बैंगलुरू ट्रेनिंग पर गए MP के कुछ अधिकारी जल्द होंगे रिटायर, जीतू पटवारी बोले “रिटायरमेंट से पहले सरकारी पर्यटन”
मध्यप्रदेश में कृषि विभाग के अधिकारियों को प्राकृतिक खेती की ट्रेनिंग के लिए बैंगलुरू भेजे जाने को लेकर सियासत शुरू हो गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रशिक्षण के लिए अधिकारियों के चयन पर सवाल उठाते हुए सरकार पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती का ज्ञान किसान के खेत तक कब पहुंचेगा यह पता नहीं, लेकिन सरकारी खर्च पर अधिकारियों की ट्रेनिंग का इंतजाम समय पर हो रहा है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार ऐसे अधिकारियों को भी प्राकृतिक खेती की ट्रेनिंग के लिए भेज रही है, जिनमें कुछ अधिकारी 12 से 90 दिन के भीतर रिटायर होने वाले हैं। उन्होंने इसे लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सेवानिवृत्ति से पहले अधिकारियों को ‘सरकारी पर्यटन’ कराया जा रहा है।
अधिकारियों की ट्रेनिंग
दरअसल कृषि विभाग ने प्राकृतिक खेती की तीन दिवसीय आवासीय ट्रेनिंग के लिए अधिकारियों के पांच बैच तैयार किए हैं। इसमें अपर संचालक से लेकर स्टेट कोआर्डिनेटर स्तर तक के अधिकारी शामिल हैं। प्रशिक्षण का पहला बैच 16 सितंबर से शुरू होना है और अलग-अलग बैच नवंबर के पहले पखवाड़े तक चलेंगे। प्रशिक्षण में प्राकृतिक खेती के साथ योग और ध्यान भी शामिल होने की जानकारी सामने आई है।
ट्रेनिंग के लिए बैंगलुरू स्थित श्रीश्री इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेस एंड टेक्नोलॉजी ने प्रस्ताव दिया था। प्रस्ताव के अनुसार अधिकारियों के ठहरने और प्रशिक्षण से जुड़े खर्च की अलग-अलग दरें तय की गई हैं। एक बैच पर करीब चार से साढ़े चार लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है, जबकि टीए-डीए अलग से दिया जाना है।
जीतू पटवारी ने किए सवाल
कांग्रेस ने खासतौर पर उन अधिकारियों के चयन पर सवाल उठाया है जिनकी सेवानिवृत्ति नजदीक है। जानकारी के अनुसार, सूची में सहायक संचालक सविता श्रीवास्तव का नाम है जिनकी सेवानिवृत्ति 30 सितंबर को होनी है। वहीं अपर संचालक जीपी प्रजापति 31 दिसंबर को रिटायर होने वाले हैं। इसके अलावा संचालनालय में प्रशासन, स्थापना, बजट, योजना, विभागीय जांच और कानूनी मामलों से जुड़े अधिकारियों के नाम भी प्रशिक्षण के लिए भेजे जाने वालों में शामिल हैं। इसे लेकर जीतू पटवारी ने तंज कसते हुए कहा है कि “किसान के खेत तक ज्ञान कब पहुंचेगा पता नहीं, लेकिन सरकारी खर्चे पर अफसरों की ट्रेनिंग का टिकट जरूर समय पर कट रहा है।” उन्होंने कहा कि रिटायरमेंट से पहले सरकारी पर्यटन” करवाने वाली सरकार को सर्कस नहीं कहें तो और क्या कहें। इस तरह कांग्रेस ने ऐसे अधिकारियों को प्रशिक्षण पर भेजने के औचित्य पर सवाल किए हैं।
प्राकृतिक खेती की ट्रेनिंग के नाम पर मोहन बाबू ऐसे अफसरों को भेज रहे हैं, जिनमें कुछ 12 से 90 दिन में रिटायर होने वाले हैं!
किसान के खेत तक ज्ञान कब पहुंचेगा, पता नहीं, लेकिन सरकारी खर्चे पर अफसरों की ट्रेनिंग का टिकट जरूर समय पर कट रहा है!
रिटायरमेंट से पहले,
"सरकारी पर्यटन"… pic.twitter.com/TPZgVYsRs7— Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) September 16, 2026
Middle East Tension: मक्का के पास सऊदी एयर डिफेंस ने हूथी ड्रोन को किया ढेर, गठबंधन ने दी 'रेड लाइन' की सख्त चेतावनी
मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध और अस्थिरता के बीच एक बेहद संवेदनशील और चिंताजनक घटनाक्रम सामने आया है। सऊदी अरब की वायु रक्षा सेना (Royal Saudi Air Defense Forces) ने इस्लाम के सबसे पवित्र शहर मक्का के पास यमन के हूथी विद्रोहियों द्वारा भेजे गए एक आत्मघाती ड्रोन को हवा में ही मार गिराया। इस घटना के तुरंत बाद सऊदी-नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने हूथियों को सीधे तौर पर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि पवित्र स्थलों की सुरक्षा उनके लिए एक 'रेड लाइन' (Red Line) है। सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन के आधिकारिक प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मल्की के अनुसार, मंगलवार शाम (15 सितंबर) को मक्का के दक्षिण में इस ड्रोन को तब इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया गया, जब वह प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने ही वाला था।इसे भी पढ़ें: गद्दारी करने वाले बांग्लादेश के लिए भारत ने दबाया बिजली का बटन, ढाका में हाहाकार
सऊदी गठबंधन ने मक्का को लेकर हूथियों को चेतावनी दी
अल-मल्की ने कहा कि दो पवित्र मस्जिदों और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा एक "रेड लाइन" है। उन्होंने कहा कि गठबंधन की संयुक्त सेना कमान हूथियों के खिलाफ जरूरी और कड़े कदम उठाने में संकोच नहीं करेगी। सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन ने इस घटना को मक्का को निशाना बनाने की दूसरी कथित कोशिश बताया। उन्होंने जुलाई 2017 में बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च की पिछली घटना का जिक्र किया, जिसके बारे में सऊदी अधिकारियों ने कहा था कि उसका लक्ष्य भी पवित्र शहर था। अल-मल्की ने कहा कि ताजा घटना ने दुनिया भर के मुसलमानों के लिए बहुत धार्मिक महत्व वाले शहर को खतरे में डाल दिया और इससे तीर्थयात्रियों, नागरिकों और निवासियों की जान को खतरा हो सकता था।इसे भी पढ़ें: Mecca Pact सिर्फ नाम का, पाकिस्तान नहीं किसी काम का, अब मदद की गुहार के साथ इजरायल की तरफ सऊदी ने किया रुख
हूथियों ने सऊदी दावे को खारिज किया
यह घटनाक्रम यमन में सैन्य अभियानों को लेकर सऊदी अरब और हूथी आंदोलन के बीच बढ़ते आरोपों-प्रत्यारोपों के बीच हुआ है। हूथी सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने पहले दावा किया था कि सऊदी लड़ाकू विमानों ने खमीस मुशेत और ताइफ एयरबेस से F-15 और टाइफून लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल करते हुए 24 घंटे की अवधि में 52 हवाई हमले किए।
सरी ने आरोप लगाया कि इन हमलों में ताइज़ प्रांत में स्कूलों, पुलों और सड़कों सहित नागरिक बुनियादी ढांचे के साथ-साथ अल-जौफ़, अल-बैदा, सादा और अमरान में भी लक्ष्य बनाए गए। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। हूथी प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि कथित सऊदी हमलों का जवाब दिया जाएगा। हूथियों ने सऊदी अरब द्वारा ताजा घटना को मक्का को निशाना बनाने की कोशिश बताने के दावे का भी खंडन किया है।
यमन संघर्ष से इलाके में तनाव बढ़ा
यह ताज़ा घटना यमन, सऊदी अरब और हूथी विद्रोहियों के बीच बढ़ते तनाव के माहौल में हुई है। इन घटनाक्रमों से रणनीतिक रूप से अहम 'बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य' (स्ट्रेट) को लेकर भी चिंताएं बढ़ रही हैं; यह लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाला एक प्रमुख समुद्री रास्ता है। हूथी विद्रोही पहले भी इस इलाके में कमर्शियल जहाजों को निशाना बना चुके हैं, जिससे सुरक्षा संबंधी चिंताएं और बढ़ गई हैं, क्योंकि पश्चिम एशिया में तनाव लगातार फैल रहा है।
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