Jharkhand News: झारखंड के हर विधानसभा में बनेगा कोल्ड स्टोरेज-मार्केटिंग सेंटर, किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा
Jharkhand News: झारखंड सरकार राज्य के हर विधानसभा क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज के साथ मार्केटिंग सेंटर बनाने की योजना पर काम कर रही है. कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने अधिकारियों को इस योजना की विस्तृत और आधुनिक रूपरेखा तैयार करने का निर्देश दिया है. इसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कराने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन अब तक मिली रिपोर्ट से विभाग पूरी तरह संतुष्ट नहीं है.
बेहतर कंपनियों से ली जाएगी तकनीकी सलाह
कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने अधिकारियों से कहा कि देशभर में आधुनिक लॉजिस्टिक्स और शीत शृंखला यानी कोल्ड चेन की बेहतर व्यवस्था विकसित करने वाली प्रमुख कंपनियों को सलाह के लिए आमंत्रित किया जाए. इन कंपनियों से तकनीकी सुझाव लेकर परियोजना की योजना को और बेहतर बनाया जाए. मंत्री ने कहा कि यह सरकार की बड़ी और लंबे समय तक चलने वाली परियोजना है. इसमें बड़ी राशि खर्च होगी, इसलिए शुरुआत से ही आधुनिक तकनीक, ऊर्जा की बचत, बेहतर लॉजिस्टिक्स, मार्केटिंग और भविष्य की जरूरतों का ध्यान रखना जरूरी है.
सिमडेगा दौरे के दौरान कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की ने जलडेगा एवं ठेठईटांगर प्रखंड के कोनमेरला और कहुपानी गांव पहुंचकर लाह की खेती का अवलोकन किया तथा किसानों से सीधा संवाद किया। pic.twitter.com/GLOUQNy2CO
— Dept. of Agri, Animal & Coop Govt. of Jharkhand (@AgriJharkhand) September 16, 2026
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की नेपाल हाउस स्थित सभागार में सहकारिता प्रभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर रही थीं. बैठक में विभाग के बजट, अब तक हुए खर्च, बेहतर प्रदर्शन करने वाली योजनाओं और चालू वित्तीय वर्ष में शुरू की गई नई योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई. इस दौरान योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही समस्याओं और सुधार की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई.
20 जिलों में 5000 मीट्रिक टन क्षमता के कोल्ड स्टोरेज
मंत्री ने बताया कि राज्य के करीब 20 जिलों में 5,000 मीट्रिक टन क्षमता वाले कोल्ड स्टोरेज बनाए गए हैं. सरकार अब कोल्ड स्टोरेज को मार्केटिंग सेंटर से जोड़कर किसानों को उनकी उपज रखने और बेचने की बेहतर सुविधा देना चाहती है. इससे किसानों को फसल के उचित बाजार और बेहतर मूल्य तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है.
लाह उत्पादन के लिए किसानों को मिलेंगे पौधे
बैठक में झास्कोलैम्प्स की ‘लाह पोषक समृद्धि योजना’ की भी समीक्षा हुई. योजना के तहत लाभुकों को 400 सीमियालता, पांच कुसुम, पांच बेर और 20 कैलियेंड्रा या कैलोथायरस के पौधे दिए जाएंगे. सीमियालता लगभग एक साल में लाह उत्पादन के लिए तैयार हो जाती है. करीब 20 डिसमिल जमीन पर एकीकृत खेती को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि किसान लाह के साथ दूसरी कृषि गतिविधियों से भी आय प्राप्त कर सकें.
मड़ुआ से बच्चों को पोषण, किसानों को बाजार
सिद्धकोफेड के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई. इसके तहत प्रधानमंत्री पोषण योजना के अंतर्गत सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन के लिए मड़ुआ यानी रागी के आटे की आपूर्ति करने की योजना है. पायलट प्रोजेक्ट में रांची, खूंटी और सरायकेला-खरसावां को शामिल किया गया है. शिक्षा विभाग से इस संबंध में पत्राचार किया जा चुका है. मंत्री ने कहा कि इससे स्थानीय किसानों को मड़ुआ की उपज के लिए सुनिश्चित बाजार मिलेगा और बच्चों को पौष्टिक भोजन भी उपलब्ध कराया जा सकेगा.
बैठक में विभाग के सचिव, विशेष सचिव, निबंधक, सहकारी समितियों तथा झास्कोलैम्प्स, झमकोफेड, सिद्धकोफेड, झास्कोफिश और झारखंड मिल्क फेडरेशन के प्रबंध निदेशक मौजूद रहे. मंत्री ने सभी योजनाओं को समय पर पूरा करने, पारदर्शिता बनाए रखने, तकनीकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने और किसानों को सीधे लाभ पहुंचाने का निर्देश दिया.
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