पुराना है वीडियो, राहत कार्यों में गड़बड़ी पर कार्रवाई
इस बीच पटवारी के निलंबन को वायरल वीडियो से जोड़कर देखा जाने लगा, लेकिन कलेक्टर विकास मिश्रा ने मीडिया से बातचीत में स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि वीडियो करीब एक साल पुराना है। नीलेश नामदेव को राहत कार्यों में गड़बड़ी के चलते हटाया गया है।
9 सितंबर को गोपद बनास एसडीएम की ओर से जारी आदेश में भी पटवारी के खिलाफ ग्रामीणों से मिली शिकायतों का उल्लेख है। इनमें शासकीय पट्टा दिलाने, पीएम किसान सम्मान निधि, जाति प्रमाण पत्र और जन्म प्रमाण पत्र के प्रतिवेदन से जुड़े कामों के लिए सेवा शुल्क के नाम पर राशि मांगने की शिकायत शामिल है।
आदेश में पुराने वीडियो का भी जिक्र
निलंबन आदेश में बुजुर्ग की पीठ पर सवार होकर पानी से भरे गड्ढे को पार करने की घटना का भी उल्लेख किया गया है। प्रशासन ने इस व्यवहार को असंवेदनशील और अपमानजनक बताते हुए इससे प्रशासन की छवि धूमिल होने की बात कही है। आदेश में इसे सिविल सेवा आचरण नियमों के प्रावधानों के विपरीत माना गया है।
इसके बाद पटवारी नीलेश नामदेव को मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियमों के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय तहसील कार्यालय गोपद बनास रहेगा और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी। तहसीलदार गोपद बनास को आरोप पत्र तैयार कर तीन दिन के भीतर भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।
इस तरह वायरल वीडियो और निलंबन का समय भले ही एक साथ सामने आया हो, लेकिन कलेक्टर के मुताबिक कार्रवाई की वजह करीब एक साल पुराना वीडियो भर नहीं, बल्कि राहत कार्यों में सामने आई गड़बड़ी है। निलंबन आदेश में ग्रामीणों की अन्य शिकायतों के साथ पुराने वीडियो में सामने आए व्यवहार को भी दर्ज किया गया है।
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