Gulzar Singh Suicide Case: पंजाब पुलिस की SIT जांच पर सवाल, हाई कोर्ट मांगी स्टेटस रिपोर्ट
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब पुलिस से गुलज़ार सिंह की आत्महत्या की चल रही जांच के बारे में स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। यह निर्देश एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें जांच को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को सौंपने की मांग की गई थी। दिरबा निर्वाचन क्षेत्र के तुर बंजारा गांव के रहने वाले गुलज़ार सिंह ने ड्रग्स की लत से अपने परिवार पर पड़ रहे असर को लेकर चिंता जताने और पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा से सवाल पूछने के बाद आत्महत्या कर ली थी। हालांकि राज्य पुलिस ने मामले की जांच के लिए पहले एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई थी, लेकिन विपक्षी दलों ने शुरुआती FIR में मंत्री का नाम शामिल न किए जाने को लेकर भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार की कड़ी आलोचना की है। हाई कोर्ट ने अब तक हुई प्रगति के बारे में जानकारी मांगते हुए सही जांच सुनिश्चित करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
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गौरतलब है कि पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से 'नशे की समस्या को रोकने में नाकाम रहने' पर सवाल पूछने के बाद कथित तौर पर परेशान किए जाने के कारण दलित मज़दूर गुलज़ार सिंह ने आत्महत्या कर ली। इस घटना ने AAP सरकार को मुश्किल में डाल दिया है, क्योंकि विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी कांग्रेस, बीजेपी और अकाली दल के चौतरफ़ा हमलों का सामना कर रही है। ऐसे समय में जब आप विपक्ष में अपनी अहमियत बनाए रखने के लिए देश में अपनी एकमात्र सरकार को बचाने की पूरी कोशिश कर रही है, इस दुखद घटना ने उसके विरोधियों को एक बड़ा मुद्दा दे दिया है। यह इसलिए भी अहम है क्योंकि पंजाब में अनुसूचित जातियों की आबादी लगभग 32% है, जो किसी भी राज्य में सबसे ज़्यादा है और वे वोटिंग के लिहाज़ से एक बहुत अहम वर्ग हैं।
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इस मामले पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में इस हफ़्ते सुनवाई होने की संभावना है और गुलज़ार सिंह का परिवार भी याचिकाकर्ताओं में शामिल है। अपने बेटे की नशे की लत से परेशान इस दलित मज़दूर ने AAP सरकार के एक प्रभावशाली नेता चीमा से एक जनसभा में सवाल पूछा था कि उनके चुनाव क्षेत्र में आने वाले गाँव में 'चिट्टा' (सिंथेटिक ड्रग) आसानी से क्यों मिल रहा है।
UCC पर रुख तय करने से पहले कानून की समीक्षा करेगी JD(U), Nitish Kumar ने बुलाई बैठक
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर किए गए ऐलान के बाद बिहार में नई राजनीतिक सरगर्मी शुरू हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और JD(U) प्रमुख नीतीश कुमार ने पार्टी के सांसदों, विधायकों और विधान परिषद के सदस्यों की बैठक बुलाई है। यह बैठक 18 सितंबर को पटना में JD(U) दफ्तर में होगी। खबरों के मुताबिक, बैठक में UCC पर चर्चा होने की उम्मीद है और एजेंडे में फरक्का जल संधि (Farakka Water Treaty) भी शामिल हो सकती है।
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यह घटनाक्रम शाह के उस बयान के कुछ दिनों बाद हुआ है जिसमें उन्होंने कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले BJP के नेतृत्व वाले NDA की सरकार वाले सभी 21 राज्यों में UCC लागू किया जाएगा। इस घोषणा ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है, खासकर JD(U) जैसे NDA सहयोगियों के बीच। यह बैठक इसलिए अहम है क्योंकि JD(U) ने अब तक UCC पर सावधानी भरा रुख अपनाया है। बिहार के डिप्टी सीएम और सीनियर JD(U) नेता विजय कुमार चौधरी ने मंगलवार को कहा कि पार्टी अपना रुख तय करने से पहले प्रस्तावित कानून की जांच करेगी।
चौधरी ने कहा कि पार्टी को अभी UCC कानून की डिटेल्स के बारे में जानकारी नहीं है और वह अपनी कोई भी चिंता केंद्रीय गृह मंत्री तक पहुंचाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में जल्दबाजी करने की कोई वजह नहीं है। चौधरी ने कहा कि अगर हमें इसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं लगता है, तो हम बिना किसी वजह के इसका विरोध क्यों करेंगे? और अगर चिंता की कोई बात होगी, तो उसे केंद्रीय गृह मंत्री को बताया जाएगा।
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JD(U) के नेशनल वर्किंग प्रेसिडेंट संजय कुमार झा ने भी संकेत दिया है कि पार्टी UCC के मुद्दे पर अमित शाह से बातचीत करेगी। JD(U), जिसके 12 लोकसभा सांसद हैं, BJP के नेतृत्व वाले NDA का एक अहम हिस्सा है और बिहार में BJP के साथ मिलकर सरकार चला रही है।
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