MNREGA पुन: लागू करने की मांग वाला प्रस्ताव पारित करने के लिए विशेष सत्र बुलाया जाएगा: Siddaramaiah
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने बृहस्पतिवार को कहा कि राज्य विधानसभा का एक विशेष सत्र जल्द बुलाया जाएगा, जिसमें केंद्र सरकार से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) को फिर से लागू करने की मांग करते हुए प्रस्ताव पारित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने यह बात यहां एक होटल में कांग्रेस विधायकों की बैठक में कही, जिसमें पार्टी द्वारा देश भर में आयोजित ‘मनरेगा बचाओ’ जन आंदोलन पर चर्चा की गई। उप मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी के शिवकुमार, राज्य सरकार के सभी मंत्री, कांग्रेस के विधायक और विधान परिषद सदस्य बैठक में मौजूद थे।
कांग्रेस ने मांग की है कि केंद्र सरकार ‘विकसित भारत- रोजगार एंड आजीविका मिशन गारंटी (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) कानून को रद्द करे, और संप्रग के समय के मनरेगा को वापस लागू करे।
भारत ने प्रामाणिक ऐतिहासिक साक्ष्यों के माध्यम से सभ्यतागत मूल्यों को कायम रखा है: Adityanath
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बृहस्पतिवार को ‘प्रारंभिक उत्तर भारत व इसके सिक्के’ पुस्तक का विमोचन करते हुए इसे भारत की लोकतांत्रिक चेतना और हजारों साल पुरानी सांस्कृतिक विरासत को सुबूतों के साथ पेश करने वाला अहम दस्तावेज करार दिया।
मुख्यमंत्री ने अपने सरकारी आवास के सभागार में हिंदुजा फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘प्रारंभिक उत्तर भारत व इसके सिक्के’ नामक किताब का विमोचन किया। साथ ही उन्होंने फाउंडेशन द्वारा संग्रहित दुर्लभ और प्राचीन ऐतिहासिक सिक्कों का अवलोकन भी किया।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा, “भारत ने हमेशा सनातन संस्कृति और इतिहास से जुड़े प्रमाणों को प्रमुखता से रखा है। ‘प्रारंभिक उत्तर भारत व इसके सिक्के’ पुस्तक भारत की लोकतांत्रिक चेतना, ऐतिहासिक एकता और हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को प्रमाणों के साथ प्रस्तुत करने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है जो वर्षों से किए जा रहे पश्चिमी दुष्प्रचार का तथ्यात्मक उत्तर देता है।”
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के बारे में अगर किसी को जानना है तो उसे भारत से सीखना होगा। आदित्यनाथ ने कहा, “पुस्तक में अयोध्या, मथुरा, कौशाम्बी, काशी और पांचाल सहित अनेक क्षेत्रों के तांबे, चांदी और मिश्रित धातुओं से बने सिक्के उस समय की ऐतिहासिक, भौगोलिक और व्यापारिक स्थिति को प्रमाणित करते हैं। भारत ने सदैव तथ्य और साक्ष्य के साथ अपनी बात रखी है, जबकि पश्चिमी देशों ने लोकतंत्र को अपना योगदान बताकर इतिहास को विकृत करने का प्रयास किया।”
मुख्यमंत्री ने मौर्य शासनकाल को भारत का स्वर्ण युग बताते हुए कहा कि उस समय विश्व की अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 46 प्रतिशत थी जिसके बाद 15वीं सदी तक यह 24 प्रतिशत रही, लेकिन विदेशी शासकों के दोहन के कारण स्वतंत्रता के समय यह घटकर डेढ़ से दो प्रतिशत रह गई।
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