क्या है ISA, क्यों बाहर हुआ अमेरिका, इससे भारत पर क्या पड़ेगा असर?
इमेजिन कीजिए कि आप एक घर में रहते हैं और आपका घर टूट रहा है। लेकिन आपको लगता है कि आपका घर टूट नहीं रहा बल्कि यह आपके खिलाफ साजिश है ताकि आपको ज्यादा पैसा कमाने से रोका जा सके। यही हाल अमेरिका के राष्ट्रपति का भी है। अमेरिका के राष्ट्रपति को लगता है जलवायु परिवर्तन तो हो ही नहीं रहा है। जलवायु परिवर्तन केवल एक दिखावा है जिसकी वजह से अमेरिकी लोगों की जॉब छीनी जा रही है। कि जिसकी वजह से अमेरिकी लोगों का रोजगार जा रहा है। तो ये एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम जो है अमेरिका के राष्ट्रपति की को की तरफ से देखने को मिलेगी और इसी वजह से इसी की तरफ आगे बढ़ते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 66 इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशंस और ट्रीटीज ऐसी हैं जिनसे अपने आप को बाहर कर लिया है। जिसमें यूएनएफ ट्रिपल सी शामिल है जिसमें आपका इंटरनेशनल सोलर अलायंस शामिल है।
इंटरनैशनल सोलर एनर्जी क्या है
भारत और फ्रांस की साझा पहल पर अस्तित्व में अया इंटरनैशनल सोलर अलायंस (ISA) आन दुनिया ने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाला एक अहम अंतर-सरकारी संगठन बन चुका है। करीब एक दशक पहले बतौर परिकल्पन सामने आया यह गठबंधन संधि-आधारित है और इसका मुख्य उद्देश्य सौर ऊर्जा के उपयोग को वैश्विक स्तर पर प्रोत्साहित करना है, ताकि स्वच्छ, सस्ती और टिकाऊ ऊन सभी तक पहुंच सके। इंटरनैशनल सोलर अलायंस की पहले घोषण वर्ष 2015 में पेरिस में आयोजित जलवायु सम्मेलन COP21 के दौरान की गई थी। भरत के पीएम नरेन्द्र मोदी और उस समय प्रबंस के राष्ट्रपति फ्रांसिस ओलांद ने मिलकर इस पहल का ऐलान किया था।
क्या है ISA और कैसे करता है काम?
सोलर एनर्जी को लेकर एकीकृत प्लैटफॉर्म इंटरनैशनल सोलर अलायस सोलर एनजीं के लिए एकीकृत वैश्विक प्लैटफॉर्म के रूप में काम करता है। इसकी वेबसाइट के अनुसार, यह अपने एनालिटिक्स और एडवोकेसी के जरिए सौर ऊर्जा से जुड़ी अनुकूल नीतियों को बढ़ावा देता है।
ट्रंप के फैसले से क्या फर्क पड़ेगा?
2022 से 2025 के बीच अमेरिका से ISA को आर्थिक योगदान निला। अमेरिका के बाहर होने से जलवायु परिवर्तन और बीन एनर्जी के वैश्विक प्रयासों को यह एक राजनीतिक और कूटनीतिक झटका जरूर माना जाएगा।
डिप्लोमेसी का अहम अंग कैसे?
इंटरनैशनल सोलर अलायस भारत की तस कूटनीतिक रणनैति का अहम हिस्सा है. जिसके जरिए वह ग्लोबल साउथ के मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रमुखता से उज्जल रहा है।
Pakistan का बड़ा कबूलनामा, IMF के सामने मानी SIFC में पारदर्शिता की भारी कमी
पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि विशेष निवेश सुविधा परिषद (एसआईएफसी) में संस्थागत पारदर्शिता का अभाव है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने चेतावनी दी है कि यह खामी निवेशकों के विश्वास को और नुकसान पहुंचा सकती है और नीतिगत स्थिरता को कमजोर कर सकती है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, यह स्वीकारोक्ति सरकार के 240 पृष्ठों वाले प्रधानमंत्री के आर्थिक शासन सुधार एजेंडा में सामने आई है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, मंत्रालय ने 7 अरब अमेरिकी डॉलर के ऋण कार्यक्रम के तहत आईएमएफ के शासन और भ्रष्टाचार निदान मूल्यांकन की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए यह रिपोर्ट तैयार की है।
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दस्तावेज़ में उल्लेख किया गया है कि एसआईएफसी के भीतर अस्पष्ट निर्णय लेने की प्रक्रियाएं, विशेष रूप से रणनीतिक निवेश रियायतों और नियामक छूटों के संबंध में, सूचना अंतराल पैदा करती हैं जिससे शासन संबंधी जोखिम बढ़ जाते हैं। 2023 में खाड़ी देशों द्वारा पाकिस्तान की नौकरशाही अव्यवस्था पर चिंता व्यक्त करने के बाद निवेश के लिए एक एकल-खिड़की सुविधा के रूप में स्थापित एसआईएफसी कुछ प्रक्रियात्मक बाधाओं को दूर करने में सफल रहा है। हालांकि, प्रमुख संरचनात्मक समस्याएं, अनिश्चित कराधान, ऊर्जा दरों में भारी वृद्धि, कमजोर बाहरी सहायता और सीमित राजकोषीय संसाधन निवेश की संभावनाओं पर लगातार प्रतिकूल प्रभाव डाल रहे हैं।
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कृषि और खनन से लेकर रक्षा, पर्यटन और आईटी तक के क्षेत्रों में विदेशी पूंजी आकर्षित करने के अपने दायित्व के बावजूद, एसआईएफसी कोई बड़ा विदेशी निवेश हासिल नहीं कर पाया है। पिछले महीने, इसके राष्ट्रीय समन्वयक, लेफ्टिनेंट जनरल सरफराज अहमद ने सार्वजनिक रूप से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्रवाह को बाधित करने वाली कई बाधाओं की पहचान की।
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