गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट पर तालमेल के लिए पंजाब सरकार ने बनाई 7 सदस्यीय कमेटी
पंजाब की भगवंत मान सरकार ने ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट, 2026’ से जुड़े मामलों पर श्री अकाल तख्त साहिब के साथ समन्वय के लिए सात सदस्यीय तालमेल कमेटी का गठन किया है. सरकार के गृह और न्याय विभाग की ओर से 16 सितंबर को जारी आदेश के तहत बनाई गई यह कमेटी श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा गठित कमेटी के साथ लगातार संपर्क और समन्वय बनाए रखेगी.
सरकार के मुताबिक, कमेटी का उद्देश्य एक्ट से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों पर विचार-विमर्श कर आवश्यक सुझाव और रिपोर्ट तैयार करना है. ये रिपोर्ट आगे की कार्रवाई और विचार के लिए पंजाब सरकार को सौंपी जाएंगी.
श्री अकाल तख्त साहिब के निर्देशों के अनुसार गठन
पंजाब सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, सात सदस्यीय कमेटी का गठन श्री अकाल तख्त साहिब के निर्देशों के अनुसार किया गया है. कमेटी का मुख्य कार्य एक्ट से संबंधित विषयों पर श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा बनाई गई कमेटी के साथ समन्वय स्थापित करना होगा.
इसके जरिए सरकार और धार्मिक संस्था के बीच एक्ट से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर संवाद बनाए रखने की व्यवस्था की गई है.
कौन-कौन हैं कमेटी में?
सात सदस्यीय कमेटी में धार्मिक, न्यायिक, प्रशासनिक और कानूनी पृष्ठभूमि से जुड़े लोगों को शामिल किया गया है. कमेटी के सदस्यों में:
- पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह
- दमदमी टकसाल के प्रमुख संत ज्ञानी हरनाम सिंह खालसा
- रामपुर खेड़ा के संत बाबा सेवा सिंह
- रिटायर्ड जस्टिस जसपाल सिंह
- रिटायर्ड जस्टिस गुरबीर सिंह
- पूर्व आईपीएस अधिकारी एवं पंजाब पब्लिक सर्विस कमीशन के पूर्व चेयरमैन जतिंदर सिंह औलाख
- लॉ ऑफिसर प्रीत इंदर पाल सिंह शामिल हैं.
कमेटी में अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े सदस्यों को शामिल किए जाने से एक्ट से संबंधित धार्मिक, कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर विचार-विमर्श की व्यवस्था बनाई गई है.
क्या करेगी यह कमेटी?
यह कमेटी केवल औपचारिक संपर्क तक सीमित नहीं रहेगी. सरकार के आदेश के अनुसार, एक्ट से जुड़े मामलों पर श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से गठित कमेटी के साथ लगातार तालमेल रखा जाएगा.
किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर विचार-विमर्श के बाद कमेटी अपने सुझाव और रिपोर्ट पंजाब सरकार को सौंप सकती है. इसके आधार पर सरकार आगे की कार्रवाई पर विचार करेगी.
इस व्यवस्था का एक अहम पहलू यह है कि एक्ट से जुड़े विषयों पर सरकार और श्री अकाल तख्त साहिब की कमेटी के बीच संवाद का एक औपचारिक माध्यम उपलब्ध रहेगा.
16 सितंबर को जारी हुआ सरकारी आदेश
सात सदस्यीय तालमेल कमेटी का गठन पंजाब सरकार के गृह विभाग और न्याय विभाग की ओर से 16 सितंबर 2026 को जारी आदेश के माध्यम से किया गया है.
सरकार की ओर से इसे श्री अकाल तख्त साहिब के निर्देशों के अनुरूप उठाया गया कदम बताया गया है. अब कमेटी एक्ट से जुड़े विषयों पर संबंधित पक्षों के बीच समन्वय का काम करेगी.
आगे की प्रक्रिया पर रहेगी नजर
‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट, 2026’ से जुड़े मामलों में अब यह सात सदस्यीय कमेटी सरकार और श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा गठित कमेटी के बीच संपर्क का महत्वपूर्ण माध्यम होगी.
आने वाले समय में कमेटी की बैठकों, सुझावों और रिपोर्टों के आधार पर एक्ट से जुड़े विभिन्न मामलों में सरकार की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी. फिलहाल सरकार के आदेश ने इस प्रक्रिया के लिए एक औपचारिक तालमेल व्यवस्था स्थापित कर दी है.
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बड़े लेनदेन पर एमडीआर से बढ़ेगा निवेश; डिजिटल पेमेंट का अगला चरण होगा और मजबूत: बिलडेस्क को-फाउंडर
मुंबई, 16 सितंबर (आईएएनएस)। डिजिटल पेमेंट और फिनटेक क्षेत्र की प्रमुख कंपनी बिलडेस्क के निदेशक एवं सह-संस्थापक श्रीनिवासु एमएन ने बुधवार को कहा कि सरकार का यूपीआई से जुड़े 2,000 रुपए से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने का कदम डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में मदद करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था आम उपभोक्ताओं या छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ डालने के लिए नहीं है, बल्कि पेमेंट नेटवर्क को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से की गई है।
न्यूज एजेंसी आईएएनएस से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई पेमेंट पूरी तरह निःशुल्क रहेगा और छोटे व्यापारियों के अधिकांश ट्रांजैक्शन पर भी कोई शुल्क नहीं लगेगा। एमडीआर केवल कुछ चुनिंदा 2,000 रुपए से अधिक मूल्य के ट्रांजैक्शन पर लागू होगा, जिससे प्राप्त संसाधनों का उपयोग यूपीआई नेटवर्क के विस्तार और तकनीकी निवेश के लिए किया जा सकेगा।
बिलडेस्क के सह-संस्थापक ने आगे कहा कि यूपीआई को लेकर किसी प्रकार की गलतफहमी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने दोहराया, सामान्य उपभोक्ता के लिए यूपीआई पूरी तरह मुफ्त रहेगा और छोटे मूल्य के व्यापारिक लेनदेन पर भी कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि कुछ नियमित भुगतानों जैसे यूटिलिटी बिल, सरकारी कर भुगतान, बीमा प्रीमियम और ईंधन भुगतान के लिए भी रियायती शुल्क व्यवस्था रखी गई है। उन्होंने कहा कि इस संतुलित मॉडल से एक ओर डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन मिलेगा और दूसरी ओर भुगतान सेवाएं उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं को आवश्यक निवेश के लिए संसाधन भी प्राप्त होंगे।
श्रीनिवासु एमएन ने आईएएनएस से कहा कि यूपीआई आज करोड़ों भारतीयों के दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। लोग खरीदारी से लेकर बिल भुगतान, धन हस्तांतरण और अन्य वित्तीय गतिविधियों के लिए बड़े पैमाने पर यूपीआई का उपयोग कर रहे हैं।
उन्होंने आईएएनएस को बताया कि इस सफलता के पीछे बैंकों, वित्तीय संस्थानों और पूरे डिजिटल भुगतान उद्योग द्वारा किया गया व्यापक निवेश है। अब जबकि यूपीआई को देश के और अधिक क्षेत्रों तथा नए उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाने का लक्ष्य है, तब नई तकनीकों, साइबर सुरक्षा और ग्राहक जागरूकता पर और अधिक निवेश की आवश्यकता होगी।
उन्होंने कहा, डिजिटल भुगतान का अगला चरण केवल उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं होगा। इसके लिए साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकथाम तंत्र, ग्राहक शिक्षा और उन्नत तकनीकी ढांचे पर भी लगातार निवेश करना होगा।
श्रीनिवासु एमएन ने आगे कहा, एमडीआर से प्राप्त संसाधनों का एक हिस्सा ऐसे विशेष कोष के निर्माण में भी लगाया जाएगा, जिसका उद्देश्य छोटे व्यापारियों के बीच डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देना और यूपीआई को देश के अधिक से अधिक हिस्सों तक पहुंचाना होगा।
भारत आज रिटेल डिजिटल भुगतान के मामले में दुनिया का अग्रणी देश बन चुका है। उन्होंने कहा कि दुनिया के 50 प्रतिशत से अधिक रिटेल डिजिटल लेनदेन भारत में हो रहे हैं, जो देश की डिजिटल भुगतान क्रांति की सफलता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि भारत में अभी भी डिजिटल भुगतान के विस्तार की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। वर्तमान में यूपीआई लगभग 50 करोड़ उपयोगकर्ताओं तक पहुंच चुका है, लेकिन यह देश की कुल आबादी का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है। ऐसे में आने वाले वर्षों में करोड़ों नए उपभोक्ताओं और कारोबारियों को डिजिटल भुगतान प्रणाली से जोड़ने की गुंजाइश बनी हुई है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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