Sidhi News: बुजुर्ग की पीठ पर बैठकर पानी पार करने वाले पटवारी नीलेश नामदेव निलंबित, कलेक्टर ने बताया कार्रवाई का असली कारण
सीधी जिले की माटा ग्राम पंचायत के पटवारी नीलेश नामदेव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बीच प्रशासन ने उन्हें निलंबित कर दिया है। वीडियो में पटवारी एक बुजुर्ग की पीठ पर बैठकर पानी से भरा गड्ढा पार करते नजर आ रहे हैं। हालांकि, कलेक्टर विकास मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि यह वीडियो करीब एक साल पुराना है और पटवारी के खिलाफ कार्रवाई राहत कार्यों में गड़बड़ी और ग्रामीणों से मिली शिकायतों के आधार पर की गई है।
माटा ग्राम पंचायत का यह वीडियो बुधवार को सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। बताया जा रहा है कि घटना करीब 11 महीने से एक साल के बीच की है अर्थात पुरानी है। उस समय पटवारी नीलेश नामदेव सर्वे के सिलसिले में ग्रामीण क्षेत्र में पहुंचे थे। रास्ते में पानी भरा होने पर एक बुजुर्ग उन्हें अपनी पीठ पर बैठाकर दूसरी ओर ले गया था। अब पुराना वीडियो सामने आने के बाद पटवारी के व्यवहार को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कलेक्टर बोले- पुराना है वीडियो, राहत कार्यों में गड़बड़ी पर कार्रवाई
इस बीच पटवारी के निलंबन को वायरल वीडियो से जोड़कर देखा जाने लगा, लेकिन कलेक्टर विकास मिश्रा ने मीडिया से बातचीत में स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि वीडियो करीब एक साल पुराना है। नीलेश नामदेव को राहत कार्यों में गड़बड़ी के चलते हटाया गया है।
9 सितंबर को गोपद बनास एसडीएम की ओर से जारी आदेश में भी पटवारी के खिलाफ ग्रामीणों से मिली शिकायतों का उल्लेख है। इनमें शासकीय पट्टा दिलाने, पीएम किसान सम्मान निधि, जाति प्रमाण पत्र और जन्म प्रमाण पत्र के प्रतिवेदन से जुड़े कामों के लिए सेवा शुल्क के नाम पर राशि मांगने की शिकायत शामिल है।
आदेश में पुराने वीडियो का भी जिक्र
निलंबन आदेश में बुजुर्ग की पीठ पर सवार होकर पानी से भरे गड्ढे को पार करने की घटना का भी उल्लेख किया गया है। प्रशासन ने इस व्यवहार को असंवेदनशील और अपमानजनक बताते हुए इससे प्रशासन की छवि धूमिल होने की बात कही है। आदेश में इसे सिविल सेवा आचरण नियमों के प्रावधानों के विपरीत माना गया है।
इसके बाद पटवारी नीलेश नामदेव को मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियमों के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय तहसील कार्यालय गोपद बनास रहेगा और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी। तहसीलदार गोपद बनास को आरोप पत्र तैयार कर तीन दिन के भीतर भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।
इस तरह वायरल वीडियो और निलंबन का समय भले ही एक साथ सामने आया हो, लेकिन कलेक्टर के मुताबिक कार्रवाई की वजह करीब एक साल पुराना वीडियो भर नहीं, बल्कि राहत कार्यों में सामने आई गड़बड़ी है। निलंबन आदेश में ग्रामीणों की अन्य शिकायतों के साथ पुराने वीडियो में सामने आए व्यवहार को भी दर्ज किया गया है।
MP High Court: प्रमोशन में आरक्षण की 50% सीमा का करना होगा पालन, मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश
मध्य प्रदेश में कर्मचारियों के प्रमोशन में आरक्षण को लेकर हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों को प्रमोशन देने पर रोक नहीं है, लेकिन इस प्रक्रिया में आरक्षण की निर्धारित 50 प्रतिशत सीमा का सख्ती से पालन करना होगा। हाई कोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि लंबित मामलों में अंतिम फैसला आने तक प्रमोशन में आरक्षण 50 प्रतिशत की सीमा से बाहर न जाए।
जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने प्रमोशन में आरक्षण से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं की ओर से भोपाल की वेटरनरी सर्जन डॉ. स्वाति तिवारी सहित अन्य की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज शर्मा ने पक्ष रखा।
प्रमोशन पर रोक नहीं, लेकिन आरक्षण की सीमा का पालन जरूरी
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि कर्मचारियों को लगातार प्रमोशन दिए जा रहे हैं। इस पर याचिकाकर्ताओं की तरफ से तर्क दिया गया कि एक बार प्रमोशन हो जाने के बाद संबंधित कर्मचारियों को बाद में पदावनत यानी रिवर्ट करना व्यावहारिक रूप से मुश्किल हो सकता है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से आरबी राय मामले का हवाला देते हुए यह भी कहा गया कि कानूनी स्थिति स्पष्ट होने के बावजूद अब तक प्रभावित कर्मचारियों को रिवर्ट नहीं किया गया है।
कोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों को प्रमोशन के लिए विचार किए जाने का अधिकार है, लेकिन आरक्षण की निर्धारित सीमा का पालन भी जरूरी है। इसे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके से पार नहीं किया जा सकता।
इंद्रा साहनी फैसले का दिया हवाला
डिवीजन बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ मामले में निर्धारित आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा का उल्लेख किया। कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि लंबित मामलों में अंतिम निर्णय आने तक प्रमोशन प्रक्रिया में 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
मामले में राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और अतिरिक्त महाधिवक्ता जान्हवी पंडित ने पक्ष रखा। मामले की अगली सुनवाई 1 दिसंबर को होगी।
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