IND vs AFG 3rd T20I Pitch Reports: बल्लेबाज या गेंदबाज, कौन मारेगा बाजी? तीसरे T20 में कैसा होगा पिच का मिजाज?
IND vs AFG 3rd T20I Pitch Reports: भारत और अफगानिस्तान के बीच 3 मैचों की टी20 सीरीज का तीसरा और आखिरी मुकाबला 17 सितंबर को खेला जाएगा. दोनों टीमें दिल्ली के ही अरुण जेटली स्टेडियम में आमने-सामने होंगी. शुरुआती दो मुकाबले जीतकर टीम इंडिया ने सीरीज अपने नाम कर ली है. अब तीसरा मैच जीतकर श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली टीम इंडिया अफगानिस्तान का क्लीन स्वीप करने उतरेगी, जबकि अफगानिस्तान को अभी भी भारत के खिलाफ अपनी पहली टी20 जीत की तलाश है. तो इस वीडियो में जानिए कि दिल्ली की पिच का मिजाज 17 सितंबर को कैसा रहने वाला है.
शादी के सीजन में महंगे हो सकते हैं सोने-चांदी के भाव, सरकार ने 3 गुणा बढ़ाई हॉलमार्किंग फीस
त्योहारों और शादी के सीजन से पहले सोना खरीदने वालों के लिए एक अहम खबर सामने आई है. भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने सोने के आभूषणों की हॉलमार्किंग फीस में बढ़ोतरी कर दी है. अब सोने के प्रत्येक आर्टिकल की हॉलमार्किंग के लिए 75 रुपये देने होंगे. पहले यह शुल्क 45 रुपये था. यानी फीस में करीब 67 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. यह बदलाव 14 सितंबर 2026 को अधिसूचित BIS (Hallmarking) Amendment Regulations, 2026 के तहत लागू हुआ है.
45 से बढ़कर 75 रुपये हुई फीस
नए नियमों के मुताबिक, ज्वेलर्स को मान्यता प्राप्त Assaying and Hallmarking Centres (AHCs) को सोने के प्रत्येक आर्टिकल की हॉलमार्किंग के लिए 75 रुपये का शुल्क देना होगा. एक कंसाइनमेंट के लिए न्यूनतम शुल्क 200 रुपये तय किया गया है. इससे पहले प्रति आर्टिकल शुल्क 45 रुपये था और न्यूनतम कंसाइनमेंट शुल्क 200 रुपये था.
हॉलमार्किंग शुल्क आभूषण के वजन के आधार पर नहीं, बल्कि प्रत्येक आर्टिकल के हिसाब से लिया जाता है. इसलिए हल्के वजन वाले छोटे आभूषणों पर इस शुल्क का अनुपात अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है.
चांदी की हॉलमार्किंग फीस में बदलाव नहीं
BIS ने चांदी के आभूषणों की हॉलमार्किंग फीस में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया है. चांदी के प्रत्येक आर्टिकल के लिए शुल्क 35 रुपये ही रहेगा. एक कंसाइनमेंट के लिए न्यूनतम शुल्क 150 रुपये निर्धारित है. इस तरह नई व्यवस्था में मुख्य बदलाव सोने की हॉलमार्किंग फीस को लेकर हुआ है.
ग्राहकों पर क्या होगा असर?
हॉलमार्किंग की फीस सीधे तौर पर ज्वेलर्स से ली जाती है. हालांकि, बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ज्वेलर्स की ओर से ग्राहकों तक पहुंचाया जा सकता है. इसका असर खासतौर पर कम वजन वाले सोने के आभूषणों की कीमत पर अपेक्षाकृत अधिक दिखाई दे सकता है. वहीं, महंगे और अधिक वजन वाले आभूषणों की कुल कीमत की तुलना में 30 रुपये की अतिरिक्त हॉलमार्किंग फीस का असर सीमित रह सकता है. ऐसे में ग्राहक के लिए वास्तविक अतिरिक्त लागत इस बात पर भी निर्भर करेगी कि ज्वेलर इस शुल्क को अंतिम बिल में किस तरह शामिल करता है.
त्योहारों से पहले क्यों अहम है फैसला?
हॉलमार्किंग शुल्क में यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब देश में त्योहारों और शादी के सीजन की तैयारियां शुरू हो रही हैं. नवरात्रि, दशहरा और दिवाली जैसे मौकों पर भारत में सोने और चांदी की खरीदारी बढ़ती है. ऐसे में ज्वेलर्स के लिए हॉलमार्किंग लागत बढ़ने का असर कारोबार की लागत पर पड़ सकता है.
ज्वेलरी उद्योग के संगठन ऑल इंडिया जेम एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) ने इस बढ़ोतरी पर चिंता जताई है. संगठन ने करीब 67 फीसदी फीस वृद्धि को लेकर समीक्षा की मांग की है. GJC का कहना है कि शुल्क बढ़ाने के बजाय फर्जी हॉलमार्किंग और अनधिकृत ऑपरेटरों पर कार्रवाई को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए.
हॉलमार्किंग क्यों जरूरी है?
हॉलमार्किंग का उद्देश्य सोने की शुद्धता की पुष्टि करना और ग्राहकों को प्रमाणित गुणवत्ता वाला आभूषण उपलब्ध कराना है. हॉलमार्क वाले आभूषण पर BIS का निशान, सोने की शुद्धता और HUID यानी Hallmark Unique Identification जैसी जानकारी होती है. इसलिए सोना खरीदते समय ग्राहकों को केवल कीमत और डिजाइन पर ध्यान देने के बजाय आभूषण पर BIS हॉलमार्क और HUID की जांच भी करनी चाहिए.
कुल मिलाकर, BIS के नए फैसले से सोने की हॉलमार्किंग प्रक्रिया की लागत बढ़ गई है. आने वाले त्योहारों और शादी के सीजन में ज्वेलर्स और ग्राहकों दोनों पर इसका असर देखने को मिल सकता है, खासकर हल्के और कम कीमत वाले आभूषणों के मामले में.
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