PM Vishwakarma Yojana: ट्रेनिंग के साथ मिले पैसे और मशीन, Udhampur के कारीगरों की बढ़ी कमाई
जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में स्थानीय कारीगरों के लिए PM विश्वकर्मा योजना के तहत एक ट्रेनिंग प्रोग्राम और वर्कशॉप आयोजित की गई। इसका मकसद पारंपरिक हुनर को बढ़ावा देना और अलग-अलग कामों में लगे लोगों के लिए रोज़गार के मौके बढ़ाना था। इस योजना के तहत ट्रेनिंग ले रहे मुश्ताक ने बताया कि उन्होंने ट्रेनिंग का शुरुआती चरण पूरा कर लिया है और अब वे एडवांस्ड कोर्स कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "मैं PM विश्वकर्मा योजना के तहत ट्रेनिंग ले रहा हूँ। मैंने पहले पाँच दिन की ट्रेनिंग पूरी कर ली थी और पेमेंट व मशीनरी भी मिल गई थी। अब मैं 15 दिन की एडवांस्ड ट्रेनिंग ले रहा हूँ।" उन्होंने अपनी आजीविका में मदद के लिए PM मोदी का भी शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा, "इसकी वजह से हम भी आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने जो शानदार योजना शुरू की है, उसके कारण। अब तक हमें इसके बारे में कुछ भी पता नहीं था। जैसे, अगर कोई दर्जी है, तो हमें उन 18 योजनाओं में से किसी के बारे में भी कोई जानकारी नहीं थी। आज हम सच में मोदी जी का तहे दिल से शुक्रिया अदा करना चाहते हैं।
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मंतलाई के ही रहने वाले मुश्ताक अहमद ने कहा, "इस स्कीम के तहत, मैं यहाँ सेंटर पर ट्रेनिंग ले रहा हूँ। मैं प्रधानमंत्री की इस पहल के लिए सच में शुक्रगुजार हूँ। वे पैसे और ट्रेनिंग दोनों दे रहे हैं, ठीक वैसे ही जैसे उन्होंने पहले मशीनें और पैसे दिए थे।" पुराने दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा, "पहले यहाँ के लोग पारंपरिक कपड़े पहनते थे, जैसे सादे देसी शर्ट और कुर्ते। लेकिन अब, जैसा कि हम अपने फ़ोन पर देखते हैं, बहुत से युवा और नए लोग हमसे उनके लिए भी वैसी ही चीज़ें बनाने के लिए कहते हैं। इसी वजह से, हम यहाँ इसकी ट्रेनिंग ले रहे हैं और असल में ऐसा काम कर रहे हैं।" वर्कशॉप में मौजूद सीमा नाम की एक महिला ने कहा, "मोदी जी ने हमें एक पहचान दी है। उन्होंने महिलाओं के लिए इतनी मज़बूत पहचान बनाई है कि अब पूरा भारत जानता है कि हम कौन हैं। हमने पहले भी यह ट्रेनिंग ली है, और अब एडवांस्ड ट्रेनिंग चल रही है। हमने पहले 5 दिन की ट्रेनिंग ली थी, और तब हमें हर दिन 500 रुपये मिलते थे। अब वे 15 दिन की एडवांस्ड ट्रेनिंग चला रहे हैं।
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उन्होंने हमें सामान भी दिया है।" उन्होंने आगे कहा, "इससे पहले, हमें सिलाई-बुनाई के बारे में कुछ नहीं पता था, लेकिन उन्होंने हमें स्केल और बाकी चीज़ें दीं ताकि हम पलाज़ो, गाउन और ब्लाउज़ की कटिंग सीख सकें। पहले हमें इसके बारे में कुछ नहीं पता था; हम बस घर पर बैठे रहते थे और कुछ नहीं जानते थे। हम विश्वकर्मा योजना के तहत सीख रहे हैं, और इतनी अच्छी ट्रेनिंग देने के लिए हम पीएम मोदी का शुक्रिया अदा करना चाहते हैं।" केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई पीएम विश्वकर्मा योजना का मकसद पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को स्किल ट्रेनिंग, आर्थिक मदद, आधुनिक उपकरण और बाज़ार से जोड़ने की सुविधा देकर उनके काम और रोज़ी-रोटी को बेहतर बनाने में मदद करना है। इस पहल का मकसद पारंपरिक हुनर को बचाए रखना और साथ ही लाभार्थियों को व्यवस्थित ट्रेनिंग और मदद के ज़रिए उनकी कमाई की क्षमता को बढ़ाने में सक्षम बनाना है।
इधर विपक्ष UPI पर हल्ला मचाता रह गया, उधर Modi Cabinet ने EPF पर बड़ा निर्णय ले लिया
इधर विपक्ष यूपीआई पर संभावित शुल्क को लेकर हो-हल्ला मचाता रह गया, उधर मोदी सरकार ने कर्मचारियों के हित में बड़ा फैसला कर लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा दायरे को बढ़ाने से जुड़ा महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए मासिक वेतन सीमा को 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। मोदी सरकार का अनुमान है कि इस फैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य EPFO कवरेज के दायरे में आ जाएंगे।
कैबिनेट के फैसले की जानकारी सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मीडिया को दी। सरकार का कहना है कि वेतन सीमा में यह वृद्धि बदलती आय, बढ़ते वेतन और औपचारिक रोजगार के विस्तार को ध्यान में रखते हुए की गई है। मौजूदा व्यवस्था में 15 हजार रुपये मासिक वेतन सीमा महत्वपूर्ण थी। अब इसे 25 हजार रुपये किए जाने से 15 हजार से 25 हजार रुपये तक मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग वैधानिक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में आएगा।
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हम आपको बता दें कि EPFO की वेतन सीमा लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। वर्ष 2004 से 2014 के बीच इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ था। सितंबर 2014 में इसे बढ़ाकर 15 हजार रुपये किया गया था। इसके बाद पिछले एक दशक में वेतन और आय के स्तर में लगातार वृद्धि हुई है। कई राज्यों और विभिन्न क्षेत्रों में न्यूनतम मजदूरी भी मौजूदा 15 हजार रुपये की सीमा के करीब पहुंच चुकी है। ऐसे में सरकार ने नई सीमा को मौजूदा आर्थिक और रोजगार परिस्थितियों के अनुरूप बनाने का फैसला किया है।
इस बदलाव का सबसे सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा, जिनका वेतन अब तक 15 हजार रुपये से अधिक होने के कारण अनिवार्य EPF व्यवस्था के दायरे में नहीं आता था। नई सीमा लागू होने के बाद पात्र कर्मचारियों को प्रॉविडेंट फंड बचत, कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना (EDLI) जैसी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्थाओं तक पहुंच मिलेगी। हालांकि इन योजनाओं के लाभ संबंधित नियमों और पात्रता शर्तों के अनुसार ही मिलेंगे।
सरकार के मुताबिक, इस फैसले से औपचारिक रोजगार को बढ़ावा मिलने की भी उम्मीद है। EPFO जैसी वैधानिक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ने के कारण कर्मचारियों को भविष्य की सेवानिवृत्ति सुरक्षा के साथ-साथ नौकरी बदलने की स्थिति में सामाजिक सुरक्षा लाभों की पोर्टेबिलिटी का फायदा मिलता है। सरकार का मानना है कि व्यापक कवरेज से कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा मजबूत होगी और नियोक्ताओं के स्तर पर भी कर्मचारी स्थिरता तथा रिटेंशन को बढ़ावा मिल सकता है।
हम आपको यह भी बता दें कि इस प्रस्ताव पर अंतर-मंत्रालयी स्तर पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया था। व्यय वित्त समिति ने भी 16 जून 2026 को हुई बैठक में इसकी सिफारिश की थी। संशोधित व्यवस्था के तहत सरकार का अनुमानित वार्षिक खर्च करीब 11,339 करोड़ रुपये होगा, जबकि मौजूदा व्यवस्था में लगभग 10,250 करोड़ रुपये का वार्षिक बजटीय समर्थन दिया जाता है। पांच वर्षों में कुल अनुमानित खर्च करीब 56,696 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।
EPFO के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, करीब 7.98 करोड़ सदस्य लगभग 7.68 लाख योगदान करने वाले प्रतिष्ठानों के माध्यम से योगदान कर रहे हैं। वहीं, कर्मचारी पेंशन योजना के तहत करीब 82 लाख पेंशनभोगियों को पेंशन लाभ मिल रहा है। नई वेतन सीमा के साथ सरकार का लक्ष्य सामाजिक सुरक्षा के इस नेटवर्क को और व्यापक बनाना है। देखा जाये तो इस फैसले को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब केंद्र सरकार रोजगार को अधिक औपचारिक बनाने और सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने पर जोर दे रही है। हाल के वर्षों में EPFO से जुड़े कई सुधारों और कर्मचारी नामांकन अभियानों के जरिए भी ज्यादा से ज्यादा कर्मचारियों को औपचारिक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ने की कोशिश की गई है।
हम आपको यह भी बता दें कि सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि 17 सितम्बर 2026 को विश्वकर्मा दिवस पर यह योजना लागू कर दी जायेगी।
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