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EPFO Wage Ceiling Hike: देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है. प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ के तहत अनिवार्य योगदान के लिए वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर सीधे 25,000 रुपये प्रति माह करने का फैसला लिया गया है.
इस बड़े फैसले से असंगठित और संगठित क्षेत्र की सीमा पर खड़े 51 लाख से अधिक नए कर्मचारियों को सीधे तौर पर ईपीएफओ के सामाजिक सुरक्षा दायरे में लाया जा सकेगा. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संवाददाताओं को इस महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि यह कदम कर्मचारियों की बहुत पुरानी मांग को पूरा करता है और इससे उनकी सेवानिवृत्ति के बाद की जिंदगी पहले से कहीं अधिक सुरक्षित हो सकेगी.
सालाना सरकारी खजाने पर आएगा 11 हजार करोड़ का भार
इस नए फैसले को जमीन पर उतारने के लिए सरकार ने अपनी वित्तीय प्रतिबद्धता भी पूरी तरह स्पष्ट कर दी है. सरकार का अनुमान है कि इस नई व्यवस्था के लागू होने से सरकारी खजाने पर हर साल लगभग 11,339 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा. केंद्रीय मंत्री के अनुसार जो कर्मचारी अब तक 15,000 रुपये से लेकर 25,000 रुपये प्रति माह के वेतन दायरे में आते थे और अनिवार्य पीएफ के लाभ से बाहर रह जाते थे, वे अब पूरी तरह से संशोधित पीएफ नियमों के अंतर्गत आ जाएंगे. सरकार का मानना है कि कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए किया जाने वाला यह खर्च दरअसल देश के कार्यबल के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में किया गया एक बहुत बड़ा निवेश है.
पूरे 12 साल के लंबे इंतजार के बाद हुआ यह बड़ा बदलाव
ईपीएफओ के नियमों के इतिहास को देखें तो वेतन सीमा में संशोधन बहुत लंबे समय के अंतराल पर होता रहा है. साल 2004 से लेकर 2014 तक ईपीएफओ की वेतन सीमा में कोई बदलाव नहीं हुआ था और यह केवल 6,500 रुपये प्रति माह पर ही टिकी रही थी. इसके बाद सितंबर 2014 में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए इस सीमा को बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति माह किया था. साल 2014 के बाद अब पूरे 12 साल के लंबे अंतराल के बाद इस सीमा को 15,000 से बढ़ाकर 25,000 रुपये किया गया है. इतने सालों में देश की अर्थव्यवस्था, महंगाई दर और कर्मचारियों की आय के स्तर में बहुत बड़ा अंतर आ चुका था, जिसके कारण इस संशोधन की सख्त जरूरत महसूस की जा रही थी.
वेतन वृद्धि और जीवन स्तर को ध्यान में रखकर लिया गया निर्णय
केंद्र सरकार ने अपने आधिकारिक बयान में यह साफ किया है कि वेतन सीमा में बढ़ोतरी का यह कदम देश में लगातार बढ़ रही औसत आय, न्यूनतम मजदूरी और संगठित रोजगार के विस्तार को ध्यान में रखकर उठाया गया है. पिछले बारह वर्षों में कर्मचारियों के रहन-सहन की लागत यानी जीवन यापन के खर्च में भारी इजाफा हुआ है. विभिन्न श्रम और रोजगार आंकड़ों से यह स्पष्ट हुआ है कि आज देश में एक नियमित वेतनभोगी कर्मचारी की औसत मासिक आय लगभग 23,000 रुपये के करीब पहुंच चुकी है. ऐसी स्थिति में 15,000 रुपये की पुरानी सीमा पूरी तरह अप्रासंगिक हो चुकी थी और लाखों कर्मचारी बेहतर सामाजिक सुरक्षा से वंचित हो रहे थे.
लाखों परिवारों के भविष्य को मिलेगी मजबूत वित्तीय गारंटी
ईपीएफओ की वेतन सीमा बढ़ने का सीधा और सबसे बड़ा फायदा कर्मचारियों की बचत पर दिखाई देगा. वेतन का एक तय हिस्सा पीएफ खाते में जाने से कर्मचारियों की लंबी अवधि की बचत बढ़ेगी, जिस पर उन्हें बेहतर ब्याज दर का लाभ भी मिलेगा. इसके अलावा कर्मचारियों को कर्मचारी पेंशन योजना यानी ईपीएस और जीवन बीमा से जुड़ी सुविधाओं का भी स्वतः लाभ मिल सकेगा.
निजी कंपनियों में काम करने वाले निम्न मध्यम वर्ग के उन लाखों युवाओं के लिए यह फैसला एक वरदान साबित होगा, जो 20 से 25 हजार रुपये के दायरे में काम कर रहे थे और किसी औपचारिक पेंशन या बचत योजना का हिस्सा नहीं बन पा रहे थे. अब उनके सेवानिवृत्ति के वर्षों को एक मजबूत आर्थिक सुरक्षा घेरा मिल जाएगा.
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