WPL 2027 ऑक्शन 29 अक्टूबर को कोच्चि में संभव:ब्रेबॉर्न में मैच तय, वाराणसी के नए स्टेडियम का मुआयना करेगी BCCI
विमेंस प्रीमियर लीग 2027 का ऑक्शन 29 अक्टूबर को कोच्चि में होने की संभावना है। मंगलवार को हुई WPL गवर्निंग काउंसिल की वर्चुअल बैठक में अगले सीजन के वेन्यू पर भी चर्चा हुई। मुंबई के ब्रेबॉर्न स्टेडियम में मैच कराने का फैसला लिया गया है, जबकि दूसरे वेन्यू के लिए वडोदरा के कोटाम्बी स्टेडियम और वाराणसी के नए स्टेडियम के नाम पर विचार चल रहा है। जनवरी तक तैयार हुआ तो वाराणसी में होंगे मैच BCCI की क्रिकेट ऑपरेशंस टीम वाराणसी के नए स्टेडियम का मुआयना करेगी। टीम स्टेडियम की सुविधाओं और मैच कराने की तैयारियों का जायजा लेगी। यदि स्टेडियम जनवरी तक तैयार हो जाता है, तो वहां WPL के मैच कराए जा सकते हैं। नए वेन्यू पर टूर्नामेंट से पहले कुछ घरेलू या प्रैक्टिस मैच कराने की भी योजना है। बैठक में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम को भी संभावित वेन्यू के तौर पर चर्चा में शामिल किया गया था। हालांकि, वहां स्थानीय अधिकारियों से कई अनुमतियां लेने की जरूरत है। ब्रेबॉर्न में 2023 और 2025 के फाइनल हुए थे मुंबई के ब्रेबॉर्न स्टेडियम ने WPL के पहले सीजन 2023 और 2025 के फाइनल की मेजबानी की थी। पिछले सीजन में नई फ्लडलाइट्स लगाने के काम के कारण यहां मैच नहीं हो सके थे। यह स्टेडियम 2026-27 रणजी ट्रॉफी में रेलवे टीम का होम ग्राउंड भी होगा, जहां टीम के 3 मुकाबले खेले जाएंगे। ब्रेबॉर्न और वडोदरा का कोटाम्बी स्टेडियम 14 से 28 फरवरी 2027 तक होने वाली 6 टीमों की ICC विमेंस चैंपियंस ट्रॉफी के पहले सीजन की मेजबानी भी करेंगे। वडोदरा में 2026 WPL का फाइनल हुआ था, जिसमें स्मृति मंधाना की कप्तानी वाली RCB ने दिल्ली कैपिटल्स को 6 विकेट से हराया था। IPL के इम्पैक्ट प्लेयर नियम पर अगले महीने फैसला मंगलवार को हुई IPL गवर्निंग काउंसिल की बैठक में इम्पैक्ट प्लेयर नियम पर अंतिम फैसला नहीं हो सका। BCCI ने सभी 10 फ्रेंचाइजियों से इस नियम पर लिखित फीडबैक मांगा था। ज्यादातर टीमों ने नियम को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। इन सुझावों की समीक्षा के बाद अगले महीने होने वाली बैठक में नियम को बनाए रखने, बदलने या हटाने पर फैसला लिया जाएगा। इम्पैक्ट प्लेयर नियम के तहत मैच के दौरान किसी भी समय एक अतिरिक्त बल्लेबाज या गेंदबाज को मैदान में उतारा जा सकता है। इस नियम से टीमों की बल्लेबाजी गहराई बढ़ी है और IPL में बड़े स्कोर देखने को मिले हैं। हालांकि, कई क्रिकेटरों और फ्रेंचाइजियों ने कहा है कि इससे भारतीय क्रिकेट में ऑलराउंडरों के विकास पर असर पड़ सकता है।
यूपीआई एमडीआर में 'विदेशी हस्तक्षेप' के दावे को वित्त मंत्रालय ने किया खारिज
नई दिल्ली, 16 सितंबर (आईएएनएस)। वित्त मंत्रालय ने बुधवार को उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया कि यूपीआई में एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) को पेश करने की वजह विदेशी हस्तक्षेप है। साथ ही, कहा कि भारत अपने डिजिटल पेमेंट सिस्टम को लेकर निर्णय स्वतंत्रता के साथ लेता है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंत्रालय ने कहा कि 2016 में लॉन्च के बाद से यूपीआई दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम इंटरऑपरेबल पेमेंट सिस्टम बन गया है और यह पूरी तरह से भारत की अपनी शर्तों पर हुआ है।
मंत्रालय ने आगे विदेशी हस्तक्षेप के दावों को गलत बताते हुए कहा कि भारत की यूपीआई पॉलिसी से जुड़े फैसले स्वतंत्र रूप से लिए जाते हैं, और इनका स्पष्ट मकसद एक ऐसा डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम बनाना है जो खुद पर निर्भर हो, सभी को शामिल करने वाला हो और किफायती हो।
सरकार के अनुसार, अकेले अगस्त 2026 में यूपीआई के जरिए 24.5 अरब ट्रांजैक्शन हुए। इस सिस्टम को खुद-ब-खुद चलने लायक, सुरक्षित और इनोवेटिव बनाए रखने के लिए, ज्यादा कीमत वाले मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर एक छोटी सी फीस ली जाएगी। इससे बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर और साइबर सिक्योरिटी के लिए फंड मिलेगा और टियर तीन-चार शहरों और ग्रामीण इलाकों में छोटे व्यापारियों को मदद मिलेगी। साथ ही, यूपीआई के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए जागरूकता और इंसेंटिव देने में भी सहायता मिलेगी।
वित्त मंत्रालय ने कहा, नया यूपीआई फ्रेमवर्क यह पक्का करता है कि ज्यादा कीमत वाले मर्चेंट ट्रांजैक्शन से मिलने वाले संसाधनों का इस्तेमाल छोटे व्यवसायों को सहारा देने और पूरे देश में डिजिटल पेमेंट को मजबूत करने के लिए दोबारा किया जाए।
ग्राहकों के लिए यूपीआई का इस्तेमाल अभी भी मुफ्त है। दोस्तों को पैसे भेजना, दुकानों पर पेमेंट करना या क्यूआर कोड स्कैन करना, इन सभी पर कोई चार्ज नहीं लगेगा।
सिर्फ 2,000 रुपए से ज्यादा के बड़े ट्रांजैक्शन पर दुकानदारों को एक छोटा सा चार्ज (0.4 प्रतिशत) देना होगा, जो क्रेडिट कार्ड या दूसरे नेटवर्क चार्ज के मुकाबले बहुत कम है।
रेलवे, फ्यूल, टेलीकॉम, बिल पेमेंट और इंश्योरेंस के मामले में 2,000 रुपए से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर 5 रुपए का फ्लैट चार्ज लगता है, जबकि म्यूचुअल फंड और सिक्योरिटीज के पेमेंट पर सिर्फ 0.02 प्रतिशत चार्ज लगता है, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपए है।
मंत्रालय ने आगे बताया, दुकानदार एमडीआर का खर्च ग्राहकों पर नहीं डाल सकते। यूपीआई ऐप्स भी कोई प्लेटफॉर्म चार्ज नहीं लगा सकते।
--आईएएनएस
एबीएस
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