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आलिया भट्ट के बॉडीगार्ड ने फैन को किया साइड:सेल्फी लेने करीब पहुंच गया था शख्स, एक्ट्रेस दूसरे फैन्स के साथ तस्वीरें खिंचवा रही थीं

आलिया भट्ट शुक्रवार को मुंबई में अपनी अपकमिंग फिल्म डोंट बी शाय के ट्रेलर लॉन्च इवेंट में पहुंची थीं। इवेंट के बाद बाहर निकलते समय भीड़ के बीच एक फैन उनकी तरफ सेल्फी लेने के लिए बढ़ने लगा और एक्ट्रेस के करीब आने की कोशिश की। इसके बाद उनके बॉडीगार्ड ने फैन को तेजी से साइड कर दिया। हालांकि इस दौरान आलिया का ध्यान फैन की साइड नहीं था और वो दूसरे फैन्स के साथ तस्वीरें खिंचवा रही थीं। डोंट बी शाय आलिया भट्ट के प्रोडक्शन की फिल्म है। फिल्म में प्यार और जिंदगी के फैसलों के बीच की कहानी दिखाई गई है। जो 25 सितंबर को प्राइम वीडियो पर रिलीज होगी। आलिया भट्ट ने बॉडीगार्ड को फैन से बदसलूकी करने से रोका था 2024 में आलिया भट्ट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में एक फैन एयरपोर्ट पर आलिया के साथ सेल्फी लेने की कोशिश करता नजर आया। इसी दौरान उनके बॉडीगार्ड ने फैन की शर्ट पकड़कर उसे पीछे खींच दिया। यह देखकर आलिया नाराज हो गईं और बॉडीगार्ड को ऐसा करने से रोकते हुए कहा कि किसी को टच न करें। इसके बाद आलिया ने खुद उस फैन को अपने पास बुलाया और उसके साथ फोटो क्लिक कराई। आलिया ने बताया, शाहीन कैसे करती थीं रेजबेट डोंट बी शाय के ट्रेलर लॉन्च पर आलिया ने बहन शाहीन का बचपन का किस्सा सुनाया। कार्यक्रम के होस्ट ने आलिया, शाहीन और डायरेक्टर सृति मुखर्जी से ‘ऑरा फार्मिंग’, ‘ब्रेडक्रम्बिंग’, ‘साइड क्वेस्ट’, ‘ब्रेनरॉट’ और ‘रेजबेट’ जैसे जेन जी टर्म्स के मतलब पूछे। आलिया ने ‘रेजबेट’ का मतलब बताते हुए कहा, “जब मैं बच्ची थी, तब शाहीन मेरे साथ यही करती थीं। वह मुझसे कहती थीं कि मैं पार्ले-जी के साथ फ्री आई हूं।” उन्होंने कहा, “वह कहती थीं कि मैं असल में अपनी मां और पापा की बच्ची नहीं हूं। मैं चार साल की थी, जब शाहीन मुझे रेजबेट करती थीं।” फिल्म डोंट बी शाय में चार नए एक्टर्स और एक डेब्यूटेंट डायरेक्टर हैं। कार्यक्रम की शुरुआत में आलिया ने कहा, “14 साल पहले मैंने एक एक्टर के तौर पर डेब्यू किया था। आज 14 साल बाद मैं चार नए एक्टर्स और एक डेब्यूटेंट डायरेक्टर को पेश कर रही हूं।” उन्होंने आगे कहा, “इस समय मैं उनसे कहीं ज्यादा नर्वस हूं। मेरे पेट में तितलियां उड़ रही हैं।” प्रोड्यूसर बनने पर बोलीं आलिया आलिया से पूछा गया कि क्या वह इस फिल्म में एक्ट्रेस के तौर पर भी काम करना चाहती थीं। उन्होंने कहा, “नहीं, मुझे नहीं लगता कि मैंने कभी ऐसा महसूस किया।” उन्होंने कहा, “मुझे एक्ट्रेस बनना और कैमरे के सामने रहना पसंद है, लेकिन प्रोड्यूसर बनने से एक अलग तरह की संतुष्टि मिलती है। इससे मुझे खुशी का एक और लेवल मिलता है।” आलिया ने बताया कि फिल्म की दुनिया और कहानी को शुरू से तैयार करने में टीम शामिल रही। सृति उनके पास एक आइडिया लेकर आई थीं और फिल्म बनाने की इच्छा जताई थी। आलिया ने कहा, “हमने कहा कि हां, इसे साथ में करते हैं। इसे तैयार करने में दो साल लगे। इसके बाद हम इसे अमेजन के अपने प्यारे पार्टनर्स के पास लेकर गए।” उन्होंने आगे बताया, “शुक्रवार को हमने उन्हें मटेरियल भेजा था। शनिवार सुबह निखिल ने मैसेज किया- आलिया, बात करते हैं।”

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‘हनुमान अंश’ की शूटिंग के दौरान पहुंचा रहस्यमयी बंदर:मूर्ति स्थापना देखता रहा; भगवान दास बोले- लगा जैसे हनुमान जी खुद निगरानी कर रहे हों

फिल्म ‘हनुमान अंश’ में गोपाल का किरदार निभाकर अभिनेता भगवान दास पटेल इन दिनों दर्शकों का ध्यान खींच रहे हैं। मध्य प्रदेश के जबलपुर से मुंबई तक का उनका सफर आसान नहीं रहा। थिएटर में छह साल बिताने के बाद उन्होंने टीवी और फिल्मों में छोटे-बड़े किरदार निभाए। मुझसे फ्रेंडशिप करोगे, प्रेम रतन धन पायो, थार, रंगबाज और फोटोग्राफ जैसी फिल्मों और सीरीज का हिस्सा रहे भगवान दास ने दैनिक भास्कर से बातचीत में फिल्म की शूटिंग के दिलचस्प किस्सों, करियर के संघर्ष और सफलता के बाद मिल रही लोगों की दुआओं पर बात की। सवाल: ‘हनुमान अंश’ में गोपाल का किरदार आपको कैसे मिला? जवाब: मुझे एक जानने वाले ने फिल्म के बारे में बताया था। उन्होंने कहा कि फिल्म नीम करौली बाबा पर बन रही है और गोपाल का किरदार है। पैसे ज्यादा नहीं थे, लेकिन किरदार अच्छा था। मैं निर्देशक विशाल सर से मिलने गया। वहां हनुमान जी की एक तस्वीर लगी थी, जिसमें नीम करौली बाबा ध्यान में बैठे थे। उस तस्वीर ने मेरा ध्यान खींचा। इसके बाद उन्होंने कहानी सुनाई और मैंने एक-दो दिन बाद ऑडिशन दिया। मेरा एक ही ऑडिशन हुआ और मेरा चयन हो गया। सवाल: फिल्म की शूटिंग के दौरान ऐसा क्या हुआ, जिसे आप आज भी याद करते हैं? जवाब: शूटिंग के दौरान हम लोग हर दिन हनुमान चालीसा पढ़ते थे और गणेश जी की पूजा करते थे। कई मुश्किलें आती थीं, लेकिन किसी न किसी तरह सब ठीक हो जाता था। एक बार का किस्सा बहुत खास है। जब हम बजरंगबली की मूर्ति स्थापित करने वाला सीन शूट कर रहे थे, तभी एक काले मुंह वाला बंदर बरगद के पेड़ पर आकर बैठ गया। वह काफी देर तक देखता रहा कि मूर्ति कैसे स्थापित हो रही है। हमने उसे केले दिए, वह केले भी खाता रहा और शूटिंग भी देखता रहा। बाद में जब झोपड़ी बनाई जा रही थी, तब भी वह वहीं था। हमें लगा जैसे वह पूरी शूटिंग की निगरानी कर रहा हो। गांव वालों ने भी कहा कि उन्होंने करीब 13-14 साल बाद वहां ऐसा बंदर देखा है। सवाल: फिल्म में कौन-सा सीन आपको सबसे ज्यादा भावुक करता है? जवाब: ट्रेन वाला सीन मेरे दिल के बहुत करीब है। फिल्म में महाराज जी ट्रेन रोक देते हैं। अंग्रेज अधिकारी आते हैं और कहते हैं कि इनके पास टिकट नहीं है। फिर किसी तरह टिकट सामने आ जाती है। महाराज जी कहते हैं कि किसी साधु-संत को ट्रेन में बैठने से कभी मत रोको। इस पूरे सीन में गोपाल का महाराज जी के प्रति जुड़ाव बहुत गहरा है। उन्हें देखकर ऐसा लगता है कि वह भगवान का ही स्वरूप हैं। उस सीन को करते हुए मैं अंदर से बहुत भावुक हो गया था। सवाल: महाराज जी का किरदार निभाने वाले अभिनेता पहले से तय थे? जवाब : नहीं। पहले किसी दूसरे अभिनेता के साथ एक दिन शूट हो चुका था, लेकिन अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई। इसके बाद नए अभिनेता की तलाश शुरू हुई। उसी दौरान शोभिनव, जो निर्देशन टीम में थे, उनके साथ मेरी रीडिंग हुई। मैंने उन्हें पहली बार ठीक से तब देखा। उनका चेहरा बाबा के किरदार के लिए बिल्कुल सही लगा। हमने कई सीन की रिहर्सल की और उन्होंने बहुत जल्दी किरदार पकड़ लिया। बाद में पता चला कि वह लखनऊ में थिएटर कर चुके हैं। उन्होंने फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) में कुछ फिल्मों में असिस्ट किया है। मुझे लगा कि शायद यह किरदार उन्हीं के लिए था। सवाल: शूटिंग के दौरान कभी लगा कि फिल्म पूरी नहीं हो पाएगी? जवाब: कई बार मुश्किलें आईं। कलाकारों के आने-जाने में दिक्कत हुई, जनरेटर और दूसरी व्यवस्थाओं की परेशानी हुई, बारिश की वजह से शूटिंग रुकी। करीब 24-25 दिन हम चित्रकूट में रहे। लेकिन विशाल सर (विशाल चतुर्वेदी-डायरेक्टर) बहुत स्पष्ट और आत्मविश्वासी थे। उन्हें पता था कि फिल्म पूरी करनी है। इसलिए किसी न किसी तरह शूट आगे बढ़ता रहा। सवाल: फिल्म की सफलता के बाद आपकी जिंदगी कितनी बदली है? जवाब: बहुत ज्यादा। ऐसा जीवन मैंने पहले कभी नहीं देखा था। पिछले कुछ दिनों से लगातार फोन और संदेश आ रहे हैं। लोग इतनी अच्छी दुआएं और शुभकामनाएं दे रहे हैं कि कई बार मैं भावुक हो जाता हूं। सबसे अच्छी बात यह है कि बहुत से लोग मुझे जानते तक नहीं, फिर भी मेरे लिए दुआ कर रहे हैं। मैं कोशिश करता हूं कि जितने लोगों को जवाब दे सकता हूं, उन्हें धन्यवाद दूं। सवाल: आपके करियर की शुरुआत कैसे हुई? जवाब: बचपन से ही अभिनय में रुचि थी। उस समय मोबाइल नहीं था, रेडियो सुनता था। कलाकारों के इंटरव्यू आते थे, मैं उनकी बातें डायरी में लिखता था। मुंबई के कई स्कूलों के पते भी जुटाता था और कलाकारों को चिट्ठियां लिखता था कि मुझे मौका दें। किसी का जवाब नहीं आया, लेकिन सपना बना रहा। 12वीं के बाद मैंने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) के बारे में पता किया। उसके लिए थिएटर के अनुभव की जरूरत थी। मेरे गुरु अरुण पांडे जी ने मुझे रंगमंडल से जोड़ा। इसके बाद करीब छह साल थिएटर किया। दो बार NSD की कोशिश की, लेकिन चयन नहीं हुआ। बाद में लखनऊ के भारतेंदु नाट्य अकादमी में प्रवेश मिल गया। सवाल: मुंबई आने के बाद पहला काम कैसे मिला? जवाब: मुंबई आने के करीब डेढ़ महीने बाद मुझे टीवी सीरियल ‘देवी’ में बुंदेली भाषा के संवाद और बोली पर काम मिला। मेरे सीनियर राम मेहर झांगड़ा ने मुझे मिलवाया था। मैं कलाकारों को बुंदेली के शब्द और बोलने का तरीका बताता था। बाद में उसी सीरियल में छोटा-सा किरदार भी किया। सवाल: इसके बाद किन फिल्मों में काम किया? जवाब: मुझसे फ्रेंडशिप करोगे में ऑटो ड्राइवर का किरदार किया। फिर प्रेम रतन धन पायो में रामलीला के सीन में कैकेयी का किरदार निभाया। इसके बाद शादिस्तान और थार जैसी फिल्मों में काम किया। रंगबाज में गज्जू का किरदार किया। फोटोग्राफ में कुल्फी वाले का छोटा-सा किरदार था। उस किरदार की तैयारी के लिए मैं करीब 10-15 दिन जुहू में कुल्फी बेचने वालों के साथ घूमता था और देखता था कि वे किस तरह कुल्फी बेचते हैं। सवाल: कभी लगा कि अभिनय छोड़कर घर लौट जाना चाहिए? जवाब: हिम्मत कई बार टूटी, लेकिन कभी यह विचार नहीं आया कि अभिनय छोड़ दूं। मुझे इसके अलावा कुछ आता भी नहीं है। मैंने ड्रामा पढ़ाने की कोशिश की, दूसरे काम किए, नुक्कड़ नाटक भी किए, लेकिन अभिनय से जुड़ा रहा। मेरा मानना है कि इंसान को वही काम करना चाहिए, जिसमें उसे खुशी मिलती है। सफल हों या असफल, अपने मन का काम करने में एक अलग संतोष है। सवाल: ‘हनुमान अंश’ के बाद अब आगे क्या? जवाब: अभी कुछ प्रोजेक्ट्स पर बातचीत चल रही है। जबलपुर में शूट की गई एक फिल्म आने वाली है। एक शॉर्ट फिल्म है, जो फिल्म समारोहों में जा रही है। मेट्रो सिटी नाम का डॉक्यू-ड्रामा भी है। अभी मैं बस अच्छे काम का इंतजार कर रहा हूं। हनुमान अंश के बाद लोगों का प्यार मिला है, इसलिए उम्मीद है कि आगे भी अच्छा काम मिलेगा। _______________________________________ यह खबर भी पढ़ें.. हनुमान अंश का कलेक्शन होगा 200 करोड़ पार:33वें दिन सबसे ज्यादा कमाई करने वाली बॉलीवुड फिल्म बनी, धुरंधर, 3 इडियट्स, पठान से आगे; जानिए रिकॉर्ड्स हनुमान अंश ने रिलीज के 33वें दिन मंगलवार को ₹11.00 करोड़ का कलेक्शन किया है। फिल्म की कमाई सोमवार के ₹10.00 करोड़ के मुकाबले 10% बढ़ी। इसके साथ महज 2 करोड़ में बनी हनुमान अंश 33वें दिन में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली बॉलीवुड फिल्म बन चुकी है। इसने आमिर-शाहरुख की फिल्मों को भी पछाड़ दिया है।पूरी खबर पढ़ें..

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लगातार दूसरी टी20 सीरीज जीतकर गदगद कप्तान श्रेयस अय्यर, बोले- जो चाहा वो मिला

shreyas iyer statement: श्रेयर अय्यर बतौर कप्तान भारत को लगातार दूसरी टी20 सीरीज जिताकर काफी खुश हैं. उनकी कप्तानी की शुरुआत अच्छी नहीं रही, जब आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ टीम इंडिया को शमर्नाक हार का सामना करना पड़ा, लेकिन जिम्बाब्वे और अफगानिस्तान के खिलाफ लगातार सीरीज जीत ने अय्यर के कॉन्फिडेंस को बूस्ट किया है. Wed, 16 Sep 2026 00:09:51 +0530

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