Hair Care Tips : शिकाकाई से बालों को क्यों धोती हैं पहाड़ी औरतें? फायदे जान भूल जाओगे शैंपू, ये रहा तरीका
Shikakai Benefits : उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में शिकाकाई और रीठा का उपयोग बालों की देखभाल के लिए किया जाता है. ये प्राकृतिक उत्पाद रसायन-मुक्त विकल्प देते हैं. शिकाकाई एक फलदार झाड़ी या छोटे पेड़ पर लगने वाला प्राकृतिक फल है. इसके सूखे फल को पानी में भिगोकर या उबालकर बाल धोए जाते हैं. शिकाकाई की फलियां पकने के बाद सुखाकर सुरक्षित रखी जाती हैं. शिकाकाई में सैपोनिन नामक यौगिक पाया जाता है, जो पानी के संपर्क में आने पर हल्का झाग बनाते हैं. इसका नियमित रूप से सही इस्तेमाल करने पर बाल मुलायम और साफ हो जाते हैं. पहाड़ों पर शिकाकाई और रीठे का इस्तेमाल अक्सर एक साथ किया जाता है. रीठे में भी प्राकृतिक सैपोनिन पाए जाते हैं.
जैन लोग प्याज-लहसुन क्यों नहीं खाते? ‘भाभीजी घर पर हैं’ के सानंद वर्मा ने पूछा सवाल, महाराज का जवाब हुआ वायरल
जैन धर्म में प्याज-लहसुन के साथ आलू, गाजर और मूली जैसी कई जड़ वाली सब्जियों से भी परहेज किया जाता है. लेकिन आखिर इसके पीछे वजह क्या है? सानंद वर्मा के इसी सवाल पर सुधा सागरजी महाराज का जवाब सोशल मीडिया पर चर्चा में है...
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