Suji Idli Recipe: सूजी वेजिटेबल इडली मिनटों में होगी तैयार, नाश्ते के लिए है परफेक्ट डिश, जानें रेसिपी
Suji Idli Recipe: सुबह के नाश्ते में अगर कुछ ऐसा बनाने का मन हो जो स्वादिष्ट होने के साथ जल्दी भी तैयार हो जाए, तो सूजी वेजिटेबल इडली एक बढ़िया विकल्प है। चावल और उड़द दाल की पारंपरिक इडली की तुलना में सूजी से बनने वाली इडली के लिए लंबे समय तक भिगोने और पीसने की जरूरत नहीं पड़ती। इसमें पसंद की सब्जियां मिलाकर इसे और भी पौष्टिक बनाया जा सकता है।
नरम, फूली हुई और स्वाद से भरपूर यह इडली बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आ सकती है। इसे सुबह के नाश्ते के अलावा हल्की भूख लगने पर भी खाया जा सकता है। खास बात यह है कि इसे तैयार करने के लिए घर में मौजूद सामान्य सामग्री ही काफी होती है। आइए जानते हैं सूजी वेजिटेबल इडली बनाने की आसान विधि।
सूजी वेजिटेबल इडली बनाने के लिए सामग्री
- 1 कप सूजी
- 1/2 कप दही
- 1/2 से 3/4 कप पानी
- 1 छोटी गाजर, बारीक कटी
- 1/2 शिमला मिर्च, बारीक कटी
- 2 बड़े चम्मच मटर
- 1-2 हरी मिर्च, बारीक कटी
- 1 छोटा चम्मच अदरक, कद्दूकस किया हुआ
- नमक स्वादानुसार
- 1/2 छोटा चम्मच राई
- 1/2 छोटा चम्मच जीरा
- 5-6 करी पत्ते
- 1 चुटकी हींग
- 1 छोटा चम्मच तेल
- 1/2 छोटा चम्मच ईनो या फ्रूट सॉल्ट
सूजी वेजिटेबल इडली बनाने का तरीका
सबसे पहले तैयार करें इडली का बैटर
एक बड़े बर्तन में सूजी और दही डालकर अच्छी तरह मिलाएं। अब इसमें धीरे-धीरे पानी डालते हुए गाढ़ा लेकिन आसानी से डालने लायक बैटर तैयार करें। इसे करीब 10-15 मिनट के लिए ढककर रख दें, ताकि सूजी अच्छी तरह फूल जाए।
इसके बाद बैटर को चेक करें। अगर यह बहुत गाढ़ा हो गया है तो थोड़ा पानी मिलाकर कंसिस्टेंसी ठीक कर लें। अब इसमें कटी हुई गाजर, शिमला मिर्च, मटर, हरी मिर्च, अदरक और नमक डालकर अच्छी तरह मिला लें।
ऐसे तैयार करें तड़का
एक छोटी कड़ाही में तेल गर्म करें। इसमें राई और जीरा डालें। इनके चटकने के बाद हींग और करी पत्ता डालकर हल्का भून लें। तैयार तड़के को इडली के बैटर में डालकर अच्छी तरह मिला दें। इससे इडली का स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ जाएंगे।
इडली को ऐसे करें स्टीम
इडली बनाने से ठीक पहले बैटर में ईनो या फ्रूट सॉल्ट डालें और ऊपर से थोड़ा पानी डालकर हल्के हाथ से मिलाएं। बैटर को बहुत ज्यादा फेंटने की जरूरत नहीं है।
अब इडली के सांचे में हल्का तेल लगाकर बैटर भरें। स्टीमर में पानी गर्म करें और इडली के सांचे को रखकर करीब 10-12 मिनट तक स्टीम करें। इडली पकने के बाद कुछ मिनट ठंडा होने दें और फिर चम्मच की मदद से सांचे से निकाल लें।
नारियल चटनी या सांभर के साथ करें सर्व
गरमा-गरम सूजी वेजिटेबल इडली को नारियल की चटनी, हरी चटनी या सांभर के साथ परोसा जा सकता है। इसमें आप अपनी पसंद के अनुसार बीन्स, कॉर्न या बारीक कटी अन्य सब्जियां भी मिला सकते हैं। सब्जियों की मात्रा बढ़ाकर इसे नाश्ते में और ज्यादा पौष्टिक बनाया जा सकता है।
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लेखक: (कीर्ति)
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Desi Chana Benefits: रोजाना एक मुट्ठी देसी चना खाएं, डायबिटीज समेत इन समस्याओं में मिस सकती है राहत
Desi Chana Benefits: चना भारतीय खानपान का ऐसा हिस्सा है, जिसे स्वाद के साथ-साथ पोषण के लिए भी जाना जाता है। खासकर देसी चना प्रोटीन, फाइबर, आयरन, फोलेट और कई जरूरी पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत माना जाता है। अगर इसे संतुलित मात्रा में रोजाना डाइट में शामिल किया जाए, तो यह लंबे समय तक पेट भरा रखने और ओवरईटिंग से बचाने में मदद कर सकता है।
डायबिटीज या ब्लड शुगर को लेकर चिंतित लोगों के लिए भी चना उपयोगी विकल्प हो सकता है। इसमें मौजूद फाइबर और प्रोटीन भोजन के बाद ब्लड ग्लूकोज के तेजी से बढ़ने को धीमा करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, सिर्फ चना खाने से डायबिटीज कंट्रोल नहीं होती, बल्कि इसे संतुलित डाइट, नियमित व्यायाम और डॉक्टर की सलाह के साथ लेना चाहिए।
देसी चना खाने के बड़े फायदे
ब्लड शुगर मैनेजमेंट में मददगार
देसी चने में अच्छी मात्रा में डाइटरी फाइबर और प्रोटीन होता है। ये दोनों पोषक तत्व कार्बोहाइड्रेट के पाचन और ग्लूकोज के अवशोषण को धीमा करने में मदद कर सकते हैं। इससे खाने के बाद ब्लड शुगर में अचानक उछाल आने की संभावना कम हो सकती है। डायबिटीज वाले लोगों को फिर भी अपनी मात्रा और कुल कार्बोहाइड्रेट सेवन पर ध्यान देना चाहिए।
वजन नियंत्रित करने में सहायक
एक मुट्ठी चना खाने से लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस हो सकता है। इसका कारण इसमें मौजूद प्रोटीन और फाइबर है। इससे बार-बार कुछ खाने या अनहेल्दी स्नैकिंग की आदत कम करने में मदद मिल सकती है। वजन घटाने के दौरान भी इसे उबले या भुने रूप में सीमित मात्रा में लिया जा सकता है।
पाचन के लिए फायदेमंद
चना फाइबर का अच्छा स्रोत है। पर्याप्त फाइबर लेने से मल को बल्क मिलता है और आंतों की नियमित गतिविधि को सपोर्ट किया जा सकता है। इसलिए डाइट में चना शामिल करना कब्ज जैसी समस्या से बचाव में मदद कर सकता है। लेकिन अगर शरीर को ज्यादा फाइबर की आदत नहीं है, तो अचानक बहुत अधिक चना खाने से गैस या पेट फूलने की समस्या हो सकती है।
दिल की सेहत के लिए भी उपयोगी
संतुलित आहार का हिस्सा बनाकर चना हृदय स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद हो सकता है। इसमें फाइबर, पोटैशियम, मैग्नीशियम और पौधों से मिलने वाला प्रोटीन पाया जाता है। जब चने को तले हुए नमकीन या ज्यादा तेल-मसाले के बजाय साधारण रूप में खाया जाता है, तो यह हेल्दी डाइट का हिस्सा बन सकता है।
शरीर को मिलते हैं जरूरी पोषक तत्व
देसी चना पौधों से मिलने वाले प्रोटीन के साथ आयरन, फोलेट, मैग्नीशियम और अन्य माइक्रोन्यूट्रिएंट्स भी प्रदान करता है। जो लोग मांसाहारी भोजन कम लेते हैं, उनके लिए चना प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों का उपयोगी स्रोत हो सकता है।
कैसे खाएं देसी चना?
चना भिगोकर, उबालकर या हल्का भूनकर खाया जा सकता है। एक सामान्य स्नैक के तौर पर करीब एक छोटी मुट्ठी मात्रा पर्याप्त हो सकती है, लेकिन आपकी कुल डाइट और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार मात्रा अलग हो सकती है। रातभर भिगोया हुआ चना सुबह अच्छी तरह धोकर खाया जा सकता है। यदि चना खाने से लगातार गैस, पेट दर्द या असहजता होती है, तो मात्रा कम करें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लें।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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