भारत दिखा सकता है कि एआई का इस्तेमाल सामाजिक और विकासात्मक लाभ के लिए किस प्रकार किया जा सकता है: बिल गेट्स
नई दिल्ली, 16 सितंबर (आईएएनएस)। माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पहले आई तकनीकी क्रांतियों से मौलिक रूप से अलग है और चेतावनी दी है कि समाज शायद अभी तक इसके आने वाले बड़े और तेज बदलावों के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है।
उन्होंने एआई की असाधारण क्षमता पर जोर देते हुए भारत को एक महत्वपूर्ण उदाहरण बताया कि किस तरह इस तकनीक का इस्तेमाल सामाजिक और विकासात्मक लाभ के लिए तेजी से किया जा सकता है।
बिल गेट्स ने कहा, यह क्षमताओं का एक अद्भुत समूह है। उन्होंने कहा कि भारत यह दिखा सकता है कि एआई के सकारात्मक उपयोगों को अधिकतम गति से कैसे आगे बढ़ाया जाए।
एनडीटीवी के साथ बातचीत में अरबपति परोपकारी बिल गेट्स ने कहा कि यदि एआई के विकास की रफ्तार को थोड़ा धीमा करने से समाज को इसके प्रभावों के लिए तैयार होने का अधिक समय मिलता है, तो इस पर विचार किया जाना चाहिए।
गेट्स ने कहा कि एआई, पर्सनल कंप्यूटर और इंटरनेट जैसी पिछली तकनीकी क्रांतियों से अलग है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह मान लेना सही नहीं होगा कि एआई के प्रभावों को संभालना भी उतना ही आसान होगा जितना अन्य तकनीकों के मामले में रहा है।
उन्होंने कहा, एआई एक बहुत ही अनोखी तकनीक है। मैं उन लोगों को सावधान करना चाहता हूं जो सोचते हैं कि एआई के प्रभावों को संभालना उतना ही आसान होगा जितना अन्य तकनीकों के प्रभावों को संभालना रहा है।
गेट्स ने कहा कि एआई के विकास की व्यापकता और गति इतनी अधिक है कि नवाचार के लंबे समय से समर्थक रहने के बावजूद उन्हें भी यह सोचने पर मजबूर होना पड़ा है कि क्या इसकी रफ्तार पर सवाल उठाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, यदि हम इसकी गति को थोड़ा धीमा कर सकते हैं, तो हमें इस पर विचार करना चाहिए, क्योंकि इतने बड़े और तेज बदलाव के लिए तैयार होना जरूरी है।
बिल गेट्स ने आगे कहा कि अपने पूरे जीवन में उन्होंने नवाचार का समर्थन किया है, चाहे वह माइक्रोसॉफ्ट के साथ उनका काम हो या गेट्स फाउंडेशन के माध्यम से किए गए प्रयास। लेकिन एआई ऐसा दुर्लभ मामला है जहां नवाचार का प्रभाव इतना व्यापक और नाटकीय हो सकता है कि दुनिया शायद उसके लिए पूरी तरह तैयार नहीं है।
उन्होंने साइबर सुरक्षा को एआई से जुड़े सबसे तात्कालिक जोखिमों में से एक बताया। गेट्स ने चेतावनी दी कि एआई-आधारित उपकरण साइबर हमलावरों की क्षमताओं को काफी मजबूत बना सकते हैं।
उन्होंने कहा, निकट भविष्य में साइबर हमलों के क्षेत्र में एआई उपकरण हमलावर पक्ष को अधिक सक्षम बना सकते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षा प्रणालियों को भी उसी गति से विकसित करना होगा।
गेट्स ने इस सवाल पर भी चर्चा की कि क्या भविष्य में अधिक सक्षम एआई प्रणालियां हमेशा मानव नियंत्रण में रह सकेंगी। उन्होंने कहा कि एआई को नियंत्रण में रखने का मुद्दा लंबे समय तक भविष्य की चिंता माना जाता रहा, लेकिन हाल के कुछ उदाहरणों में रिइन्फोर्समेंट लर्निंग आधारित प्रणालियों ने अप्रत्याशित व्यवहार दिखाया है, जिससे इस विषय पर नए सवाल खड़े हुए हैं।
--आईएएनएस
डीबीपी
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इस्राइली हमले में 20 फलस्तीनियों की मौत, सात मंजिला इमारत ढहने की वजह से हुआ हादसा
गाजा सिटी में रातभर हुई बमबारी के बीच एक सात मंजिला इमारत ढह गई. इस हादसे में कम से कम 20 फिलिस्तीनियों की मौत की खबर है, जिनमें पांच बच्चे भी शामिल हैं. वहीं, 100 से ज्यादा लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई गई है. इमारत में करीब 10 परिवार रह रहे थे. हादसे में 14 लोग घायल हुए हैं. बचाव दल मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए लगातार अभियान चला रहा है.
यह हादसा गाजा सिटी के तल अल-हवा इलाके में हुआ. स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, इमारत पहले से ही युद्ध के दौरान हुए हमलों से क्षतिग्रस्त थी. ऐसे में ढांचा कमजोर हो चुका था. बुधवार रात इमारत के अचानक गिरने के बाद आसपास रहने वाले लोगों में अफरा-तफरी मच गई. बचावकर्मियों ने मलबे के नीचे से लोगों की आवाजें सुनने की बात कही है, जिससे कुछ लोगों के अभी जिंदा होने की उम्मीद बनी हुई है.
मलबे में दबे लोगों को निकालने की कोशिश
गाजा की सिविल डिफेंस टीम के निदेशक राएड अल-दहशान के मुताबिक, राहत और बचावकर्मियों को मलबे के नीचे से लोगों के आवाज लगाने की आवाजें सुनाई दे रही हैं. ऐसे में टीमों की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को जिंदा बाहर निकाला जा सके.
घटनास्थल से सामने आए वीडियो में बचावकर्मियों को गिरी हुई दीवार के नीचे फंसे दो लोगों को बाहर निकालने की कोशिश करते देखा गया. हालांकि, राहत कार्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती भारी मशीनरी और जरूरी उपकरणों की कमी है. मलबा हटाने के लिए पर्याप्त मशीनें उपलब्ध नहीं होने के कारण कई जगह स्थानीय लोग और बचावकर्मी अपने हाथों से मलबा हटाने की कोशिश कर रहे हैं.
10 परिवार इमारत में रह रहे थे
रिपोर्ट के मुताबिक, जिस सात मंजिला इमारत के गिरने की घटना हुई, उसमें कम से कम 10 परिवार रह रहे थे. युद्ध के दौरान बड़ी संख्या में इमारतें क्षतिग्रस्त होने के कारण गाजा में हजारों लोग सुरक्षित आवास की कमी से जूझ रहे हैं. कई परिवार ऐसी इमारतों में रहने को मजबूर हैं, जिन्हें पहले हुए हमलों में नुकसान पहुंच चुका है.
रॉयटर्स के अनुसार, गाजा में करीब 2,000 क्षतिग्रस्त इमारतों में अब भी बड़ी संख्या में लोग रह रहे हैं. इन इमारतों की संरचनात्मक स्थिति कमजोर होने के कारण उनके गिरने का खतरा बना हुआ है.
बचाव अभियान में संयुक्त राष्ट्र की टीमें भी शामिल
बचाव अभियान में स्थानीय सिविल डिफेंस कर्मियों के साथ संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी एजेंसियों और मिस्र की राहत एजेंसी के कर्मियों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के गाजा कार्यालय के प्रमुख एलेसांद्रो म्राकिक ने बचाव अभियान की मुश्किल परिस्थितियों का जिक्र किया.
उन्होंने बताया कि जरूरी भारी उपकरण और मशीनरी की कमी के कारण राहतकर्मियों को मलबा हटाने में काफी कठिनाई हो रही है. कई लोग हाथों से मलबा हटाकर अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. अधिकारियों ने आशंका जताई है कि आने वाले समय में कमजोर इमारतों के गिरने का खतरा और बढ़ सकता है.
करीब 400 इमारतों पर गिरने का खतरा
संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी के अनुसार, गाजा में करीब 400 ऐसी इमारतें हैं जिनके गिरने का खतरा बना हुआ है. सर्दियों के मौसम के करीब आने के साथ यह जोखिम और गंभीर हो सकता है. युद्ध से प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में लोग क्षतिग्रस्त मकानों या अस्थायी ठिकानों में रह रहे हैं. इस घटना ने गाजा में युद्ध के बाद पैदा हुए आवास और मानवीय संकट को एक बार फिर सामने ला दिया है. लंबे समय से जारी संघर्ष के कारण बड़ी संख्या में घर और इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं. ऐसे में विस्थापित परिवारों के लिए सुरक्षित स्थानों की कमी बनी हुई है.
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